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बस्तर का चरोटा जापान में छा गया

दवाओं से लेकर सौंदर्य प्रसाधन बनाने में चरोटा बीज का उपयोग किए जाने से अब इसका फायदा बस्तर के ग्रामीणों से लेकर व्यापारियों को मिल रहा है। चरोटा बीज की अधिक कीमत मिलने से ग्रामीण इसका संग्रहण बड़े पैमाने पर कर मंडी व्यापारियों को बेच रहे हैं। विदेशों से हो रही मांग को पूरा करने के लिए इन दिनों गुजरात के जरिए इसे चीन, जापान व अन्य देशों को भेजा जा रहा है।
जगदलपुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत घाटपदमूर में चरोटा बीज का संग्रहण कर रही सुकाली बाई, रयमती, आसमती और अन्य महिलाओं ने बताया कि वे कई वर्षों से चरोटा बीज का संग्रहण कर इसे बाजारों में बेच रही थी। हालांकि कम दाम मिलने के चलते कुछ महिलाएं ही इस व्यवसाय से जुड़ी थीं, लेकिन इस साल रेट अधिक मिलने से कई अन्य महिलाएं भी चरोटा बीज एकत्रित करने के काम में लगी हैं। व्यापारी दिनेश सोमानी और मूलचंद जैन ने बताया कि इस समय बीज की मांग सबसे अधिक चीन और जापान में है। मंडी में आ रहे चरोटा बीज को यहां के व्यापारी रायपुर और गुजरात के व्यापारियों को बेच रहे हैं और वहां के व्यापारी चीन और जापान में भेज कर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। गौरतलब है कि चरोटा की खेती नहीं होती है, यह अपने आप ही उगता है।
अचानक मांग और भाव बढऩे से इसकी आवक भी उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई है। पिछले साल इस सीजन में चरोटा की आवक हर दिन 50 क्विंटल से कम थी। वहीं इस साल 300-350 क्विंटल तक पहुंच गई है। पिछले साल चरोटा का रेट 1200-2000 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब बढ़कर 4000-5000 रुपए तक पहुंच गया है। मंडी व्यापारियों ने बताया कि मंडी में चरोटा की आवक सीमाई प्रांत ओडिशा और स्थानीय स्तर से हो रही है। ज्यादातर आवक बस्तर जिले से ही हो रही है। मंडी के अधिकारियों ने बताया कि चरोटा बीज की मांग कुछ समय पहले बस्तर प्रवास पर आए बाबा रामदेव ने भी की थी। बस्तर प्रवास पर आए रामदेव ने यहां के व्यापारियों से चर्चा कर चरोटा बीज उपलब्ध कराने की बात कही थी।

साभार- बिज़नेस स्टैंडर्ड से

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