Saturday, July 13, 2024
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बिटिया दक्षिणा कम नहीं ज्यादा है, कार वाले तो 501 से ज्यादा नहीं देते तुम तो बाइक का दे रही हो

कुछ दिन पहले अपनी बाइक की पूजा कराने के लिए नजदीक के एक मंदिर पहुंची। पंडित जी ने वैदिक मंत्रों के साथ बाइक की अच्छे से पूजा सम्पन्न कराया। पूजा समाप्त होने के बाद दक्षिणा देने की बारी आयी तो मैने पंडित जी के हथेली पर कुछ पैसे रखते हुए दिल से धन्यवाद कहा। पंडित जी हथेली में दक्षिणा की राशि देखने के बाद मुझे ऐसे देखने लगे जैसे कुछ गड़बड़ हो गयी है। पंडित जी के चेहरे पर असहज भाव को देखकर मैं चौंक गयी, मैं अपनी अचरज को खत्म करने के लिए पूछा क्या दक्षिणा कम है? और कितने दे दूं आप ही बताइए ! पंडितजी ने हंसते हुए कहा बिटिया कम नही ज्यादा है | यहां के लोग सौ दौ सौ रुपए देते है और अपना काम चला लेते हैं l तुमने 1551 रुपये दे दिये ! लाखों रुपये की कार लेकर पूजा कराने वाले भी यहां 501 रुपये से ज्यादा नही देते।

पंडित जी की बात को सुनकर दिल-दिमाग जो असहज हो गया था वह सामान्य हो गया। मैने कहा तब ठीक है आपको निराश नहीं किया। बाइक की पूजा के बाद पंडित जी से बातचीत में पता चला कि वह यूपी के रहने वाले एंथ्रोलॉजी में ग्रेजुएट हैं। नौकरी नहीं मिली तो पूजा-पाठ से घर चला रहे हैं। मैने उन्हें बताया कि Anthropologist की तो विदेशों में बहुत मांग हैं। आपको विदेश चला जाना चाहिए था | वहां होते तो पूजा पाठ और जॉब दोनो के डॉलर मिलते ! खैर पूजा पाठ कर घर चल जा रहा है यह तो अच्छी बात है वरना लोग जिन्हें नौकरी नही मिलती वे गलत तरीके से पैसे कमाने लगते है। पंडित जी ने मेरे बारे मे पूछा तो मैने बताया कि झारखंड की आदिवासी लड़की हूँ दिल्ली मे जॉब करती हूँ। बाइक का बहुत शौक है। पंडित जी ने कहा कि दलितों और आदिवासियों के लिए सरकार बहुत कुछ करती है| हम लोगों के लिए कुछ नही करती। जिस नेता को देखो वह दलितो आदिवासियों की बात करता है |

ब्राह्मणों की कोई बात नही करता ! पंडित जी कि बात में सच्चाई थी। चाहे नेता सवर्ण हो या पिछड़ी जाति का जिसको देखो वह अपने भाषण मे पिछडे दलितों और आदिवासियों की बात तो करता है सवर्ण की बात कोई नही करता। पिछडे, दलित और आदिवासियों के नेता अपनी जात बिरादरी के लोगों के लिए आवाज उठाते है, यहाँ तक की सवर्ण नेता , विधायक, सांसद भी अपनी बिरादरी को छोड़ दलित आदिवासी करते रहते हैं l मेरा कहना है कि जब सवर्ण नेता दलितो और आदिवासियों के हक के लिए आवाज उठा सकते हैं तो फिर दलित और आदिवासी नेता एक्टिविस्ट सवर्ण भाईयों के लिए आवाज क्यों नही उठा सकते ? पंडित जी की बात सही थी आखिर सवर्ण की बात कौन करेगा ?

( बाइक से दुनिया की सबसे ऊंची सड़क की यात्रा करने वाली झारखंड की आदिवासी युवती कंचन उगुरसंडी की कलम से)

साभार-https://www.roamingjournalist.com/2023/09/501.html?m=1 से

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