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गोवा के सरपंचों की पीएम मोदी से गुहार , हमारी रोजी रोटी को बचाएँ

गोवा के सरपंचों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोवा दौरे से पहले उनसे गुहार लगायी है कि गोवा में पांच साल से बंद पड़ी आयरन ओर की खदानों में माइनिंग शुरु करके उनकी रोजी रोटी बचायी जाये .प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 दिसंबर को गोवा मुक्ति दिवस के साठ साल पूरे होने पर होने वाले कार्यक्रम मे आने वाले हैं.

गोवा के माइनिंग क्षेत्र के 20 से ज्यादा सरपंचों ने पीएम मोदी को चिठठी लिखकर कहा है कि गोवा में पांच लाख से ज्यादा लोगों की रोटी रोटी पूरी तरह से माइनिंग पर चल रही थी लेकिन 2018 से माइनिंग पूरी तरह बंद है .इससे गंभीर संकट पैदा हो गया है .इससे संविधान के तहत नागरिकों को दिया गया आजीविका का अधिकार भी संकट में है.Sarpanch surya naikका कहना है कि गोवा ने ही 2013 में श्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर नामिनेट किया था अब मोदी जी को माइनिंग चालू कर रिटर्न गिफ्ट देना चाहिये . हम चाहते है कि गोवा में इस बार चुनाव से पहले माइनिंग शुरु हो जाये . एक और सरपंच Sidharth desaiका कहना है कि कोविड के कारण पिछले दो साल से गोवा में टूरिज्म लगभग बंद है जिससे आम लोगों के पास कोई काम नहीं है उसके साथ ही माइनिंग बंद होने के कारण भी आय का कोई स्त्रोत नहीं है ऐसे में हमारी पीएम मोदी से अपील है हमारी रो़जी रोटी बचायी जाये.

पीएम को लिखी चिठठी में सरपंचों ने कहा है कि हमने राज्य के सभी प्रतिनिधियों को कई बार अपनी मजबूरी और हालात के बारे में बताया है . सन 2018 से माइनिंग बंद होने के बाद से ही हम कई बार राज्य सरकार औऱ माइनिंग से जुडें अन्य लोगों से लगातार बात कर रहे है ताकि माइनिंग चालू हो सके . हमें ये बताया गया है कि संसदीय औऱ कानूनी दोनों तरीके से ही रास्ता निकाला जा सकता है. .हमने गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत जी से भी इस बारे में पहल करने की अपील की है . लेकिन अब हम हताश होने लगे है और कोई उम्मीद नहीं दिख रही है .बस आप ही हमें इससे उबार सकते हैं.

चिठ्ठी में लिखा है कि जैसा कि आपको पता है कि अगले साल गोवा के चुनाव होने वाले हैं और हम भी चाहते है कि आपकी पार्टी दुबारा सत्ता में आये लेकिन जब तक ये प्रक्रिया होगी तब तक गोवा के हम ग्रामीण और मजबूर 5 लाख लोगों की रोजी रोटी का सवाल हल कर दें . केनद्र और राज्य सरकार दोनों ही पूरे मामले से पूरी तरह अवगत है. हमारी आपसे फिर से अपील है कि यही सही समय है जब आप गोवा में समय से माइनिंग चालू करके लाखों लोगों की जिंदगी बचा सकते हैं.

गौरतलब है कि सन 2018 से ही तब की पर्रीकर सरकार ने गोवा में आयरन ओर की माइनिंग पर पूरी तरह बैन लगा रखा है और अब ये मामला कानूनी तौर पर भी सुप्रीम कोर्ट में फंसा है. गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि वो एक माइनिंग कारपोरेशन बनाकर 8 खदानों को चालू करना चाहते है लेकिन गोवा में 300 से ज्यादा खदानों का काम बंद है . कई लोग सवाल उठा रहे है कि केवल 8 खदानों को चालू करने से रोजी रोटी का सवाल नहीं सुलझेगा . इसके साथ ही अगर माइनिंग कारपोरेशन ने परमीशन दे भी दो कम से कम तीन साल का समय लगेगा .
चिठठी पर गांव पंचायत रिवोना .गांव पंचायत भाटी ,गांव पचायत सेलदेम ,गांव पंचायत करडी . गांव पंचायत उरडी सहित 20 से ज्यादा सरपंचों ने दस्तखत किये हैं. गोवा में 40 ग्राम पंचायतें है जिनके जरिये ही स्थानीय प्रशासन चलाया जाता है . गोवा में स्थानीय मिनरल फंड के जरिये ही विकास काम होता है लेकिन माइनिंग बंद होने के कारण विकास ठप हो गया है

इस बीच आम आदमी पार्टी ने चुनावी नारा दिया है कि अगर सत्ता मे आये तो छह महीने में माइनिंग चालू करा देंगे लेकिन माइनिंग के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले गोवा फाऊंडेशन के क्लाउड अलवारिस कहते है कि ये लोगों को बेवकूफ बना रहे है गोवा में कम से दो साल माइनिंग शुरु नहीं हो सकती .माइनिंग गोवा में चुनावी मुददा भी बन रहा है .
चुनावी मुददे जमीन से अलग ..

गोवा में लोग बेरोजगारी ,मंदी और विकास नहीं होने से परेशान है लेकिन मुददा यहां पर करप्शन और दस साल पहले शाह कमीशन की रिपोर्ट में बताये गये 35 हजार करोड़ के माइनिंग स्कैम को बनाया जा रहा है . टीएमसी ने गोवा के एक एनजीओ गोवा फाउंडेशन के समझाने पर 35 हजार करोंड़ के जुमले को उछाल दिया है .लोगों को कहा जा रहा है कि अगर ये पैसे सरकार ने वसूल लिये तो गोवा के हर घऱ को तीन लाख रुपये मिलेंगे . लेकिन हम आपको असलियत बताते हैं कि ये भी हर खाते में पंद्रह लाख रुपये के जुमले की तरह ही है.

गोवा में 2012 में बीजेपी ने जस्टिस एम बी शाह की रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस को घेरा था . बीजेपी ने शाह कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर 35 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया था लेकिन जब खुद बीजेपी के मनोहर पर्रीकर सत्ता मे आ गये तो फंस गये . फिर पर्रीकर ने ही कह दिया कि 35 हजार करोड़ नहीं करीब 3 हजार करोड़ का नुकसान हुआ. पर्रीकर ने इसकी जांच के लिए चार्टर्ड एकाउंटेट की एक कमेटी भी बना दी जिसने बताया कि असल में तो ये आंकड़ा 300 करोड़ भी नहीं है वो भी रेवेन्यू का नुकसान है. इसकी गिनती भी अब तक ठीक से दस साल में नहीं हो पायी . लेकिन चुनाव में एक बार फिर से जनता को भरमाने की कोशिश हो रही है.

टीएमसी ने इस मुददे को उछाल दिया है लेकिन बीजेपी या कांग्रेस इसे काउंटर नहीं कर पा रही है .कांग्रेस ने गोवा में लोकायुक्त बनाने का नारा दिया है बीजेपी विकास की बात कर रही है . जमीन पर हालत ये है कि गोवा में बेरोजगारी की दर 11 प्रतिशत तक हो रही है और कोरोना से बेहाल लोगों के पास पैसे नहीं है . जाहिर है राजनीतिक दल अभी तक जमीन नहीं पकड़ पा रहे है . उधर फिर से लाकडाउन की बातें शुरु हो गयी है. गोवा में टैक्सी चलाने वाले अशरफ का कहना है कि इस बार अगर फिर से लाकडाउन हो गया तो हम बरबाद हो जायेंगे .

(लेखक कई राष्ट्रीय चैनलों में पत्रकार रह चुके हैं व राजनीतिक विषयों पर स्वतंत्र लेखन करते हैं)

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