Thursday, July 25, 2024
spot_img
Homeभारत गौरवस्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के रामसिंह जाखड़ का योगदान

स्वतंत्रता संग्राम में हरियाणा के रामसिंह जाखड़ का योगदान

रामसिंह जाखड का जन्म जिला रोहतक की तहसील झज्जर के गांव लडायन में फरवरी सन 1916 में हुआ । आपके पिता चौधरी श्रीराम आर्यसमाजी तथा कांग्रेसी विचारों के व्यक्ति थे । सन 1930 में कांग्रेस आंदोलन में भाग लेने के कारण चौधरी श्रीराम को 6 माह के कारावास की सजा भी काटनी पड़ी ।

इन्हीं संस्कारों में पले रामसिंह अपने बचपन से ही आर्य समाज और कांग्रेस के कार्यों में रुचि लेने लग गए थे । सन 1930 में ही जब नमक सत्याग्रह चल रहा था , एक जत्थे के साथ बालक रामसिंह ने भी गिरफ्तारी दी , परन्तु अदालत ने उन्हें बच्चा समझ कर छोड़ दिया । इसके बाद आपने दोबारा फिर सत्याग्रह किया । फलस्वरूप 26-9-1930 को आपको 3 माह कैद व 50 रुपए जुर्माना देने की सूरत में एक माह की मजीद कैद की सजा मिली , जो आपने रोहतक जेल और बोस्ट्रल जेल लाहोर में काटी ।

समय के साथ – साथ इस निर्भीक और देश – प्रेम से ओत – प्रोत बालक का हौसला और भी बढ़ता गया । सन् 1932 के असहयोग आंदोलन में अनाज मण्डी रोहतक में हो रहे जलसे में स्टेज पर एक जोशीली नजम गाने के जुर्म में 8-3-1932 को 10 बेंतें लगाने की सजा मिली । इसके बाद 4-4-1932 को आपको डिप्टी कमिश्नर रोहतक की अदालत पर से ब्रिटिश राज्य का झण्डा ‘ यूनियन जैक ‘ उतार कर उसकी जगह कांग्रेस का तिरंगा झण्डा लगाने के जुर्मं में दूसरी बार 15-7-1932 को सजा के तौर पर 10 बेंतें लगाई गईं ।

जिस व्यक्ति में जोशे – जवानी ठाठें मार रहा हो और इसके साथ देश – प्रेम का जनून सिर पर सवार हो भला वह बेंतों से क्या डरने वाला था ! ये बेंतें उसके इरादों को टस से मस न कर सकीं और 8-81932 को ही दिल्ली जाकर सत्याग्रहियों के जलूस में शामिल हुए और विलायती कपड़ों की दुकान पर पिकेटिंग करते हुए गिरफ्तार हो गए , जिसके फलस्वरूप 17-8-32 को आपको 5 साल के लिए रैफरमेट्री जेल दिल्ली में भेज दिया गया । यहां जेल में राजनैतिक कैदियों का जेल के अधिकारियों के साथ झगड़ा हो जाने के कारण आपको और आपके तीन नौजवान साथी मेहर सिंह दांगी मदीना , कामरेड बसाखी राम कांगड़ा और मलखान सिंह मुरादाबाद को अलग – अलग तंग और अन्धेरी कोठड़ियों में , जहां चाँद और सूरज भी दिखाई नहीं देते थे , बन्द कर दिया , और 3 माह बाद जब राजनैतिक कैदियों और जेल के अधि कारियों में समझौता हुआ तभी चारों को बाहर निकाला गया ।

जेल से छूटने के बाद भाग लेने लगे थे । आप कांग्रेस के कामों में और भी अधिक दिलचस्पी सन 1935 में आप राजस्थान चले गए । वहां जयपुर स्टेट में गोबिन्दगढ़ मलिकपुर खादी भण्डार में आपने काम किया । यहां रहते हुए श्री हीरालाल शास्त्री , ला ० रामेश्वर दास अग्रवाल , चो ० हरलाल आदि प्रजामण्डल के नेताओं के साथ आपका सम्पर्क रहा । एक साल बाद ही आप कुछ साथियों के साथ बम्बई चले गए । वहां आप ने वर्ली में , जहां मजदूर तबके के गरीब लोग अधिक रहते थे , भारत डाईंग एण्ड प्रिंटिंग वर्कस नाम से एक दुकान बनाई और वहीं रहने लगे । आप अपने मिशन के मुताबिक वहां के मजदूरों में कांग्रेस के प्रति चेतना जगाते रहे । 1937 के चुनावों में आपने श्री बी ० जी ० खैर जो वर्ली के इलाके से कांग्रेस के उमीदवार थे , की मदद की । श्री बी ० जी ० खैर जीते और बम्बई के पहले मुख्य मन्त्री बने । बम्बई में रहते हुए आपका श्री के ० एम ० मुन्शी , मास्टर नगीन दास , श्री के ० एफ ० नरीमन आदि नेताओं से काफी सम्पर्क रहा ।

कुछ अर्से के बाद आपको रोहतक वापिस आना पड़ा । यहां आकर आपने झज्जर को अपनी सरगर्मी का कार्य क्षेत्र बनाया । सन 1940 में आपको तहसील झज्जर कांग्रेस कमेटी का इंचार्ज नामजद किया गया । सन 1941 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में आप को फिर एक साल कैद की सजा मिली , परन्तु 4 माह बाद ही हाई कोर्ट लाहौर के एक फैसले की बिना पर आप रिहा हो गए ।

सन 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में 20-8-42 को आप को फिर गिरफ्तार कर लिया गया और 4 माह तक नजरबन्द रखा गया । इसके बाद आपको सन 1943 के अन्त तक गांव की सीमा में ही पाबन्द रखा गया । आप हर कार्य को निष्ठा और कुशलता से करने की क्षमता रखते थे । आप में सच्चाई और ईमानदारी से कार्य करने की लग्न थी , हौंसला था । आप निर्भीक और स्पष्ट वक्ता भी रहे । स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद आपकी खूबियाँ उभर कर और सामने आईं , जिसके कारण पार्टी , समाज और अन्य जिम्मेदारी के कामों आप अग्रसर रहने लगे ।

स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद आपको इंचार्ज तहसील कांग्रेस कमेटी झज्जर , मैम्बर अलाटमेंट कमेटी झज्जर व प्रधान हरिजन सेवक संघ तहसील झज्जर बनाया गया । फिर बसाओं महकमें के साथ मिल कर आपने झज्जर में शरणार्थियों को फिर से बसाने में बड़ा काम किया । इस अर्से में आपने महसूस किया कि यहां के देहाती इलाके में प्राथमिक चिकित्सा का कोई प्रबन्ध नही है । आप ने यह भी महसूस किया कि जब तक इलाके में मर्द और औरतों को पढ़ाया नहीं जाएगा इलाका तरक्की नहीं करेगा । इसलिए आपने सन 1948 में जनता सुधार सोसाईटी ( Promoting Economic Knowledge Co – op . Society ) gear regrare and afte हल्के में 20 से ऊपर फर्स्ट – एड की शाखाएं खुलवाई । गांव – गांव में प्रोढ़ – शिक्षा केन्द्र खोले गए ।

समय के साथ – साथ आपका कार्य क्षेत्र बढ़ता गया । आप सन 1948 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के जयपुर अधिवेशन तथा 1950 में नासिक अधिवेश के लिए डेलीगेट चुने गए । आप सन 1950 से 1965 तक मैम्बर प्रदेश कांग्रेस कमेटी व सन 1967 से 1972 तक मैम्बर ए ० आई ० सी ० सी ० व प्रधान जिला कांग्रेस रहे । सन 1971 में आपने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के शिमला अधिवेशन में शहरी सम्पत्ति की हद निश्चित करने का प्रस्ताव भी रखा था ।

सन 1963 से 1966 तक कोफ्रेटिव सेंट्रल बैंक रोहतक के डायरेक्टर व उप – प्रधान रहे । सन 1962 1977 तक आप जिला कांग्रेस कमेटी के महामन्त्री रहे । आप उत्तर रेलवे उपभोक्ता समिति के सदस्य भी रहे । और जुलाई सन 1991 में आपको हरियाणा सरकार ने स्वतन्त्रता सैनिक सम्मान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया ।

आपने स्वतन्त्रता संग्राम पर कई पुस्तकें लिखी हैं , जिनमें स्वतन्त्रता संग्राम में जिले रोहतक का योगदान , हरियाणा समारिका , स्वतन्त्रता के गीत , आप बीती और अनुभव , चौ . लहरीसिंह का जीवन परिचय , सर छोटूराम दिग्दर्शन व स्वतन्त्रता संग्राम में हरियाणा का योगदान हैं ।

अमित सिवाहा

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार