आप यहाँ है :

केदारनाथ यात्रा- फिर गुमराह कर रहे हैं उत्तराखंड के मुख्य सचिव

RUDRA PRAYAGक्‍या आप चार धाम यात्रा के लिए उत्‍तराखण्‍ड आने की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके लिए हैं, सूबे के अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने केदारनाथ यात्रा तैयारियों का जायजा लिया। शायद तभी राज्‍य सरकार केदारनाथ यात्रा के बारे में ऑल इस गुड का संदेश दे रही है, ज्ञात हो कि यह वही राकेश शर्मा है जिन्‍होंने केदारनाथ आपदा की त्रासदी को कमतर आंक कर तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री को गुमराह किया था, जिससे उन्‍हें कुर्सी गंवानी पडी थी, – चन्‍द्रशेखर जोशी की एक्‍सक्‍लूसिव रिपोर्ट- # चारधाम यात्रा शुरू होने को कुछ ही माह का समय शेष� #हाईवे की स्थिति बेहद खराब #खाद्यान्न सामग्री ले जाना मुश्किल #भू धंसाव का दौर जारी #केदारनाथ आठ फीट तक बर्फ #सड़क की स्थिति ठीक नहीं #पैदल मार्ग खतरनाक होने के साथ ही खड़ी चढ़ाई #गौरीकुंड में वीरानी#आज भी यहां आपदा के मलबे से भरी दुकान #अभी तक कोई रोड मेप तैयार नहीं #आपदा के बाद� मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा #आपदा के बीस माह� भी इस स्थान को ठीक करने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं #पचास करोड़ के कार्य केदारनाथ में होने हैं,� धन के अभाव से अभी शुरू नहीं #पहाड़ियों से हिमखंड का टूटने का सिलसिला शुरू #मुख्यमंत्री ने यात्रा शुरू होने से पूर्व रोपवे निर्माण करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कार्य भी शुरू नहीं� #बाढ़ सुरक्षा कार्यो के निर्माण में मानकों की अनदेखी # केदारनाथ में सिंचाई विभाग से किए जाने वाले सुरक्षा कार्य अभी शुरू नहीं� #कई गांवों के सम्पर्क मार्ग बंद # मरीजों का उपचार नहीं

मई 2015 से शुरू होने वालीRAKESH SHARMA 4DHAM केदारनाथ यात्रा इस बार गौरीकुंड के बजाय सोनप्रयाग से संचालित होगी। यात्रा शुरू होने में डेढ़ महीना ही शेष बचा है,� इस बार की चार धाम यात्रा यात्रियों के लिए मुसीबत बनने वाली है।� ‘गौरीकुंड की स्थिति जैसी आपदा के समय थी, वैसी आज भी है। गौरीकुंड की सुरक्षा के लिए अभी तक कोई ठोस प्रयास नहीं किए गए है। इसका असर यहां के लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ‘सोनप्रयाग से लेकर गौरीकुंड तक हाईवे की स्थिति बेहद खराब है। ऐसे में खाद्यान्न सामग्री ले जाना मुश्किल हो गया है। यात्रा सीजन में यात्रियों के लिए भारी परेशानियां होगी।’

गौरीकुंड हाईवे पर स्थित सेमी जोन तीर्थयात्रियों और प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन सकता है। आपदा के बीस माह बाद भी इसके स्थाई समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की जा सकी है, जबकि इस स्थान पर भू धंसाव का दौर जारी है। वर्तमान में केदारनाथ आठ फीट तक बर्फ जमी है। बारिश होने पर यहां भारी वाहन फंस जाते हैं, जिससे घटों जाम की स्थिति पैदा हो जाती है।� रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर सेमी गांव में आज भी सड़क की स्थिति ठीक नहीं है। दो साल पहले जून में मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से ऊखीमठ विकास खंड के सेमी गांव में नदी के कटाव से गांव के नीचे से पूरी पहाड़ी दरक गई थी। ग्रामीणों के आवासीय भवन जमीन में धंस गए थे। सेमी गांव के साथ ही गौरीकुंड हाईवे को खासा नुकसान पहुंचा था।� केदारनाथ आपदा के कारण पूर्व रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके पैदल मार्ग को दुरूस्त तो किया गया, लेकिन लिनचौली से केदारनाथ बेस कैंप तक बनाया पैदल मार्ग खतरनाक होने के साथ ही खड़ी चढ़ाई का है। 2013 में 16-17 जून में आई आपदा से हुई तबाही केदारनाथ का मुख्य व सड़क मार्ग से जुड़ा अंतिम पड़ाव गौरीकुंड में वीरानी छाई हुई है। आज भी यहां आपदा के मलबे से भरी दुकानों को साफ देखा जा सकता है। इस मुख्य कारण गौरीकुंड तक सड़क मार्ग का सही न बन पाना है। साथ ही आपदा में यहां बने बस अडडा बाजार का बहने से यहां पर पुनर्निर्माण की जरूरत है, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई रोड मेप तैयार नहीं हो सका है।

अब चारधाम यात्रा शुरू होने को कुछ ही माह का समय शेष बचा हुआ है। इस बार चारधाम यात्रा के दौरान सेमी गांव में बना स्लाइडिंग जोन प्रशासन और तीर्थयात्रियों के लिए मुसीबतों भरा हो सकता है। आपदा के बीस माह से ज्यादा का समय बीतने के बाद भी इस स्थान को ठीक करने के लिए कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया है। बारिश होते ही यहां पर जमीन दलदल का रुप ले ले रही है। इससे आवाजाही करने वाले भारी वाहन बीच हाईवे पर ही फंस जाते हैं। अभी तक करीब एक दर्जन से अधिक वाहन यहां फंस चुके हैं। इससे जब-तब घंटों जाम की स्थिति बन जाती है।� यात्रा के दौरान केदारनाथ पहुंचने वाले शिव भक्तों को इस बार भी लिनचौली की खड़ी चढ़ाई से पार कर ही केदारपुरी पहुंचना होगा। चढ़ाई को देखते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री ने यात्रा शुरू होने से पूर्व रोपवे निर्माण करने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कार्य भी शुरू नहीं हो सका है। लिनचौली से केदारनाथ की दूरी करीब पांच किमी है। इस बार भी भक्तों को खड़ी चढ़ाई पार कर बाबा के दर्शन करने पड़ेंगे। �

गौरीकुंड से केदारनाथ तक का पंद्रह किमी का सफर देश विदेश से भोले बाबा के दर्शन को आने वालों भक्तों के लिए किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होता। खड़ी चढ़ाई का यह सफर काफी कठिन होता है। घोड़े, खच्चर भी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कई स्थानों पर मार्ग संकरा होने से स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है। कई यात्री पैदल मार्ग पर घोडे़, खच्चरों की आवाजाही के दौरान टक्कर से घायल भी हो जाते हैं। आपदा के बाद यह मार्ग कई स्थानों पर जानलेवा बना हुआ है। मार्ग पर कई स्थानों पर नीचे की ओर रेलिंग तक नहीं बनी है, जो कि दुर्घटना का कारण भी बन जाता है।� मुख्य डेंजर जोन- गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव, घिनुरपाणी, जंगलचट्टी, भीमबलि, लिनचोली, केदारनाथ बेस कैंप से पहले पचास करोड़ के कार्य केदारनाथ में होने हैं, उन्हें धन के अभाव से अभी शुरू नहीं किया गया है।� केदारनाथ मार्ग पर उच्च हिमालय से हिमखंड टूटने लगे हैं। चटक धूप के बाद लिनचौली में पहाड़ियों से हिमखंड का टूटने का सिलसिला शुरू हो गया है। गत फरवरी माह में भी हिमखंड टूटने से भीमबली में पैदल मार्ग पर बना पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है।
केदारनाथ के पुराने घोड़ा पड़ाव में जीएमवीएन का अतिथि गृह समेत कई भवन पूर्व में हिमखंड टूटने से क्षतिग्रस्त होते रहे हैं। इस वर्ष भी भीम बली का पैदल पुल हिमखंड से क्षतिग्रस्त हो चुका है। इस वर्ष भारी बर्फबारी से केदारनाथ की खड़ी चट्टानों से हिमखंड टूटने का खतरा अधिक बढ़ गया है।

लिनचोली से केदारनाथ तक का पूरा क्षेत्र हिमखंड टूटने की दृष्टि से काफी खतरनाक है। लिनचोली में भी हिमखंड टूटने लगे हैं, हालांकि इससे अभी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, लेकिन लिनचोली में बने प्रीफेब्रिकेट हट समेत पैदल रास्ते को इससे खतरा बना हुआ है। लोक निर्माण विभाग अधिशासी अभियंता गुप्तकाशी केएस नेगी का कहना है कि पूरे केदारनाथ पैदल मार्ग पर हिमखंड का खतरा है। लोक निर्माण विभाग पैदल मार्ग पर प्रत्येक वर्ष पुलों का हटा देता है, ताकि हिमखंड से इनको नुकसान न पहुंचे।

सरकार करोड़ों की राशि खर्च कर सुरक्षा दीवारों का निर्माण तो करा रही है, लेकिन घटिया गुणवत्ता के चलते यह पीड़ितों के दर्द को कम करने के बजाय बढ़ाने का काम कर रहे हैं। विगत वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा ने केदारनाथ से रुद्रप्रयाग तक ऐसा कोहराम मचाया था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता है। नदी किनारे बने आवासीय भवन बड़ी संख्या में आपदा की भेंट चढ़ गए थे। कई स्थानों पर मंदाकिनी नदी के कटान से आवासीय भवनों को खतरा पैदा हो गया था। खतरे को देखते हुए सरकार ने इन स्थानों को चिह्नित कर यहां बाढ़ सुरक्षा कार्यो को स्वीकृति दी थी। आपदा के बाद रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक बाढ़ सुरक्षा कार्य शुरू किए हैं। इन कार्यो में घटिया गुणवत्ता की शिकायतें भी आती रही हैं। सिंचाई विभाग की विजयनगर में बनाई गई सुरक्षा दीवार हल्की बारिश के बाद टूट गई। दीवार का निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले इसमें दरार पड़नी शुरू हो गई थी। इससे पूर्व भी तिलवाड़ा में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के निर्माण में मानकों की अनदेखी का आरोप भी सामने आया।

आपदा के बाद जिले में बाढ़ सुरक्षा कार्यो के लिए शासन से धनराशि अवमुक्त होने में हो रही देरी का असर बाढ़ सुरक्षा कार्यो पर पड़ रहा है। कार्य 75 फीसदी होने के बावजूद धनराशि मात्र तीस फीसदी ही उपलब्ध हो पाई है। ऐसे में जो काम हुए भी उसकी गुणवत्ता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
विगत वर्ष 2013 में आई केदारनाथ आपदा से जिले को नदी किनारे वाले क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचा था। नदी तट पर बने सैकड़ों आशियाने भी आपदा की भेंट चढ़ गए थे। केदारनाथ से रुद्रप्रयाग तक नदी से सटे आवासीय भवनों की सुरक्षा को लेकर शासन ने बाढ़ सुरक्षा कार्य विभिन्न विभागों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। सिंचाई विभाग ने रुद्रप्रयाग-केदारनाथ तक अधिकांश स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्यो को शुरू तो कराया, लेकिन कई स्थानों पर घटिया गुणवत्ता की शिकायतें भी सामने आई। हल्की बारिश होने के बाद विजयनगर में तो सुरक्षा दीवार ढह गई। बाढ़ सुरक्षा कार्यो के लिए शासन ने सौ करोड़ स्वीकृत किए थे, लेकिन अभी तक पूरी धनराशि उपलब्ध न होने से कई दिक्कतें सामने आ रही है। इससे बाढ़ सुरक्षा कार्यो की गुणवत्ता पर भी इसका असर पड़ रहा है। जिले में 100 करोड़ से अधिक रुपये के बाढ़ सुरक्षा कार्य किए जा रहे, लेकिन कार्यो के लिए अभी तक मात्र तीस फीसदी धनराशि ही उपलब्ध हो पाई है। इससे ठेकेदारों का भुगतान न होने से वह भी परेशान हैं। केदारनाथ में सिंचाई विभाग से किए जाने वाले सुरक्षा कार्य अभी शुरू नहीं हो पाए हैं। वहां अधिक बर्फबारी के चलते मई महीने के बाद ही कार्य शुरू होने की उम्मीद है।

इन स्थानों पर चल रहे कार्य-
रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि, सिल्ली, विजयनगर, गंगानगर, कुंड, बेडूबगड, कालीमठ, भैंसारी, रामपुर, सोनप्रयाग, राऊलैंक, लमगौंडी आदि।
वही दूसरी ओर केदारनाथ में अधिक बर्फबारी का असर दिखने लगा है। मंदिर के सामने बने बद्री-केदार मंदिर समिति के एक भवन की छत अधिक बर्फबारी से टूट गई। इससे काफी सामान भी बर्बाद हुआ है।

केदारनाथ में भारी बर्फबारी के चलते भवनों के ऊपर छतों में कई फीट ऊंची बर्फ की परत जमी हुई है, जो भवनों के लिए खतरा बनी हैं। बुधवार रात्रि बद्रीकेदार मंदिर समिति के भंडार गृह की छत टूट गई, जिससे यहां रखा कुछ सामान खराब हो गया, जबकि अन्य सामग्री को निम ने मंदिर समिति के ही प्रवचन हॉल में शिफ्ट कर दिया।

इस बीच, मौसम साफ होते ही केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य शुरू हो गए हैं। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान के मजदूरों ने घाट निर्माण की प्रक्रिया तेज कर दी है। केदारनाथ में सभी भवनों की छतों से बर्फ हटाई जा रही है। रास्तों से भी बर्फ हटा दी गई है। वहीं एटीवी वाहन को जोड़ने के लिए इंजीनियरों की टीम भी केदारनाथ पहुंची। यह वाहन केदारपुरी में बर्फ में आसानी से चलते हैं। निम इसका प्रयोग करता है।

11 मार्च 2015 को बर्फबारी जिले के सीमांत गांव तोषी, त्रिजुगीनारायण, गौंडार, रांसी, बक्सीर, चौमासी मार्च महीने में भी बर्फबारी का दंश झेल रहे हैं। बर्फबारी अधिक होने से कई गांवों के सम्पर्क मार्ग बंद हो गए है। ऊखीमठ-चोपता-मंडल मोटरमार्ग लंबे समय से बंद है। बर्फबारी से सोनप्रयाग- त्रियुगीनारायण मोटरमार्ग भी बंद है। इन सीमांत गांवों में से तोषी, रासी में विद्युत आपूर्ति ठप है। इससे ग्रामीणों की समस्या और बढ़ गई है। मौसम ठीक होने का इंतजार यहां के ग्रामीण कर रहे हैं। रांसी के पूर्व प्रधान राम सिंह का कहना है कि गांव से बाहर जाने के रास्ते बर्फ से ढके हुए हैं। ऐसे में गांव में ही ग्रामीण कैद हैं। यदि शीघ्र मौसम ठीक नहीं हुआ तो आवश्यक सामग्री की किल्लत पैदा हो जाएगा। तोषी के ग्रामीण सुन्दर सिंह ने बताया कि गांव में विद्युत व्यवस्था भी बर्फबारी के बाद ठप पड़ी है। इससे समस्या ओर अधिक बढ़ गई है।

रुद्रप्रयाग में धनपुर क्षेत्र को जोड़ने वाला रैंतोली-जसोली मोटरमार्ग विगत ढाई सप्ताह से बंद है। ऐसे में क्षेत्र में बुनियादी व्यवस्थाएं चरमराने के साथ ही बीमार लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

धनपुर क्षेत्र के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों को जोड़ने वाले मोटरमार्ग पर इन दिनों चौड़ीकरण का काम चल रहा है जिसके चलते मार्ग इन दिनों रैंतोली से पंचभैया खाल तक अवरुद्ध है। बीरों गांव से लेकर पीड़ा गांव तक मोटरमार्ग बंद चल रहा है। मोटरमार्ग अवरुद्ध होने से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई है। बंद पड़े मोटरमार्ग से सबसे ज्यादा परेशानी क्षेत्र के बीमार लोगों पर पड़ रहा है। विगत दो सप्ताह ग्वाड़, चिनग्वाड़, मोलखंडी समेत क्षेत्र में बच्चे, महिला व पुरुष बुखार से पीड़ित हैं। क्षेत्र के ग्वाड़ थापली स्थित चिकित्सालय में मरीजों का उपचार नहीं हो पा रहा है। बीमार लोग पैदल चलने में असमर्थ हैं, ऐसे में मरीजों को उपचार के लिए पालकी के जरिए करीब आठ किमी दूर जिला चिकित्सालय पहुंचाया जा रहा है। क्षेत्र को जोड़ने वाला एकमात्र मोटरमार्ग बंद होने से क्षेत्र में जरूरी बुनियादी सुविधाओं का टोटा बन गया है, जबकि लोली, बीरों, ग्वाड, पीड़ा, च्वीथ, पंचभैयाखाल, चिन्गवाड, खरणपाणी, पटोती, थपलधार आदि गांवों के लोग अपने लिए बुनियादी सामग्री को पीठ पर लादकर ही पैदल आवाजाही कर रहे है।

.

image_pdfimage_print


सम्बंधित लेख
 

Back to Top