जेम्स बॉन्ड की दुनिया में महँगी कारें, खूबसूरत महिलाएँ, कैसीनो में बड़े दाँव, खतरनाक मिशन और दुश्मन को चकमा देने की कला दिखाई देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस काल्पनिक जासूस के व्यक्तित्व को गढ़ने में द्वितीय विश्वयुद्ध के एक वास्तविक जासूस डुस्को पोपोव (Duško Popov) का भी योगदान माना जाता है? पोपोव सर्बिया के रहने वाले एक वकील, व्यवसायी और ब्रिटेन के लिए काम करने वाले डबल एजेंट थे। उनका जन्म 10 जुलाई 1912 को हुआ था और द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने जर्मन खुफिया सेवा के विश्वासपात्र एजेंट का रूप बनाए रखते हुए ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को महत्वपूर्ण सूचनाएँ पहुँचाईं। उनकी वास्तविक जिंदगी में रोमांच, जोखिम, छल, अंतरराष्ट्रीय यात्राएँ और विलासितापूर्ण जीवनशैली का ऐसा मेल था, जो बाद में जेम्स बॉन्ड की दुनिया से मिलता-जुलता दिखाई दिया।
डुस्को पोपोव कौन थे?
पोपोव का जन्म उस समय के ऑस्ट्रिया-हंगरी साम्राज्य के टिटेल में हुआ था, जो आज सर्बिया का हिस्सा है। वे एक संपन्न परिवार से थे और कई यूरोपीय भाषाएँ जानते थे। जर्मनी में पढ़ाई के दौरान नाजी शासन के प्रति विरोध के कारण गेस्टापो ने उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में, 1940 के आसपास, उन्होंने ब्रिटिश खुफिया तंत्र के साथ काम करना शुरू किया।
उनका सबसे प्रसिद्ध कोडनेम “ट्राइसाइकिल” (Tricycle) था। जर्मन खुफिया सेवा Abwehr उन्हें अपना एजेंट समझती थी, जबकि वे ब्रिटिश पक्ष के लिए काम करते हुए जर्मनों तक भ्रामक सूचनाएँ भी पहुँचाते थे। इस तरह वे दुश्मन की जासूसी व्यवस्था के भीतर रहकर उसी को गुमराह करने वाले डबल एजेंट थे। उनके काम का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा मित्र राष्ट्रों की योजनाओं को छिपाना और जर्मन नेतृत्व को गलत आकलन करने के लिए प्रेरित करना था।

 इयान फ्लेमिंग और कैसीनो की वह घटना

जेम्स बॉन्ड के निर्माता इयान फ्लेमिंग स्वयं द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश नौसेना की खुफिया शाखा से जुड़े थे। 1941 में पुर्तगाल के एस्टोरिल कैसीनो के आसपास उनके और पोपोव के संपर्क में आने की चर्चा मिलती है। पुर्तगाल उस समय तटस्थ देश था और वहाँ विभिन्न देशों के जासूस सक्रिय रहते थे।
प्रचलित विवरणों के अनुसार, पोपोव ने एस्टोरिल कैसीनो में बहुत बड़ी रकम का दाँव लगाया था। कहा जाता है कि इस घटना ने फ्लेमिंग को अपने पहले जेम्स बॉन्ड उपन्यास Casino Royale में कैसीनो के रोमांचक दृश्य की कल्पना करने के लिए प्रेरित किया। इस घटना का विवरण पोपोव के अपने संस्मरणों और बाद के लेखों में मिलता है, हालाँकि इसके प्रत्येक पहलू की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।
पोपोव अच्छे कपड़े पहनने, महँगी जगहों पर जाने, तेज कारों और सामाजिक मेलजोल के लिए प्रसिद्ध थे। महिलाओं के साथ उनके संबंधों की चर्चा भी होती थी। ये विशेषताएँ बॉन्ड के लोकप्रिय व्यक्तित्व से मिलती हैं।
पोपोव के जुए से जुड़ा एस्टोरिल का प्रसंग बॉन्ड के कैसीनो दृश्यों से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। बॉन्ड की तरह पोपोव भी जोखिम भरे वातावरण में सहज दिखाई देते थे।
पोपोव की वास्तविक पहचान एक व्यवसायी की थी, लेकिन पर्दे के पीछे वे खुफिया मिशनों पर काम करते थे। जर्मनों का विश्वास जीतकर उन्हें भ्रामक सूचनाएँ देना बॉन्ड की गुप्त कार्रवाइयों से मिलता-जुलता था।
इन समानताओं के आधार पर पोपोव को जेम्स बॉन्ड के संभावित वास्तविक प्रेरणास्रोतों में गिना जाता है। हालाँकि, बॉन्ड का पूरा चरित्र केवल उन्हीं पर आधारित था, ऐसा निश्चित रूप से कहना सही नहीं होगा। फ्लेमिंग के अपने अनुभवों और अन्य वास्तविक जासूसों के गुणों ने भी इस काल्पनिक पात्र को आकार दिया होगा।
पोपोव का महत्त्व केवल बॉन्ड जैसी जीवनशैली तक सीमित नहीं था।  पर्ल हार्बर, 1941: जर्मनों ने उन्हें अमेरिका में सैन्य प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों की सुरक्षा संबंधी जानकारी जुटाने के लिए भेजा। पोपोव ने अमेरिकी FBI को पर्ल हार्बर से संबंधित जर्मन रुचि की सूचना देने की कोशिश की। FBI प्रमुख जे. एडगर हूवर ने उन पर पर्याप्त विश्वास नहीं किया। हालाँकि, इतिहासकारों में इस बात पर मतभेद है कि उनकी सूचना से जापानी हमले की सटीक भविष्यवाणी संभव थी या नहीं।
ऑपरेशन फोर्टिट्यूड: मित्र राष्ट्रों ने 1944 में नॉर्मंडी पर वास्तविक आक्रमण की तैयारी छिपाने के लिए जर्मनों को भ्रमित किया। पोपोव ने भी इस व्यापक भ्रामक सूचना अभियान में भूमिका निभाई, जिसके तहत जर्मनों को फ्रांस के कैलै क्षेत्र में आक्रमण होने की आशंका बनाए रखने में मदद मिली। वास्तविक मित्र राष्ट्र आक्रमण नॉर्मंडी में हुआ।
क्या जेम्स बॉन्ड वास्तव में डुस्को पोपोव ही थे?
इस प्रश्न का संतुलित उत्तर है—पोपोव को बॉन्ड का एक महत्त्वपूर्ण संभावित प्रेरणास्रोत माना जाता है, लेकिन दोनों एक ही व्यक्ति नहीं थे। 1973 में The Observer ने पोपोव पर एक चर्चित लेख प्रकाशित किया, जिसके बाद वास्तविक जासूस और काल्पनिक नायक के बीच समानताओं को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी। पोपोव ने बाद में अपनी आत्मकथा Spy/Counterspy भी प्रकाशित की।
दिलचस्प बात यह है कि पोपोव ने बॉन्ड की शराब पीने की आदत पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि वास्तविक जासूस अगर बॉन्ड जितनी शराब पिए, तो वह जल्दी ही मुसीबत में पड़ सकता है। इस टिप्पणी में वास्तविक जासूसी और फिल्मों की जासूसी के बीच का अंतर स्पष्ट दिखाई देता है।