भारत राष्ट्रमंडल खेल 2026 में लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए यह साबित कर रहा है कि खेलों में वर्षों से किए गए निवेश और योजनाओं का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। मीराबाई चानू द्वारा लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल स्वर्ण पदक जीतना भारतीय खेलों की प्रगति का प्रतीक है। खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्रीय एकता, आत्मविश्वास और गौरव की भावना को भी मजबूत करते हैं। देश की लगभग 65 प्रतिशत युवा आबादी को ध्यान में रखते हुए सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय को 4,479.88 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड आवंटन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वर्ष 2017 में शुरू की गई खेलो इंडिया योजना भारतीय खेलों की मजबूत नींव बन चुकी है। इस योजना के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान, प्रशिक्षण, खेल विज्ञान, आधुनिक तकनीक, प्रतियोगिताओं के आयोजन तथा खेल अवसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जुलाई 2026 तक 349 खेल अवसंरचना परियोजनाओं, 1,067 खेलो इंडिया केंद्रों, 267 अकादमियों तथा 2,745 खिलाड़ियों को सहायता प्रदान की जा चुकी है। इस योजना का उद्देश्य वर्ष 2036 तक भारत को विश्व के अग्रणी खेल राष्ट्रों में शामिल करना है।

खेलो इंडिया गेम्स ने देश के युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान किया है। 2018 में स्कूल गेम्स से शुरू हुई यह पहल अब यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, विंटर गेम्स, पैरा गेम्स, बीच गेम्स, वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल और ट्राइबल गेम्स तक विस्तारित हो चुकी है। अब तक 63,000 से अधिक खिलाड़ी इन प्रतियोगिताओं में भाग ले चुके हैं। इसके साथ ही टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (TOPS) और कीर्ति (KIRTI) जैसी योजनाएं खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं, वित्तीय सहायता तथा वैज्ञानिक प्रतिभा पहचान प्रणाली उपलब्ध कराकर उन्हें विश्वस्तरीय प्रदर्शन के लिए तैयार कर रही हैं।

सरकार ने खेल सामग्री निर्माण को भी नई दिशा दी है। केंद्रीय बजट 2026-27 में इसके लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे भारत उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरणों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बन सके। अनुसंधान, नवाचार, सामग्री विज्ञान और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ यह पहल रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करेगी। इन सभी प्रयासों से भारत का खेल इकोसिस्टम अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बन रहा है।

भारत का अंतरराष्ट्रीय खेल प्रदर्शन भी लगातार बेहतर हुआ है। ओलंपिक में भारत ने रियो 2016 के दो पदकों से आगे बढ़कर टोक्यो 2020 में सात तथा पेरिस 2024 में छह पदक जीते। पैरालंपिक में भारत ने 2016 के चार पदकों से बढ़कर 2024 में 29 पदकों का ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। एशियाई खेलों में भारत ने 2023 में रिकॉर्ड 107 पदक जीते, जबकि राष्ट्रमंडल खेलों में भी भारत लगातार शीर्ष प्रदर्शन करने वाले देशों में शामिल रहा है। नीरज चोपड़ा, मीराबाई चानू, पी. वी. सिंधु, अवनी लेखरा, सुमित अंतिल और अन्य खिलाड़ियों ने देश का गौरव बढ़ाया है।

राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत का 124 सदस्यीय दल भाग ले रहा है, जिसमें 78 पुरुष और 46 महिला खिलाड़ी शामिल हैं। 27 जुलाई 2026 तक भारत ने एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य सहित चार पदक जीत लिए हैं। मीराबाई चानू ने स्वर्ण पदक जीतकर लगातार तीसरी बार राष्ट्रमंडल खेलों का खिताब अपने नाम किया, जबकि ऋषिकांता सिंह, मुथुपंडी राजा और झंडू कुमार ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत की पदक संख्या बढ़ाई। अभी कई स्पर्धाएं शेष हैं और भारतीय खिलाड़ी पूरे आत्मविश्वास के साथ मुकाबला कर रहे हैं।

भारत की खेल यात्रा निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। खेलो इंडिया, TOPS, KIRTI तथा अन्य सरकारी पहलों ने देश में खेल संस्कृति को मजबूत किया है और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय अवसर उपलब्ध कराए हैं। निरंतर निवेश, आधुनिक प्रशिक्षण, वैज्ञानिक सहायता और मजबूत खेल अवसंरचना के कारण भारत वैश्विक खेल मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। भविष्य में भी यही प्रयास भारत को विश्व के अग्रणी खेल राष्ट्रों में स्थापित करने और नई पीढ़ी को खेलों में उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते रहेंगे।