भारत के कॉरपोरेट इतिहास में नटराजन चंद्रशेखरन, जिन्हें आमतौर पर एन. चंद्रशेखरन या “चंद्रा” कहा जाता है, एक अलग तरह की नेतृत्व-यात्रा का उदाहरण हैं। वे टाटा परिवार के बाहर से आए ऐसे पेशेवर हैं जिन्होंने लगभग तीन दशक Tata Consultancy Services (TCS) में बिताए, वहीं से शीर्ष नेतृत्व तक पहुँचे और फिर 2017 में Tata Sons के Executive Chairman बने। आज वे Tata Sons के Chairman हैं और टाटा समूह के अनेक प्रमुख कारोबारों के बोर्ड का नेतृत्व करते हैं।
एन. चंद्रशेखरन की कहानी भारत के उस कॉरपोरेट परिवर्तन की कहानी है जिसमें तकनीकी विशेषज्ञता धीरे-धीरे उद्योग नेतृत्व में बदलती है।
वे Tata Group के पारंपरिक कारोबारी परिवार से नहीं आए। उन्होंने 1987 में TCS से अपना करियर शुरू किया, लगभग 30 वर्षों तक उसी संगठन में विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं, CEO बने और फिर 2017 में Tata Sons के Chairman बने।
उनके नेतृत्व में Tata Group ने अपने पारंपरिक व्यवसायों के साथ-साथ EV, batteries, semiconductors, electronics, aviation, digital platforms और AI जैसे क्षेत्रों पर भी जोर दिया है।
इस दृष्टि से एन. चंद्रशेखरन को केवल “Tata Sons के Chairman” के रूप में देखना उनके करियर को छोटा करके देखना होगा। वे मूलतः IT professional से global corporate leader बने व्यक्ति हैं, जिनकी वर्तमान चुनौती टाटा समूह की एक सदी से अधिक पुरानी औद्योगिक विरासत को अगली technology-driven अर्थव्यवस्था से जोड़ने की है।
उनकी कहानी इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि टाटा समूह की पारंपरिक पहचान—विश्वसनीयता, दीर्घकालिक दृष्टि और सामाजिक उत्तरदायित्व—को उन्होंने Technology, Digitalisation, Semiconductors, Electric Vehicles, Batteries, Aviation और Artificial Intelligence जैसे नए क्षेत्रों से जोड़ने की कोशिश की है।
1. तमिलनाडु के छोटे शहर से कॉरपोरेट नेतृत्व तक
एन. चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने Bachelor in Applied Sciences के बाद Master in Computer Applications (MCA) किया। यह वह दौर था जब भारत में कंप्यूटर और IT उद्योग अभी अपने शुरुआती विस्तार के चरण में था।
1987 में वे TCS से जुड़े। यह महत्वपूर्ण है कि उनका पूरा प्रारंभिक कॉरपोरेट जीवन टाटा समूह के भीतर ही बीता। उन्होंने किसी पारंपरिक कारोबारी परिवार से आए उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक तकनीकी पेशेवर के रूप में अपना करियर बनाया।
लगभग 30 वर्षों के TCS करियर में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियाँ निभाईं और अंततः 2009 में कंपनी के CEO और Managing Director बने।
यही वह अनुभव था जिसने आगे चलकर उनके नेतृत्व की शैली को काफी प्रभावित किया—technology + process + scale + global business।
2. TCS में चंद्रशेखरन का दौर
जब चंद्रशेखरन TCS के CEO बने, तब भारतीय IT उद्योग तेजी से वैश्विक बाजार में फैल रहा था। उनके नेतृत्व में TCS ने बड़े अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों, डिजिटल सेवाओं और वैश्विक delivery model पर जोर दिया। टाटा के आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, उनके नेतृत्व में TCS देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों में पहुँची।
TCS में उनकी कार्यशैली की एक विशेषता थी—बड़े संगठन को technology के माध्यम से scale करना।
यही अनुभव बाद में Tata Sons के नेतृत्व में उपयोगी साबित हुआ। टाटा समूह में उनके सामने चुनौती केवल IT कंपनी चलाने की नहीं थी। उनके सामने steel, automobile, power, hotels, consumer products, aviation, telecom, electronics और technology जैसे बिल्कुल अलग-अलग क्षेत्रों को एक समूह की व्यापक रणनीति में जोड़ने की चुनौती थी।
2017 में आया बड़ा मोड़
25 अक्टूबर 2016 को चंद्रशेखरन Tata Sons के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में उन्हें Tata Sons का Executive Chairman नियुक्त किया गया। उन्होंने 21 फरवरी 2017 को पद संभाला। यह नियुक्ति इसलिए उल्लेखनीय थी क्योंकि वे Tata Group के पारंपरिक promoter family से नहीं आते थे। टाटा समूह में नेतृत्व का यह परिवर्तन इस बात का उदाहरण बना कि एक बड़े भारतीय कारोबारी समूह का शीर्ष नेतृत्व पेशेवर प्रबंधन से भी आ सकता है। आज Tata Sons, टाटा समूह की holding company और प्रमुख promoter entity है। चंद्रशेखरन इसके Chairman होने के साथ समूह की रणनीतिक दिशा तय करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं।
4. “One Tata” की अवधारणा
चंद्रशेखरन के नेतृत्व की सबसे चर्चित अवधारणाओं में से एक है—
One Tata
इसका मूल विचार है कि टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियाँ केवल स्वतंत्र कंपनियों की तरह न सोचें, बल्कि जहाँ संभव हो वहाँ एक-दूसरे की तकनीक, प्रतिभा, वितरण नेटवर्क, पूंजी और विशेषज्ञता का लाभ उठाएँ।
उन्होंने शुरुआती दौर में इसकी रणनीति को 3S—Simplify, Synergise, Scale के रूप में प्रस्तुत किया।
बाद में इसमें Speed, Supply Chain और Sustainability जैसे आयाम भी जोड़े गए। टाटा समूह के अनुसार फरवरी 2024 में समूह का संयुक्त market capitalisation ₹30 लाख करोड़ से ऊपर गया और अगस्त 2024 तक ₹35 लाख करोड़ को पार कर गया। यह आंकड़ा समूह की कंपनियों के कुल बाजार मूल्य से संबंधित है, न कि Tata Sons की standalone market capitalisation से।
5. Tata Motors और Electric Vehicle की कहानी
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में “One Tata” का एक महत्वपूर्ण उदाहरण Electric Vehicle ecosystem रहा। टाटा समूह के अनुसार 2017 में Tata Motors का passenger vehicle business कठिन स्थिति में था। चंद्रशेखरन ने electric mobility को भविष्य की दिशा मानते हुए समूह की अलग-अलग कंपनियों को एक साथ काम करने के लिए प्रेरित किया।
Tata Motors + Tata AutoComp + Tata Technologies + TCS + Tata Power जैसी कंपनियों के सहयोग से EV ecosystem विकसित किया गया और 2019 में Nexon EV सामने आया।
यह केवल एक कार बनाने की परियोजना नहीं थी। इसमें:
वाहन निर्माण
software
battery technology
charging infrastructure
engineering
power ecosystem
जैसे कई क्षेत्रों को जोड़ने की कोशिश हुई।
इसी सोच के तहत Tata UniEVerse की अवधारणा सामने आई, जिसका उद्देश्य टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों को electric mobility ecosystem में जोड़ना था।
6. Air India की वापसी
चंद्रशेखरन के कार्यकाल की सबसे बड़ी रणनीतिक घटनाओं में से एक Air India का Tata Group में वापस आना है।
भारत सरकार से Air India के अधिग्रहण के बाद टाटा समूह ने भारतीय aviation business को पुनर्गठित करना शुरू किया।
इसके बाद Air India, Vistara, Air India Express और AIX Connect को एक व्यापक aviation strategy में पुनर्गठित किया गया।
अक्टूबर 2024 में Air India और Vistara का merger पूरा हुआ। चंद्रशेखरन ने इसे भारत के लिए एक बड़े global airline निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उस समय उनके अनुसार समूह के aviation operations में fleet का आकार pre-privatisation स्थिति की तुलना में 2.5 गुना से अधिक हो चुका था और नेटवर्क लगभग 100 global destinations तक पहुँच चुका था।
यहाँ भी उनकी रणनीति का वही सूत्र दिखाई देता है:
7. Semiconductor और Electronics की ओर टाटा समूह
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह ने उन क्षेत्रों में भी प्रवेश किया जिन्हें भारत की औद्योगिक रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इनमें प्रमुख हैं:
Semiconductors
Electronics manufacturing
Battery manufacturing
Mobile technology
Digital platforms
AI infrastructure
टाटा के आधिकारिक प्रोफाइल में इन क्षेत्रों को चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह की नई दिशाओं के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
यह बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि टाटा समूह की पारंपरिक ताकत steel, automobiles, power, hotels और IT जैसी स्थापित industries में रही है, जबकि semiconductor और advanced electronics जैसी industries में प्रवेश भविष्य की technology supply chains से जुड़ा हुआ है।
8. AI के बारे में चंद्रशेखरन की सोच
2026 में India AI Impact Summit में चंद्रशेखरन ने AI को केवल software technology नहीं बल्कि “infrastructure of intelligence” के रूप में देखने की बात कही।
उनकी वर्तमान रणनीति AI को टाटा समूह के विभिन्न स्तरों पर लागू करने की है:
उन्होंने यह भी कहा कि TCS और Tata Communications मिलकर industries के लिए AI-oriented operating system और agentic solutions विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
यहाँ उनके IT background का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
9. Bridgital Nation — केवल उद्योगपति नहीं, विचारक भी
चंद्रशेखरन ने “Bridgital Nation” नामक पुस्तक भी लिखी है।
इसमें उनका मुख्य विचार यह है कि technology का उद्देश्य केवल automation नहीं होना चाहिए। technology और human capability को जोड़कर भारत की बड़ी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को हल करने का प्रयास किया जा सकता है।
यानी उनके दृष्टिकोण में:
Technology + Human capability = सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन
यह विचार उनके कॉरपोरेट नेतृत्व में भी दिखाई देता है—technology को अलग विभाग न मानकर पूरे business ecosystem में इस्तेमाल करना।
10. पुरस्कार और सम्मान
चंद्रशेखरन को भारत और विदेशों में कई सम्मान मिले हैं।
भारत सरकार ने उन्हें 2022 में Padma Bhushan से सम्मानित किया। फ्रांस ने 2023 में उन्हें Légion d’Honneur से सम्मानित किया। 2025 में उन्हें Honorary Knight of the Most Excellent Order of the British Empire प्रदान किया गया।
इसके अलावा उन्हें विभिन्न विश्वविद्यालयों से honorary doctorates भी मिले हैं।
11. कॉरपोरेट जीवन के बाहर का चंद्रशेखरन
चंद्रशेखरन की व्यक्तिगत रुचियों में photography और long-distance running प्रमुख हैं।
वे World Marathon Majors के Six Star Finisher हैं—अर्थात उन्होंने दुनिया की छह प्रमुख marathon races पूरी की हैं। टाटा के आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी photography और marathon running को उनकी प्रमुख व्यक्तिगत रुचियों के रूप में दर्ज किया गया है।
यह पहलू उनकी सार्वजनिक छवि में एक अलग आयाम जोड़ता है। एक ओर वे हजारों करोड़ रुपये के कारोबार वाले समूह का नेतृत्व करते हैं, दूसरी ओर व्यक्तिगत स्तर पर endurance sport में भी सक्रिय रहे हैं।
उपलब्ध इंटरव्यू और प्रोफाइल से पता चलता है कि सुबह की शुरुआत उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। वे लंबे समय से सुबह जल्दी उठकर दौड़ने की आदत रखते हैं। 2014 में उन्होंने बताया था कि यदि वे सुबह 5 बजे विमान में नहीं होते, तो उस समय सड़क पर दौड़ रहे होते थे और यात्रा में भी अपने running shoes साथ रखते थे।
2017 की एक प्रोफाइल में उनके मित्रों ने भी बताया कि सुबह 5 बजे वे दौड़ना शुरू कर देते थे—चाहे वे बर्लिन, टोक्यो, मुंबई या अपने गांव मोहनूर में हों।
उनकी सुबह की स्वास्थ्य दिनचर्या में दौड़ के बाद भिगोए हुए chia seeds, फिर हरी सब्जियों से बना green juice और भारतीय मसालों से तैयार एक स्वास्थ्य पेय का उल्लेख मिलता है। यह जानकारी उनकी पत्नी ललिता और उनके जीवन पर प्रकाशित प्रोफाइल से आई है।
उनके पारिवारिक और सांस्कृतिक जीवन में मंदिर और आध्यात्मिक परंपरा का संदर्भ मिलता है। Business Standard की उनकी जीवनीपरक रिपोर्ट में उनके पुराने शिक्षक के हवाले से कहा गया है कि जब चंद्रशेखरन अपने गांव लौटते हैं तो मंदिर जाते हैं और स्थानीय लोगों से उसी सहजता से मिलते हैं जैसे पहले मिलते थे।
उनकी पसंदीदा तस्वीर भी ध्यान और शांति से जुड़ी है। 2014 में उन्होंने बताया था कि उनकी पसंदीदा पेंटिंग में एक शांत मुद्रा में ध्यान करते बुद्ध और उनके पास बैठा हाथी है। उन्होंने कहा था कि उन्हें यह बात पसंद है कि शांत बुद्ध उस विशाल हाथी को प्रभावित करते दिखाई देते हैं।
चंद्रशेखरन ने marathon running को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं माना। उन्होंने स्वयं बताया कि marathon ने उन्हें discipline, preparation, sustained focus, energy के साथ patience और distractions के बीच शांत रहने की क्षमता सिखाई। उन्होंने business और marathon के बीच इसी समानता को रेखांकित किया था।
उनका एक और महत्वपूर्ण विचार है कि जीवन और काम को अलग-अलग खाँचों में रखने के बजाय एक सरल priority list के साथ चलना चाहिए। 2016 में उन्होंने कहा था कि वे personal और professional life के लिए अलग-अलग सूचियों के बजाय एक सरल priority list रखना पसंद करते हैं





