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पाकिस्तान से आए हिन्दुओँ की सुनी सरकार ने, मिलेंगे सारे अधिकार

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार ने भारत में रह रहे पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों पर बड़ा फैसला किया है। दीर्घकालिक वीजा पर भारत में रह रहे इन हिंदुओं को प्रॉपर्टी खरीदने के साथ ही बैंक खाते खोलने की अनुमति दी जाएगी। भारतीयों की तरह इन्हें भी बैंक खाते में पैसे जमा कराने पर ब्याज मिलेगा। देशभर में करीब चार सौ पाकिस्तानी हिंदू हैं, जो जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, रायपुर, अहमदाबाद, कच्छ, भोपाल, इंदौर, मुंबई, नागपुर, पुणे दिल्ली और लखनऊ में रह रहे हैं। ये लोग अब पेन और आधार कार्ड के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।
साथ ही सरकार ने इन्हें भारत के नागरिक के रजिस्ट्रेशन के लिए चुकाई जाने वाली फीस में भी भारी छूट देने का फैसला किया है। अब तक इसके लिए जहां 15 हजार रुपए वसूले जा रहे थे वहीं अब ये राशि घटाकर महज 100 रुपए कर दी गई है। केन्द्र गृह मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया है कि केन्द्र सरकार पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों पर नजर रखे हुए है। इन लोगों को यहां भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें राहत पहुंचाने के लिए सरकार ने ये सुविधाएं प्रस्तावित की है। पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भागकर भारत में शरण लेने वाले अल्पसंख्यकों का सटीक आंकड़ा सरकार के पास नहीं है, लेकिन माना जा रहा है कि इनकी संख्या दो लाख के करीब हो सकती है। तीनों देशों से आए शरणार्थियों में अधिकांश हिंदू और सिख हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्व अनुमति के बिना इन शरणार्थियों को बैंक अकाउंट खोलने दिया जाएगा, लेकिन इस पर कुछ कंडिशंस लगाई गई हैं। इसके अलावा ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और आधार कार्ड, सेल्फ एम्पलॉयमेंट या ऐसा बिजनेस जिसे सुरक्षा लिहाज से सही माना जाए करने की अनुमति आदि भी शामिल है।
इसके अलावा शरणार्थी जिस राज्य या यूनियन टेरिटरी में रह रहे हैं उसमें घूमने, या फिर एनसीआर में रहने वालो को फी मूवमेंट की अनुमति देने का भी प्रस्ताव दिया गया है। वहीं एलटीवी पेपर्स को एक राज्य/यूटी से दूसरे राज्य/यूटी में ट्रांसफर करने, शॉर्ट टर्म वीजा/एलटीवी को समय पर एक्स्टेंड न करनवाने पर पेनल्टी, पाकिस्तान में अल्पसंख्यक कहे जाने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया को सरल बनाने का भी प्रस्ताव रखा गया है।
इसके लिए छत्तीसगढ़, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के चुनिंदा जिलों के कलेक्टर्स या डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट्स को दो साल के लिए यह पावर दी जाएगी कि वे इन पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने के लिए रेजिस्ट्रेशन करें।

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