शब्दों की मिठास, व्यंग्य की धार और सुरीले तराने... रविवार की शाम केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट गोरेगांव में चित्रनगरी संवाद मंच मुम्बई द्वारा आयोजित इंद्रधनुषी काव्य संध्या ने न केवल शाम को ख़ुशनुमा बनाया, बल्कि साहित्य प्रेमियों के दिलों पर एक गहरी छाप छोड़ी।

​मंच पर कविताओं की ऐसी विविधता थी कि हर कोई मंत्रमुग्ध रह गया। कार्यक्रम में जहाँ गीत-ग़ज़ल की मोहक छटा दिखाई दी, वहीं देशभक्ति के जज़्बे ने जोश भर दिया। लोकगीत के माध्यम से कभी मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू महसूस हुई तो कभी दिलकश तरानों ने दिलों में मोहब्बत जगाई।

​#तुझे_हो_यक़ीं_कि_न_हो_यक़ीं

​इस शाम का एक बड़ा आकर्षण गांधीनगर से आए प्रसिद्ध ग़ज़लकार संजीव प्रभाकर का ग़ज़ल संग्रह रहा। उनके संग्रह 'तुझे हो यक़ीं कि न हो यक़ीं' पर सारगर्भित चर्चा हुई। व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय और शायर देवमणि पांडेय ने इस संग्रह की ग़ज़लों का पाठ कर संजीव जी को शुभकामनाएँ दीं।

संजीव प्रभाकर ने अपनी धारदार ग़ज़लों से श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ी। इस अवसर पर चर्चित पत्रिका 'व्यंग्य यात्रा' के नए अंक की मुँह दिखाई भी हुई।

​'​व्यंग्य यात्रा' दिल्ली के संपादक वरिष्ठ व्यंग्यकार प्रेम जनमेजय और व्यंग्यकार सुभाष काबरा के सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रेम जनमेजय ने समसामयिक व्यंग्य रचना - 'ट्रम्प लाल की लीला' का पाठ किया जिसे श्रोताओं ने बहुत पसंद किया।

इंद्रधनुषी काव्य संध्या में शहर के चुनिंदा रचनाकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें शामिल थे - शायरा सविता असीम, राजीव मिश्र 'मधुकर', राजेश ऋतुपर्ण, प्रदीप मिश्र, यशपाल सिंह यश और देवमणि पांडेय। प्रिंस ग्रोवर ने सधे हुए अंदाज़ में क़ाबिले तारीफ़ संचालन किया।

​कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण 'धरोहर' रहा। कवयित्री प्रज्ञा मिश्र ने सुप्रसिद्ध गीतकार माया गोविंद का लोकप्रिय गीत 'डाकिए ने द्वार खटखटाया' उन्हीं के विशिष्ट अंदाज़ में पेश करके श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया।
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​इस साहित्यिक उत्सव का आनंद लेने के लिए प्रो. राम बक्ष, व्यंग्यकार के.पी. सक्सेना 'दूसरे', कवि-पत्रकार हरि मृदुल, अभिनेता अरुण शेखर और अभिनेता सोनू पाहूजा सहित कई प्रबुद्ध जन मौजूद रहे।

​चित्रनगरी संवाद मंच की यह शाम केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि साहित्य के विविध रंगों का एक यादगार उत्सव था जिसने 'व्यंग्य' से लेकर विविधरंगी कविताओं तक का सफ़र बेहद ख़ूबसूरती से तय किया।

#देवमणि_पांडेय