हिमाचल प्रदेश के प्रतिष्ठित कवि डॉ विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ और लखनऊ के प्रतिष्ठित कवि विनोद शंकर शुक्ल 'विनोद' का आगमन चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई के लिए एक रचनात्मक और यादगार अनुभव रहा। रविवार 3 मई 2026 को केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव में आयोजित कार्यक्रम में दोनों रचनाकारों ने अपनी लेखन यात्रा का ज़िक्र करते हुए अपनी चुनिंदा रचनाओं का पाठ किया।

डॉ विनोद प्रकाश गुप्ता ‘शलभ’ भारतीय प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। आपके चार ग़ज़ल-संग्रह प्रकाशित हैं। अपनी लेखन यात्रा पर बात करते हुए उन्होंने कई रोचक अनुभव साझा किए। विनोद जी ने बताया कि 68 साल की उम्र में ग़ज़ल की बहर सीखने के लिए वे दिल्ली के उस्ताद शायर विजय स्वर्णकार के पास गए थे। विनोद जी ने अपने ग़ज़ल संग्रह ''त्रिशूल',' पत्ते चिनारों के' और' बूंद बूंद ग़ज़ल 'से कई ग़ज़लों का पाठ किया। उनकी ग़ज़लों में सामाजिक संस्कृत परिदृश्य के साथ ही समसामयिक सवालों का बहुत सुंदर समावेश था।

लखनऊ के प्रतिष्ठित कवि विनोद शंकर शुक्ल 'विनोद' को उनके प्रबंध काव्य 'बरवै_विनोद' के लिए हाल ही में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान उत्तर प्रदेश की ओर से एक लाख रूपये के अमीर ख़ुसरो पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुरातन काव्य-परंपरा में शुक्ल जी की गहरी रुचि है।

'कुरुवंशी महान' (प्रबंध काव्य) और 'विश्वामित्र-मेनका' (खंडकाव्य) लिख चुके विनोद शंकर शुक्ल ने अवधी के पारंपरिक 'बरवै' छंद को खड़ी बोली की सरसता में पिरोकर आधुनिक हिंदी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ा है। उन्होंने ने बताया कि 'बरवै-विनोद' पुस्तक में सात सौ इक्कीस बरवै छंदों को छ: शीर्षकों में समाहित किया गया है- सौंदर्य, वियोग, संयोग, वात्सल्य, दायित्व और ज्ञान-भक्ति। सरस भाषा, रोचक शैली और मनमोहक भावनाओं से समृद्ध इस उत्कृष्ट कृति से विनोद शंकर शुक्ल ने चुनिंदा अंश प्रस्तुत किये। उन्होंने ग़ज़ल, घनाक्षरी और मुक्तक भी सुनाए।

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, दिल्ली से प्रेमचंद की संकलित कहानियों का 17वां संस्करण प्रकाशित हुआ है। इस पुस्तक के संपादक प्रो रामबक्ष ने पुस्तक का परिचय देते हुए प्रेमचंद के बारे में कुछ दिलचस्प बातें बताईं। कवयित्री प्रज्ञा मिश्रा ने 'धरोहर' के अंतर्गत इसी पुस्तक से प्रेमचंद की लघुकथा 'राष्ट्र का सेवक' का पाठ किया।

कवि अमर त्रिपाठी ने गोपालदास नीरज की मशहूर कविता 'अब युद्ध नहीं होगा' का पाठ विशिष्ट अंदाज़ में किया। गायिका नाज़नीन ने दिलकश तरन्नुम में शायर देवमणि पांडेय की ग़ज़ल सुनाई।

काव्य-पाठ के सत्र में के.पी. सक्सेना 'दूसरे', प्रदीप गुप्ता, क़मर हाजीपुरी, हेमंत शर्मा और विशू ने विविधरंगी कविताओं का पाठ किया। जाने-माने पर्यावरण प्रेमी अफ़ज़ल खत्री और नुसरत खत्री ने अपनी मौजूदगी से आयोजन की गरिमा बढ़ाई।

आपका : #देवमणि_पांडेय