भारतवर्ष में अनेक भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं।इनमें कुल लगभग 121 भाषाएं हैं तथा लगभग 19,500 बोलियां हैं।भारतीय संविधान द्वारा 22 प्रांतीय भाषाओं को राजभाषा के रूप में मान्यता मिली है जिनमें ओड़िया भाषा भी एक है जो अहिन्दीभाषी प्रदेश ओड़िशा प्रदेश की राजभाषा है जबकि हिन्दी भारतीय संघ की राजभाषा है।

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी की लिपि देवनागरी है।14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया।इसीलिए प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस 14 सितंबर को ही मनाया जाता है।

गौरतलब है कि जब भारत का लिखित संविधान तैयार हुआ तथा उसे 26 नवंबर,1949 को स्वीकार किया गया तो संविधान के भाग 17 के अनुच्छेद 343(1) में भारतीय संघ की राजभाषा के रुप में हिन्दी को स्वीकार कर लिया गया जिसकी लिपि देवनागरी है जबकि अंकों को अंग्रेजी रुप में ही मान्यता प्रदान की गई।

प्रतिवर्ष भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, अनुभागों, राष्ट्रीयकृत बैंकों,केन्द्रीय विद्यालयों,नवोदय विद्यालयों, सैनिक स्कूलों,प्रसारभारती से संबद्ध आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों आदि पर क्रमशः हिन्दी दिवस तथा हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाता है।राजभाषा के रूप में हिंदी का प्रमुख उद्देश्य सरकारी कार्यों में सरल, सुगम और प्रभावी संचार स्थापित करना है। केंद्र सरकार के कार्यालयों, मंत्रालयों तथा विभिन्न संस्थानों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाता है। हिंदी का प्रयोग प्रशासन के साथ-साथ शिक्षा, साहित्य, पत्रकारिता, सिनेमा, विज्ञान, तकनीक और डिजिटल माध्यमों में भी निरंतर बढ़ रहा है।

1918 में महात्मागांधी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में पहली बार हिन्दी को राजभाषा बनाने की बात कही थी क्योंकि उनके अनुसार हिन्दी भारतीय जनमानस की भाषा है। हिंदी की सबसे बड़ी शक्ति उसकी सरलता, व्यापकता और आत्मसात करने की क्षमता है। हिंदी ने संस्कृत,अरबी,फारसी,अंग्रेजी तथा अनेक भारतीय भाषाओं से शब्दों को ग्रहण करके अपने शब्द-भंडार को समृद्ध किया है। विदेशों में स्थित सभी भारतीय राजदूतावासों तथा सांस्कृतिक केन्द्रों पर भी प्रतिवर्ष हिन्दी दिवस,हिन्दी सप्ताह तथा हिन्दी पखवाडा मनाया जाता है।राजभाषा हिंदी भारत की भाषाई विविधता में एकता का महत्वपूर्ण सूत्र है।हिंदी का विकास किसी अन्य भारतीय भाषा के विरोध में नहीं बल्कि सभी भाषाओं के सम्मान और सह-अस्तित्व के साथ है। हिंदी जितनी अधिक सरल, आधुनिक और ज्ञान-विज्ञान से जुड़ी होगी, उतनी ही प्रभावशाली राजभाषा बनेगी।राजभाषा हिंदी का सम्मान केवल हिंदी बोलने या लिखने से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक और प्रभावी प्रयोग से होगा।

यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा कि ओड़िशा में हिन्दी का भविष्य उज्ज्वल है।आजादी के पूर्व भी उज्ज्वल था।ओड़िशा में भारत सरकार के जितने भी  मंत्रालय हैं,विभाग हैं,अनुभाग हैं, राष्ट्रीयकृत बैंक हैं,केन्द्रीय विद्यालय हैं,नवोदय विद्यालय हैं, सैनिक स्कूल हैं,प्रसार भारती से संबद्ध आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्र हैं,उनके प्रशिक्षण केन्द्र हैं,भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण कार्यालय केन्द्र हैं,सीआईएसएफ प्रशिक्षण केन्द्र हैं, केन्द्रीय सुरक्षाबल समूह केन्द्र हैं,केन्द्रीय सुरक्षाबल महानिरीक्षक कार्यालय हैं,केन्द्रीय आपदामोचन बल –तीन बटालियन,मुण्डली है यहां तक कि ओड़िशा स्थित जितने भी डीएवी पब्लिक स्कूल हैं,केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय हैं,केन्द्रीय विद्यालय संगठन का क्षेत्रीय कार्यालय हैं,प्रशिक्षण केन्द्र हैं सभी कार्यालयों में हिन्दी दिवस,हिन्दी सप्ताह तथा हिन्दी पखवाड़ा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

ओड़िशा में 12वीं सदी से ही भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए,उनकी विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा, चंदनयात्रा, देवस्नान पूर्णिमा,बाहुड़ा यात्रा,सोनावेश तथा नीलाद्रि विजय देखने ओड़िशा आनेवाले लाखों हिन्दी भाषा-भाषी जगन्नाथ भक्तों ने ओड़िशा में हिन्दी के विकास को एक नई दिशा प्रदान की है।पुरी धाम का स्वर्ण समुद्र तट,कोणार्क,धवल गिरि, ब्रह्मगिरि, चिलिका झील, नंदनकानन,पारादीप पोर्ट,गोपालपुर पोर्ट,पिपली,कंटीलो जैसे ओड़िशा के लगभग 243 पर्यटन स्थलों पर हर साल आनेवाले लाखों हिन्दी भाषा-भाषियों के सौजन्य से ओड़िशा में हिन्दी का विकास एक सशक्त जनसम्पर्क की भाषा में विकसित हुआ है। यही नहीं, ओड़िशा में प्रतिवर्ष आयोजित होनेवाले धवली महोत्सव,कोणार्क नृत्य महोत्सव,पुरी बेलाभूमि महोत्सव,महोदधि आरती,केदार-गौरी नृत्य महोत्सव,कटक-भुवनेश्वर बालीयात्रा जैसे अनेक सांस्कृतिक आयोजनों ने ओड़िशा में हिन्दी को एक विशिष्ट स्थान प्रदान किया है।गौरतलब है कि ओड़िशा में अनेक हिन्दी भाषा-भाषी छोटे-बड़े उद्योगपति,कारोबारी तथा कामकाजी लोग हैं जिनकी कुल संख्या लाखों में है।

सच कहा जाय तो हिन्दी भारत की अस्मिता की पहचान है।इस भाषा में जैसा बोला जाता है वैसा ही लिखा जाता है।हिन्दी भारत के अनेक प्रदेशों की मातृभाषा तथा राजभाषा भी है।भारत के लगभग 80 फीसदी लोग हिंदी बोलते और समझते हैं।यही नहीं, पूरे विश्व में बोली जानेवाली तीन प्रमुख भाषाओं में तीसरे स्थान पर विराजमान है-हिन्दी।विश्व में अंग्रेजी,चीनी भाषा के बाद हिंदी का स्थान तीसरा है।हिन्दी की शब्द-सम्पदा सबसे अधिक समृद्ध है। हिन्दी में चार प्रकार के शब्द हैं-तत्सम,तत्भव,देशज तथा विदेशी शब्द।हिन्दी प्रेम की भाषा है। हिन्दी जनसम्पर्क की सबसे सशक्त भाषा है।हिंदी केवल संवाद का माध्यम ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति,साहित्य और राष्ट्रीय एकता की पहचान भी है।

आज वैश्वीकरण और तकनीकी विकास के युग में हिंदी के सामने नई चुनौतियाँ भी हैं। अंग्रेजी के बढ़ते प्रभाव के कारण कई क्षेत्रों में हिंदी का प्रयोग अपेक्षाकृत कम दिखाई देता है। इसलिए आवश्यकता है कि हिंदी को केवल सरकारी औपचारिकता तक सीमित न रखकर ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, उच्च शिक्षा और रोजगार की भाषा के रूप में भी विकसित किया जाए।

हिंदी अपने विभिन्न स्वरुपों में भारत की सबसे सशक्त जनसम्पर्क की भाषा के रुप में तथा सभी भारतीय भाषाओं का आदर करते हुए अपने प्रेम की भाषा के रुप में अपनी मौलिक पहचान बनाए हुए है जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैः ओड़िशा जहां पर अर्द्ध मागधी भाषा-परिवार के रुप में ओड़िया-हिन्दी साथ-साथ चलती है।

(लेखक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हैं और ओड़िशा की कला, साहित्य, संस्कृति और साहित्य से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं)