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उज्जैन के डॉ. अनिरुद्ध भाटी का कोरोना के खिलाफ लड़ाई में बड़ा योगदान

उज्जैन कोरोना के बढ़ते प्रकोप के विरुध्द लड़ाई में शहर के कई युवा अपना योगदान दे रहे हैं। इस भीषण लड़ाई में उज्जैन के कुछ युवा वैज्ञानिको का योगदान भी उल्लेखनीय है। ऐसे ही एक युवा हैं डॉ अनिरुद्ध भाटी। डॉ अनिरुद्ध भाटी जो नेनो टेक्नोलॉजी में रिसर्च वैज्ञानिक हैं, वो पिछले कई सालों से चेन्नई स्थित मैग-जीनोम नामक शोध संस्था में कार्यरत हैं।

2020 में कोरोना की प्रथम आहट के समय अनिरुद्ध और उनकी वैज्ञानिको की टीम ने Covid की RT PCR टेस्ट किट (VTM, RNA extraction किट एवं RT PCR किट) बनाने का कार्य शुरू कर दिया था। शुरुआत में यह किट विदेश से ही आयात की जाती थी। इस दौरान अनिरुद्ध के नेतृत्व में मैग-जीनोम की टीम ने मात्र 3 महीने की अवधि में अथक परिश्रम एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस किट को तैयार किया। इस किट को बनाने में नैनोटेक्नोलाजी एवं आण्विक जीव विज्ञान का प्रयोग किया गया जिसमें अनिरुद्ध विशेषज्ञ हैं। इस किट का प्रथम परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित राजीव गांधी जैव प्रौद्योगिकी संस्थान ने किया एवं ये प्रमाणित किया कि देश मे विकसित यह किट विश्व स्तर की प्रमुख किट के समान नतीजे देती है।

इस रिपोर्ट के बाद से मैग-जीनोम की टीम अब तक करीब 30 लाख टेस्ट के लिए किट बना चुकी हैं। वर्तमान में यह किट तमिल नाडु, महाराष्ट्र, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, आंध्र, तेलंगाना और बाकी के राज्यो की कई सरकारी एवं गैर सरकारी लैब्स कोरोना टेस्टिंग के लिए उपयोग कर रहीं हैं। इस विषय मे गौरतलब यह है कि अनिरुद्ध और उनकी टीम उच्च गुणवत्ता वाली यह किट्स मेक इन इंडिया की भावना को आत्मसात करते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों की कीमत से 3 गुना कम कीमत पर सरकारी लैब्स को दे रही हैं जो कि सराहनीय है।

मैग-जीनोम की इस शोध गति को देखते हुए जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) जैव प्रौद्योगिकी विभाग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय, और भारत सरकार ने मैग-जीनोम को अगस्त २०२० में एक करोड़ रुपये का अनुदान दिया जो कि कोरोना पर नए शोध को बढ़ावा देने के लिए था। अनिरुद्ध को इस प्रोजेक्ट में प्रमुख वैज्ञानिक का पद दिया गया है जो बहुत जल्द टेस्ट की नई विधियाँ प्रयुक्त करेंगे। वर्तमान में अनिरुद्ध के पास करीब 8 अंतरराष्ट्रीय स्तर के शोध पत्र हैं। उनके नाम पर 2 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट (चीन एवं यूरोप) भी हैं। साथ ही साथ करीब 5 और पेटेंट आवेदित हैं। उन्हें स्लोवाक अकेडमी ऑफ साइंसेज, स्लोवाकिया, यूरोप से यूनिवर्सिटी मैडल एवं VIT यूनिवर्सिटी वेल्लोर से बेस्ट Alumni अवार्ड भी प्राप्त है। अनिरुद्ध ने अपनी स्कूली एवं विज्ञान की प्रारंभिक शिक्षा विक्रम यूनिवर्सिटी के जैव प्रौद्योगिकी विभाग से की थी जिस दौरान वो यूनिवर्सिटी की प्रावीण्य सूची में द्वितीय स्थान पर रहे थे।

सुपरिचित कवि श्री अशोक भाटी के सुपुत्र अनिरुद्ध अपनी इस सफलता का श्रेय अपने दादाजी डॉ गोपीकृष्ण भाटी, माता पिता श्री अशोक भाटी एवं श्रीमती नीना भाटी, पत्नी मुनमुन, भाई लोहिताक्ष, साथ ही साथ अपने गुरुजनों विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ CN रामचंद, डॉ रक्षा रामचंद, डॉ टेसी आईप, डॉ रुचा देसाई, सहकर्मी डॉ रविकांत हरित, अरुण प्रसाद शेखर और मोहम्मद काषित मस्तान को देते हैं।

(उज्जैन से मुकेश जोशी द्वारा प्रेषित)

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