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दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा डॉ. चन्द्रकुमार जैन के बहुआयामी अकादमिक विडियो को मान्यता

राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफ़ेसर डॉ. चन्द्रकुमार जैन के शैक्षणिक वीडियोज़ हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की मान्य अध्ययन सामग्री में शामिल कर लिए गए हैं। बड़ी संख्या में वार्षिक और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों के लिए अब तक डॉ. जैन के कुल आठ वीडियो विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। उच्च शिक्षा जगत के लिए यह विशिष्ट गौरव का प्रसंग है।

डॉ. जैन के विषय चयन की विशेषता यह है कि स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी ख़ास तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि दुर्ग यूनिवर्सिटी द्वारा एक शानदार रचनात्मक पहल के तहत विद्यार्थियों के लिए वीडियो बैंक बनाया जा रहा है जिसमें कला संकाय के अंतर्गत अब तक अपलोड किये गए कई विषयों के कुल 58 वीडियो में से डॉ. जैन की आठ प्रस्तुति सम्मिलित है। उधर छत्तीसगढ़ शासन के पोर्टल पर भी साझेदारी के साथ-साथ डॉ. जैन शासन द्वारा प्रदत्त कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं।

डॉ. चंद्रकुमार जैन के विडियोज हिंदी साहित्य के इतिहास और मीडिया लेखन पर एकाग्र हैं। इसमें हिंदी साहित्य का इतिहास-विषय प्रवेश से लेकर काल विभाजन, नामकरण, साहित्य इतिहास लेखन की परम्परा, साहित्य इतिहास पुनर्लेखन की परम्परा, हिंदी साहित्य का आधुनिक काल, भारतेन्दु युग, द्विवेदी युग तथा विज्ञापन लेखन जैसे टॉपिक प्रमुख हैं।

अक्षरों का कारवां

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इस सन्दर्भ में डॉ. जैन का कहना है कि एकनिष्ठ रचनात्मक और आकादमिक महत्त्व के ऐसे प्रयास को जब अलग-अलग स्तर पर मान्यता तथा सराहना मिलती है, प्रोत्साहन मिलता है तब बेहतर कार्य का पथ स्वतः प्रशस्त होता है। वास्तव में रचनात्मक सृजन का अपना अलग ही संतोष है। डॉ. जैन का मानना है सृजन उसके सृजेता को भी रचता चलता है। उन्होंने कहा कि यह सारस्वत उद्यम आगे भी निरंतर रहेगा और अक्षरों के उजाले का कारवां बढ़ता रहेगा। बहरहाल डॉ. जैन लोक साहित्य और छत्तीसगढ़ पर केंद्रित वीडियो साझा करने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि डॉ. जैन का यूट्यूब चैनल हिंदी का उत्सव- बूँद भर नर्म उजाला ने भी देश-विदेश में अपनी पहचान बनायी है। चैनल में साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और समसामयिक बौद्धिक विषयों पर रोचक प्रस्तुतियां हैं। इसी तरह सोशल मीडिया के अन्य आयामों पर भी उनकी प्रस्तुति को भरपूर देखा सुना जा रहा है। भाषा पर और अभिव्यक्ति कला की खास पहचान के चलते डॉ. जैन कॅरियर और अच्छा सुनने की चाह रखने वालों को निःस्वार्थ लाभ दे रहे हैं। डॉ. जैन ने हिंदी साहित्य के इतिहास पर आधारित एक हजार वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर और सृजन के आयाम जैसी बहुआयामी विषयों पर केंद्रित किताब लिखी है। शोध ग्रन्थ के और मौलिक कविताओं के संग्रह के तीन संस्करण अपने आप में उदहारण हैं।

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