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छत्तीसगढ़की शान और मान बढ़ाने वाली सशक्त महिलाएँ

unnamed (7)छत्तीसगढ़ की महिलाओं ने अपनी मेहनत और सक्रियता से छत्तीसगढ़ के विकास की रफ्तार बढ़ा दी है। राज्य की महिलाएं मेहनती, प्रगतिशील तथा धैर्यवान तो पहले से थीं ही, और अब जागरूक होने के साथ सक्रिय भी हो गई है। यही वजह है कि आज यहां की महिलाएं प्रदेश के विकास के सभी पक्षों और हर स्तर पर जागरूक होकर सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ ग्रामीण अंचल से लेकर शासन स्तर तक इनकी सुनिश्चित भागीदारी देखी जा सकती है। छत्तीसगढ़ में वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी केबिनेट मंत्री श्रीमती रमशीला साहू संभाल रही हैं। दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों में परिवार के साथ खेती-किसानी का बागडोर भी महिलाएं बखूबी संभाल रही हैं। वैसे देखा जाए तो घर-द्वार की साफ-सफाई, परिवार के सदस्यों के खान-पान और उनके स्वास्थ्य की देख-रेख की आधारभूत और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मुख्य रूप से महिलाएं ही निभा रही हैं।

आज प्रदेश की पंडवानी गायिका तीजन बाई, ऋतु वर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता फूलबासन बाई, शमशाद बेगम, हॉकी खिलाड़ी नीता डुमरे, सबा अंजुम किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। इन महिलाओं ने अपनी काबिलियत के बलबूते राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। नेटबाल खिलाड़ी प्रीति बंछोर, नेहा बजाज और अंजू लकड़ा अपनी खेल कौशल का लोहा मनवा चूकी हैं। तीजन बाई ने प्रदेश, देश सहित कई अन्य देशों में भी बेजोड़ पंडवानी गायिकी से कला के क्षेत्र में विशेष छाप छोड़ी है। उन्हें राष्ट्रीय सम्मान पद्मश्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। फूलबासन बाई और शमशाद बेगम को भी देश के चौथे सर्वोच्च सम्मान पदम्श्री से नवाजा जा चुका है। सबा अंजुम को खेल की उपलब्धियों के लिए वर्ष 2013 में अर्जुन पुरस्कार और वर्ष 2015 में पद्मश्री सम्मान मिल चुका है, जबकि अभी हाल ही में लोक गायिका ममता चंद्राकर को लोक गायन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार पद्मश्री के लिए चयनित किया गया। लोक गायिकी में यहां कविता वासनिक का नाम याद करना जरूरी है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित प्रदेश की ऋचा शर्मा, किरण कौशल, रानू साहू सहित अनेक महिलाएं देश के अलग-अलग राज्यों में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ की बरखा ताम्रकार भारतीय विदेश सेवा में हैं।

6b77868f-3df2-4d7f-a7f2-f880886e0c7dछत्तीसगढ़ के इतिहास में भी प्रदेश की महिलाओं की मजबूत स्थिति रही है। सामाजिक सुधार के कार्यों में मिनीमाता (मीनाक्षी देवी) हमेशा आगे रही। वे जीवन पर्यन्त महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में कार्य करती रहीं। उन्होंने स्वयं अनेक बालिकाओं को पढ़ाया । सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए वे जीवन भर प्रयासरत रहीं। छुआ-छूत मिटाने के लिए लोकसभा सांसद के रूप में मिनीमाता ने संसद में अशासकीय संकल्प भी प्रस्तुत किया। सरगुजा निवासी राजमोहनी देवी विलक्षण प्रतिभा की धनी थी। उनके प्रयासों से हजारों लाखों वनवासियों ने नशा करना छोड़ दिया। उन्होंने वनवासियों में समाज और देश के प्रति समर्पण की भावना जागृत की। महारानी पद्मावती देवी भी राज्य की गौरव हैं। वे समाजसेवी और एक कुशल प्रशासक थी। उन्होंने खैरागढ़ में इंदिरा संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की। संगीत और ललित कलाओं के लिए इस विश्वविद्यालय की ख्याति भारत सहित सम्पूर्ण विश्व में है। विश्वविद्यालय के लिए रानी पद्मावती ने अपना कमल पैलेस दान कर दिया था। रानी पद्मावती अविभाजित मध्यप्रदेश में प्रदेश की प्रथम महिला मंत्री बनी। वर्तमान में इस संगीत विश्वविद्यालय में कुलपति एक महिला डॉ. मांडवीं सिंह ही हैं।

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