जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 का मुंबई संस्करण भारतीय सिनेमा की विविधता, अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नई तकनीकी संभावनाओं का एक महत्त्वपूर्ण मंच बनकर सामने आया। 130 फिल्मों का प्रदर्शन, 25 से अधिक देशों की भागीदारी, 35 से अधिक भाषाओं की उपस्थिति और फिल्मी हस्तियों के साथ आयोजित संवादों ने इसे बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।

इस आयोजन की सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषता यह रही कि यहां सिनेमा को केवल मनोरंजन या व्यावसायिक सफलता के आधार पर नहीं देखा गया, बल्कि उसे सामाजिक अनुभव, रचनात्मक अभिव्यक्ति, सांस्कृतिक संवाद और रोजगार की संभावनाओं से जोड़कर समझने का प्रयास किया गया।

जागरण फिल्म फेस्टिवल (Jagran Film Festival–JFF) 2026 का मुंबई संस्करण भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के विविध रंगों, नए फिल्मकारों की रचनात्मकता और सिनेमा के बदलते स्वरूप को समझने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर रहा। 28 से 31 अक्टूबर तक मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित सिनेपोलिस, फन रिपब्लिक मॉल में आयोजित इस समारोह का समापन 1 नवंबर को पुरस्कार समारोह के साथ हुआ। इस वर्ष फेस्टिवल की थीम थी— 'सिनेमा से प्यार न करें, इसे जिएं' (Don't Just Love Cinema, Live It)।

इस आयोजन का महत्त्व केवल फिल्मों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं था। इसका उद्देश्य मुख्यधारा के सिनेमा, स्वतंत्र फिल्मों, अंतरराष्ट्रीय फिल्मों, वृत्तचित्रों और नई पीढ़ी के फिल्मकारों को एक साझा मंच प्रदान करना था। इस दृष्टि से यह समारोह सिनेमा को मनोरंजन के साथ-साथ सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और वैचारिक विमर्श के माध्यम के रूप में प्रस्तुत करता दिखाई दिया।

1. फिल्मों का व्यापक संसार: भारतीय और अंतरराष्ट्रीय सिनेमा का संगम

इस वर्ष मुंबई संस्करण के लिए 500 से अधिक फिल्मों की प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं, जिनमें से 130 फिल्मों का चयन प्रदर्शन के लिए किया गया। इन फिल्मों में 25 से अधिक देशों और 35 से अधिक भाषाओं का प्रतिनिधित्व था। भारतीय सिनेमा की 15 भाषाओं तथा अंतरराष्ट्रीय सिनेमा की 20 भाषाओं की फिल्मों ने इस आयोजन को बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक स्वरूप प्रदान किया।

प्रदर्शित फिल्मों का वर्गीकरण इस प्रकार था:

  • 33 भारतीय फीचर फिल्में।

  • 51 भारतीय लघु फिल्में।

  • 11 भारतीय वृत्तचित्र।

  • 12 अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्में।

  • 17 अंतरराष्ट्रीय लघु फिल्में।

  • 6 अंतरराष्ट्रीय वृत्तचित्र।

इस प्रकार कुल 130 फिल्मों के माध्यम से दर्शकों को कथा, समाज, संस्कृति, राजनीति, मानवीय संबंधों और जीवन के विविध अनुभवों को देखने का अवसर मिला। विशेष रूप से 24 फिल्मों का प्रीमियर होना इस संस्करण की उल्लेखनीय उपलब्धि रही। इनमें 13 विश्व प्रीमियर, 2 एशिया प्रीमियर और 9 भारतीय प्रीमियर शामिल थे।

समारोह की भारतीय ओपनिंग फिल्म 'पास्ट टेंस' (Pastt Tense) थी, जिसका निर्देशन अनंत नारायण महादेवन ने किया। यह एशिया प्रीमियर था। अंतरराष्ट्रीय ओपनिंग फिल्म कनाडा और बेल्जियम की 'स्टील अवे' (Steal Away) रही, जिसका निर्देशन क्लेमेंट विर्गो ने किया। देश-केंद्रित विशेष प्रस्तुति में रोमानियाई फिल्म 'एनेस्कु, स्किन्ड अलाइव' (Enescu, Skinned Alive) को स्थान दिया गया। मराठी फिल्म 'गोंधल' (Gondhal), जिसके निर्देशक संतोष दवखर हैं, समापन फिल्म रही।
इस फेस्टिवल की सबसे बड़ी विशेषताओं में स्थापित फिल्मकारों, वरिष्ठ अभिनेताओं और युवा कलाकारों की सक्रिय भागीदारी रही। समारोह में आनंद एल. राय, इम्तियाज अली, परेश रावल, अदा शर्मा, पंकज त्रिपाठी, अमोल गुप्ते, सौरभ सचदेवा, श्रीराम राघवन और मुकेश छाबड़ा जैसे फिल्मी व्यक्तित्वों ने विभिन्न बातचीत सत्रों, कार्यशालाओं और मास्टरक्लास के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

उद्घाटन दिवस पर आनंद एल. राय और अभिनेता अंश दुग्गल ने फिल्म 'नखरेवाली' के संदर्भ में बातचीत की। अदा शर्मा ने अपने अभिनय अनुभव साझा किए। इम्तियाज अली और मोहित चौधरी ने सिनेमा और रचनात्मक प्रक्रिया पर विचार रखे। परेश रावल के साथ आयोजित संवाद में आदित्य रावल, शारिब हाशमी, तनिष्ठा चटर्जी और अनंत नारायण महादेवन भी शामिल हुए। इस सत्र में अभिनय, चरित्र निर्माण और कलाकारों के आपसी रचनात्मक सहयोग जैसे विषय विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण रहे।

29 अक्टूबर को पंकज त्रिपाठी के साथ बातचीत और अमोल गुप्ते की कार्यशाला आकर्षण के केंद्र रहे। इसके अतिरिक्त मुकेश छाबड़ा का कास्टिंग सत्र आयोजित हुआ, जिसमें अभिनय के क्षेत्र में अवसरों और कलाकारों के चयन की प्रक्रिया को समझने का अवसर मिला। 30 अक्टूबर को सौरभ सचदेवा ने अभिनय कार्यशाला के माध्यम से अभिनय की बारीकियों और कलाकार की आंतरिक तैयारी पर ध्यान केंद्रित किया। श्रीराम राघवन जैसे फिल्मकारों की मास्टरक्लास और संवादों ने भी इस आयोजन के बौद्धिक पक्ष को समृद्ध किया।

3. चर्चा सत्र: सिनेमा, तकनीक और रचनात्मक शिक्षा

जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 की एक उल्लेखनीय उपलब्धि यह रही कि इसमें फिल्म प्रदर्शन के साथ-साथ सिनेमा के व्यावहारिक, तकनीकी और आर्थिक पक्षों पर भी विमर्श हुआ।

इस संदर्भ में कुछ प्रमुख विषय थे:

  • द ऑरेंज इकॉनमी और रचनात्मक शिक्षा: MAAC द्वारा प्रस्तुत इस सत्र में रचनात्मक उद्योगों, कौशल आधारित शिक्षा और रोजगार की संभावनाओं पर ध्यान दिया गया। फिल्म निर्माण, एनीमेशन और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों का महत्त्व रेखांकित हुआ।

  • अभिनय और फिल्म निर्माण में रोजगार: शिखर थिएटरवाला के सत्र में अभिनय, लेखन, निर्देशन, संपादन और सिनेमैटोग्राफी जैसे कौशलों को आजीविका से जोड़ने के सवाल पर चर्चा हुई।

  • कास्टिंग और नए कलाकार: मुकेश छाबड़ा और अनमोल आहूजा के कास्टिंग सत्रों ने फिल्म उद्योग में नए कलाकारों की संभावनाओं और चयन प्रक्रिया को समझने का अवसर दिया।

  • एआई और फिल्म निर्माण: 31 अक्टूबर को एरीना एनीमेशन की ओर से आयोजित AI Filmmaking Workshop में फिल्म निर्माण की बदलती तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।

इन सत्रों से स्पष्ट हुआ कि आज सिनेमा केवल कैमरे, पटकथा और अभिनय तक सीमित नहीं है। इसके साथ डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कौशल विकास, रोजगार और नए व्यावसायिक मॉडल भी जुड़ रहे हैं। इस प्रकार फेस्टिवल ने फिल्म उद्योग के वर्तमान के साथ उसके भविष्य पर भी संवाद का अवसर उपलब्ध कराया।

4. पुरस्कार समारोह और विशेष सम्मान

1 नवंबर को मुंबई के JW मैरियट, जुहू स्थित ग्रैंड संगम बॉलरूम में पुरस्कार समारोह के साथ फेस्टिवल का समापन हुआ। इस अवसर पर फिल्मों, ओटीटी कार्यक्रमों और कलाकारों की रचनात्मक उपलब्धियों को सम्मानित किया गया।

समारोह में बॉबी देओल को JFF Achiever's Award प्रदान किया गया। रोहित शेट्टी ने अपने दिवंगत पिता एवं प्रसिद्ध एक्शन निर्देशक एम. बी. शेट्टी की ओर से विशेष विरासत सम्मान ग्रहण किया। फिल्मकार मधुर भंडारकर को उनकी एक महत्त्वपूर्ण फिल्म के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सम्मानित किया गया। टिस्का चोपड़ा की फिल्म 'साली मोहब्बत' को सर्वश्रेष्ठ ओटीटी फिल्म का सम्मान मिला।

पुरस्कारों में 'मैं वापस आऊंगा' के लिए वेदांग रैना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। मराठी फिल्म 'गोंधल' को भी सर्वश्रेष्ठ फिल्म के सम्मान के साथ विशेष पहचान मिली। इन सम्मानों ने स्थापित कलाकारों के साथ नई पीढ़ी के कलाकारों और ओटीटी माध्यम की बढ़ती महत्ता को भी रेखांकित किया।

5. फेस्टिवल का व्यापक सांस्कृतिक और सामाजिक महत्त्व

जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 को केवल एक मनोरंजन आधारित आयोजन के रूप में देखना उचित नहीं होगा। इसकी वास्तविक उपलब्धि यह रही कि इसने व्यावसायिक सिनेमा और स्वतंत्र सिनेमा के बीच संवाद की संभावनाएं विकसित कीं। छोटी फिल्मों, वृत्तचित्रों और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने से उन कहानियों को भी दर्शकों तक पहुंचने का अवसर मिला, जिन्हें सामान्य व्यावसायिक वितरण व्यवस्था में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता।

फिल्मों और चर्चा सत्रों के माध्यम से समाज, संस्कृति, मानवीय संबंधों, बदलती जीवनशैली और तकनीकी परिवर्तन जैसे विषयों पर विचार करने की संभावनाएं बनीं। विशेष रूप से युवा फिल्मकारों, विद्यार्थियों और सिनेमा में करियर बनाने के इच्छुक लोगों के लिए मास्टरक्लास और कार्यशालाएं उपयोगी रहीं।

इस आयोजन का एक अन्य महत्त्वपूर्ण पक्ष भारतीय भाषाओं के सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय फिल्मों के साथ प्रस्तुत करना था। इससे क्षेत्रीय सिनेमा की रचनात्मक क्षमता और सांस्कृतिक विविधता को व्यापक पहचान मिली।

जागरण फिल्म फेस्टिवल 2026 ने यह संदेश दिया कि सिनेमा केवल पर्दे पर दिखाई जाने वाली कहानी नहीं है, बल्कि वह समाज को देखने, समझने, प्रश्न करने और नए विचारों की खोज करने का एक सशक्त माध्यम भी है। यही इस वर्ष की थीम 'सिनेमा से प्यार न करें, इसे जिएं' का वास्तविक आशय भी है।

समारोह में दिखाई गई कुछ प्रमुख फिल्में
1. Pastt Tense
निर्देशक: अनंत नारायण महादेवन | हिंदी | 112 मिनट | 2025
यह महोत्सव की उद्घाटन भारतीय फिल्म थी। कहानी एक युवक की है जो अपने जैविक माता-पिता द्वारा छोड़े जाने के पीछे का सच जानने निकलता है। उसकी खोज में परिवार के अतीत से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और पीड़ादायक सच सामने आता है। इसमें परेश रावल, आदित्य रावल, आदिल हुसैन और तनीष्ठा चटर्जी हैं।
. गोंधळ (Gondhal)
निर्देशक: संतोष दवखर | मराठी | 120 मिनट | 2025
महाराष्ट्र की लोकपरंपरा 'गोंधळ' को आधार बनाकर बनाई गई मनोवैज्ञानिक थ्रिलर। विवाह, पारिवारिक रिश्तों, प्रेम, महत्वाकांक्षा और एक खतरनाक योजना के इर्द-गिर्द इसकी कहानी है। फिल्म में लोक-अनुष्ठान और रहस्य का दिलचस्प मेल है। इसे महोत्सव की समापन फिल्म रखा गया था और जागरण फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का पुरस्कार भी मिला।
3. मैं वापस आऊँगा (Main Vaapas Aaunga)
निर्देशक: इम्तियाज अली | हिंदी | 166 मिनट | 2026
यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि में प्रेम, बिछड़ने, स्मृतियों और अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव की कहानी प्रस्तुत करती है। एक बुजुर्ग व्यक्ति की अपने पुश्तैनी घर सरगोधा लौटने की इच्छा से अतीत की प्रेम कहानी और विभाजन का दर्द सामने आता है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह, दिलजीत दोसांझ, वेदांग रैना और शरवरी हैं। महोत्सव में इसे 'सरहद' विशेष खंड में दिखाया गया।
4. इक्कीस (Ikkis)
निर्देशक: श्रीराम राघवन | हिंदी | 147 मिनट | 2026
यह परमवीर चक्र से सम्मानित सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेतरपाल के जीवन पर आधारित युद्ध फिल्म है। 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में बसंतर की लड़ाई के दौरान मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्होंने अद्भुत साहस दिखाया और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। इसमें अगस्त्य नंदा, धर्मेंद्र और जयदीप अहलावत हैं। फेस्टिवल में इसे 'सरहद' विशेष खंड में प्रदर्शित किया गया।
2. अंतरराष्ट्रीय फिल्में
6. Steal Away
निर्देशक: क्लेमेंट विर्गो | अंग्रेजी, फ्रेंच, लिंगाला | 113 मिनट
कहानी दो किशोर लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक संपन्न परिवार में रहने वाली लड़की और वहाँ शरण लेने आई अफ्रीकी मूल की युवती के बीच गहरा संबंध बनता है। धीरे-धीरे प्रेम, ईर्ष्या, सामाजिक असमानता और सत्ता के कठोर रूप सामने आते हैं। यह मनोवैज्ञानिक थ्रिलर है और महोत्सव की अंतरराष्ट्रीय उद्घाटन फिल्म थी।
7. Enescu, Skinned Alive
निर्देशक: टोमा एनाचे | रोमानियाई और फ्रेंच | 120 मिनट | 2024
यह रोमानिया के महान संगीतकार और वायलिन वादक जॉर्ज एनेस्कु के जीवन पर आधारित बायोग्राफिकल फिल्म है। संगीत के प्रति समर्पण, व्यक्तिगत जीवन, प्रेम और एक महान रचना को जन्म देने की कलाकार की बेचैनी इसमें प्रमुख विषय हैं। इसे महोत्सव के Country Focus खंड में रखा गया था।
8. The Gambler
निर्देशक: अल्दियार बैराकिमोव | कज़ाख | 120 मिनट | 2025
कजाकिस्तान की फिल्म। इसे World Cinema श्रेणी में प्रदर्शित किया गया।
9. La Vida Es (Life Is)
निर्देशक: लोरेना विलार्रिया | स्पेनिश | 120 मिनट | मेक्सिको | 2025
यह मैक्सिकन फिल्म World Cinema श्रेणी में शामिल थी। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा के दर्शकों के लिए अलग सांस्कृतिक परिवेश की फिल्म देखने का अवसर है। इसकी कहानी का विवरण फाइल में नहीं है।
3. पुरानी लेकिन महत्वपूर्ण भारतीय फिल्में
इस महोत्सव की एक अच्छी बात यह भी है कि इसमें बच्चों और परिवार के लिए पहले से चर्चित फिल्मों को फिर से दिखाया गया।
आय एम कलाम- I Am Kalam
निर्देशक: नीला माधब पांडा | हिंदी | 78 मिनट | 2010
राजस्थान के एक गरीब परिवार के बच्चे छोटू की कहानी, जो डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम से प्रेरित होकर पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का सपना देखता है। शिक्षा, गरीबी और सामाजिक असमानता पर बेहद प्रेरक फिल्म।
11. स्टैनली का डब्बा - Stanley Ka Dabba
निर्देशक: अमोल गुप्ते | हिंदी | 96 मिनट | 2011
मुंबई के स्कूल में पढ़ने वाले स्टेनली की कहानी, जो रोज अपना टिफिन नहीं लाता और दोस्तों के साथ खाना बाँटकर खाता है। फिल्म बच्चों की दोस्ती, संवेदनशीलता और स्कूल व्यवस्था के व्यवहार पर सुंदर टिप्पणी करती है।
12. Hawa Hawaai
निर्देशक: अमोल गुप्ते | हिंदी | 120 मिनट | 2014
एक गरीब बच्चा स्केटिंग चैंपियन बनने का सपना देखता है। उसके चार दोस्त और एक प्रशिक्षक मिलकर उसकी मदद करते हैं। यह दोस्ती, मेहनत, प्रतिभा और सपनों को पूरा करने के संकल्प की प्रेरक कहानी है।