नई दिल्ली में आयोजित फ्रीडम 250 “स्लैम डंक एक्सपीरियंस” कार्यक्रम में भारत के युवा बास्केटबॉल खिलाड़ियों को नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन ( एनबीए) के प्रतिनिधियों और जानेमाने बास्केटबॉल खिलाड़ी व्लाडे डीवात्स से मिलने का अवसर मिला, जिसने अमेरिका-भारत खेल राजनय को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया।
भारत के युवा बास्केटबॉल खिलाड़ियों की एक पीढ़ी के लिए अमेरिका नक्शे पर भले ही दूर हो, पर उन्हें वह कहीं करीब महसूस होता है। वे सोशल मीडिया पर नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन (एनबीए) के मशहूर खिलाड़ियों को फॉलो करते हैं, यूट्यूब पर उनके खेल की बारीकियों का अध्ययन करते हैं, अपने पसंदीदा खिलाड़ियों पर चर्चा करते हैं और दुनिया के सबसे बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करने का सपना देखते हैं।
यह जुड़ाव नई दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर में आयोजित फ्रीडम 250 “स्लैम डंक एक्सपीरियंस” के दौरान साकार हुआ। दिल्ली के स्कूलों और बास्केटबॉल अकादमियों से आए 150 से अधिक विद्यार्थी एनबीए के प्रतिनिधियों से मिलने के लिए एकत्र हुए। एनबीए अमेरिका की प्रमुख पेशेवर बास्केटबॉल लीग है और खेल के मशहूर बास्केटबॉल खिलाड़ियों का ठिकाना है।
यह कार्यक्रम फ्रीडम 250 समारोहों के तहत आयोजित किया गया था, जो अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक पहल है। नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास ने अमेरिकी पेशेवर बास्केटबॉल टीम सैक्रामेंटो किंग्स के साथ साझेदारी कर विद्यार्थियों को बास्केटबॉल खेल, इस खेल में कुशल बनने और साझा आकांक्षाओं के माध्यम से जुड़ने का अवसर प्रदान किया।
भारत में बास्केटबॉल की बढ़ती पहचान
जब विद्यार्थियों से उनके बास्केटबॉल नायकों के बारे में पूछा जाता है, तो वे तुरंत जवाब देते हैं: स्टीफन करी, कोबी ब्रायंट, एलन आइवरसन, डेविन बुकर और जियानिस एंटेटोकाउनम्पो। ये नाम अलग-अलग युगों, टीमों और खेलने की शैलियों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो बास्केटबॉल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाते हैं।
कार्यक्रम के प्रतिभागियों में से एक अफ्युपांग मिश्रा के लिए एंटेटोकाउनम्पो प्रेरणा के स्रोत हैं। मिश्रा मिल्वॉकी बक्स के इस स्टार खिलाड़ी की प्रशंसा करते हैं “क्योंकि वह बहुत प्रभावशाली हैं और बहुत शक्तिशाली भी।” कार्यक्रम में शामिल कई युवा खिलाड़ियों की तरह, वह भी भारत के बाहर पेशेवर स्तर पर खेलने और अंततः खेल के सर्वोच्च स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की आशा रखते हैं।
ऐसी महत्वाकांक्षाएं पूरे दिन कार्यक्रम के दौरान एक साझा विषय बनी रहीं। नेहरू वर्ल्ड स्कूल के 16 वर्षीय खिलाड़ी कृष्णा सिंह, जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया है, एक दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहते हैं। वह कहते हैं, “मेरा लक्ष्य एनबीए तक पहुंचना है।”
उनके सहपाठी मयंक त्यागी का लक्ष्य भी कुछ ऐसा ही है। वह कहते हैं, “मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं, लेकिन मेरा मुख्य लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलना है।”
पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने शूटिंग, पासिंग और ड्रिब्लिंग स्टेशनों पर अभ्यास किया और साथ ही सैक्रामेंटो किंग्स के कोच तथा दिल्ली के अन्य खिलाड़ियों से बातचीत की। कई विद्यार्थियों के लिए इस अनुभव ने उनके इस विश्वास को और मज़बूत किया कि भारत में बास्केटबॉल का भविष्य उज्ज्वल है।
नेहरू वर्ल्ड स्कूल की रुद्राक्षी वर्मा कहती हैं, “भारत में बास्केटबॉल बढ़ रहा है और इसका वास्तव में भविष्य है।” उनका मानना है कि यह खेल ऐसे सबक सिखाता है जो खेल प्रदर्शन से कहीं आगे हैं। वह कहती हैं, “यह सिर्फ खेल के बारे में नहीं है। हमें नए लोगों से मिलने का अवसर मिलता है, नई चीजें सीखने को मिलती हैं, हम खेल भावना सीखते हैं, जो हम किताबों या अकादमिक शिक्षा से नहीं सीख सकते।”
शिव नादर स्कूल की सिमरन एनबीए के महान खिलाड़ी कोबी ब्रायंट से प्रेरणा लेती हैं, जिनकी समर्पण भावना और अनुशासन आज भी दुनिया भर के खिलाड़ियों को प्रभावित करते हैं। ब्रायंट की प्रसिद्ध “माम्बा मेंटैलिटी”—एक ऐसा दर्शन जो निरंतर आत्म-सुधार और दृढ़ता पर आधारित है—उनके लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है।
एनबीए दिग्गज से प्रशिक्षण
सीखने के अवसर अभ्यास और मैत्री मुकाबलों से कहीं आगे तक थे। विद्यार्थियों ने एनबीए दिग्गज हॉल ऑफ फेमर व्लाडे डीवात्स की बातें भी सुनीं, जिनके लॉस एंजिलीस लेकर्स, शार्लट हॉर्नेट्स और सैक्रामेंटो किंग्स के साथ कॅरियर ने उन्हें बास्केटबॉल के सबसे प्रसिद्ध पहचान वाले अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों में से एक बनाने में मदद की।
प्रतिभागियों से बातचीत करते हुए डीवात्स ने जोर दिया कि सफलता इस बात से निर्धारित नहीं होती कि कोई व्यक्ति कहां से शुरुआत करता है। अपने जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, “इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका जन्म कहां हुआ है। आप अपने सपनों को किसी भी तरह हासिल कर सकते हैं, लेकिन आपको सही काम करने होंगे।”
डीवात्स ने खेल और अकादमिक शिक्षा के बीच संतुलन के महत्व पर भी जोर दिया और कहा कि मैदान के अंदर और बाहर दोनों जगह समर्पण युवा खिलाड़ियों के लिए अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने कहा, “यदि आप खेल से प्यार करते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और स्कूल में अच्छा प्रदर्शन करते हैं, तो बास्केटबॉल निश्चित रूप से आपको एनबीए खिलाड़ी बनने का रास्ता देता है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए संदेश स्पष्ट था: प्रतिभा महत्वपूर्ण है, लेकिन प्रतिबद्धता और तैयारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। डीवात्स ने प्रतिभागियों को याद दिलाया कि जो लोग अपने विकास में निवेश करने के लिए तैयार रहते हैं, उनके लिए अवसर अप्रत्याशित स्थानों से भी उभर सकते हैं। उन्होंने कहा, “यदि आप खेल से प्यार करते हैं, अपने खेल पर मेहनत करते हैं और अपने खेल को विकसित करते हैं, तो आगे चलकर, कौन जानता है, आप एनबीए तक पहुंच सकते हैं।”
अमेरिका-भारत खेल कूटनीति का जीवंत उदाहरण
बास्केटबॉल कौशल से आगे बढ़कर, इस कार्यक्रम ने सार्थक संवाद के अवसर भी प्रदान किए। कई विद्यार्थियों ने कहा कि अमेरिकी प्रशिक्षकों, खिलाड़ियों और प्रतिनिधियों के साथ बातचीत ने उन्हें खेल से जुड़े लोगों और उनके दृष्टिकोण को बेहतर ढंग से समझने का अवसर दिया।विद्यार्थी प्रतिभागी थियो ने कहा कि कार्यक्रम की सबसे खास बात इसकी आपसी संवाद की प्रकृति थी। वह कहती हैं, “उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अलग-थलग महसूस न करे। यह बहुत समग्र अनुभव था।”
रुद्राक्षी के लिए इस अनुभव ने भारत और अमेरिका के युवाओं के बीच समानताओं को उजागर किया। वह कहती हैं, “हमें यह जानने का मौका मिलता है कि वे क्या सोचते हैं, वे कैसे हैं, खेल के प्रति उनकी मानसिकता क्या है और हमारी समानताएं क्या हैं।”
बास्केटबॉल प्रशिक्षक और कंटेंट क्रिएटर देवांश पावडीघड़ा ने इन संबंधों को स्वयं अनुभव किया है। अमेरिका में अध्ययन और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, वह अब भारत में युवा प्रतिभाओं को विकसित करने के साथ-साथ देश की बढ़ती बास्केटबॉल संस्कृति का दस्तावेजीकरण भी कर रहे हैं।
वह कहते हैं, “खेल, कला और संगीत: ये कुछ ऐसी चीजें हैं जो सभी सीमाओं को पार कर जाती हैं।”
पावडीघड़ा का मानना है कि बास्केटबॉल लोगों में एकता की भावना पैदा करता है, जैसा बहुत कम मंच कर पाते हैं। इस खेल के माध्यम से बने उनके संबंध आज भी उनके जीवन और कॅरियर को आकार दे रहे हैं।
वह कहते हैं, “दोस्त बनाने, नए लोगों से मिलने और आत्मविश्वास विकसित करने में बास्केटबॉल ने मेरी बहुत मदद की है। यह लोगों को एक बेहद अनोखे तरीके से जोड़ता है, और यही इसकी सबसे अद्भुत बात है।”
बास्केटबॉल के वैश्विक भविष्य का निर्माण
डीवात्स भारत में बास्केटबॉल की अपार संभावनाएं देखते हैं। वह कहते हैं, “भारत एक महान और विशाल देश है और हम बास्केटबॉल के विकास में, विशेष रूप से बच्चों के लिए, उनकी मदद करना चाहेंगे।”
क्रिकेट की स्थायी लोकप्रियता को स्वीकार करते हुए भी डीवात्स का मानना है कि बास्केटबॉल उसके साथ-साथ आगे बढ़ता रह सकता है। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा दिखाया गया उत्साह और प्रतिभा का प्रदर्शन, उनके इस विश्वास को और मज़बूत करता है।
डीवात्स के लिए भारत में बास्केटबॉल का भविष्य एक बड़े कथानक का हिस्सा है—एक ऐसी दास्तां जो दर्शाती है कि यह खेल सीमाओं के पार लोगों को जोड़ने की क्षमता रखता है। अपने कॅरियर के दौरान बास्केटबॉल ने उन्हें दुनिया भर के लोगों और समुदायों से जोड़ा है, जो इस खेल की वैश्विक पहुंच को प्रदर्शित करता है।
फ्रीडम 250 “स्लैम डंक एक्सपीरियंस” ने इसी भावना को प्रतिबिंबित किया। विद्यार्थियों, प्रशिक्षकों और एनबीए प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर, इस कार्यक्रम ने दिखाया कि खेल किस प्रकार युवाओं को प्रेरित कर सकता है, नए अवसर पैदा कर सकता है और भारत तथा अमेरिका के बीच संबंधों को मज़बूत बना सकता है।
फोटो : राकेश मल्होत्रा
प्रेषकGiriraj Agarwal
Associate Editor- SPAN Hindi Magazine
U.S. Embassy, New Delhi
Public Diplomacy Section
Press & Media Office
साभार - https://spanmag.state.gov/hi/ से




