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पानीपत जेल रेडियो ने पूरे किए तीन महीने कोरोना काल में बन रहा अवसाद दूर करने का सहारा

16 जनवरी 2021 को शुरू किए गए पानीपत रेडियो ने बंदियों का मन जीत लिया है। जेल का रेडियो सबके मन का दुलारा बन गया है। नवरात्र के समय में जेल में भजन सुनने के लिए एकाएक काफी मांग होने लगी है। जेल रेडियो को हर रोज कम से कम 30 फरमाइश लिखित में मिल रही हैं। बंदी इस रेडियो को दिनभर सुनने के लिए उत्सुक रहते हैं।

कैसे बना यह जेल रेडियो

3 मार्च 2019 में शुरू हुई यह जेल हरियाणा की सबसे नई जेल है। इस जेल में करीब 1,000 बंदी हैं। दिसंबर 2020 में ऑडिशन के बाद इस जेल 5 बंदियों का चयन हुआ था। इनके नाम हैं- कशिश, सुरेश. सुशील, निमातुल्लाह और श्रवण। बाद में दिनेश को भी इस रेडियो से जोड़ा गया। 5 दिनों की ट्रेनिंग के दौरान इन बंदियों को जेल रेडियो के संचालन और उसकी जरूरतों से जुड़ी ट्रेनिंग दी गई। आज यह सभी छ लोग पूरी जेल में रेडियो जॉकी के तौर पर जाने जाते हैं। इन बंदियों के चयन और उनकी ट्रेनिंग का काम जेल सुधारक और तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा ने किया था।

16 जनवरी को राज्य का हरियाणा का पहला जेल रेडियो पानीपत जेल में ही शुरू हुआ था। इसका उद्घाटन हरियाणा के जेल मंत्री श्री रणजीत सिंह, हरियाणा के अतिरिक्‍त मुख्‍य सचिव (गृह और जेल), जेल महानिदेशक के.सेल्‍वराज (हरियाणा कारागार ) और श्री देवी दयाल, सुपरिटेंडेंट, पानीपत जेल ने किया था।

तिनका जेल रेडियो का अनूठा प्रयोग

इस जेल रेडियो के तहत कई ऐसे प्रयोग किए गए हैं जो ओर किसी जेल में नहीं किए गए हैं। तिनका मॉडल ऑफ रिफॉर्म्स के तहत बंदी हर रोज़ लिखित में अपने गानों की फरमाइश देते हैं ताकि जेलों में लिखने का अभ्यास बना रहे। बंदियों की फरमाइश पर तिनका तिनका फाउंडेशन की रिसर्च टीम काम कर रही है, जिसके नतीजे आने वाले समय में साझा किए जाएंगे। एक घंटे के प्रसारण से शुरू हुआ जेल रेडियो अब 2 घंटे का विस्तार पा चुका है। बंदी लगातार इस समय को बढ़ाने का दबाव बना रहे हैं। मज़े की बात यह है कि इस जेल के 15 बंदियों ने रेडियो जॉकी बनने की इच्छा ज़ाहिर की है। उनका अब ऑडिशन किया जाएगा जिसके बाद उनमें से कुछ का चयन होगा।

जेल अधिकारियों का सहयोग

पानीपत जेल के अधीक्षक देवी दयाल का कहना है कि जेल रेडियो का जादू पूरी जेल में कायम है। जेल में अवसाद की जबरदस्त कमी आई है, हिंसा में कमी आई है और बंदियों में रेडियो को लेकर जबर्दस्त उत्साह है। जब से रेडियो शुरु हुआ है, तब से एक दिन भी उसके प्रसारण को रोका नहीं गया है। इन बंदियों को रेडियो प्रसारण को सुचारू रूप से चलाने में जेल स्टाफ विशाल शर्मा और राजेश कुमार का विशेष योगदान रहा है।

तिनका लाइब्रेरी का असर

जेल रेडियो के साथ वाले कमरे में फरवरी के महीने में तिनका जेल लाइब्रेरी की स्थापना की गई थी। इसका मकसद जेल में बंदियों के बीच पढ़ने की इच्छा जगाना और रेडियो जॉकी को भरपूर सामग्री प्रदान करना भी था। इस लाइब्रेरी में करीब 1,000 किताबें हैं और बंदी इसका पूरा इस्तेमाल करते हैं। इसकी देख-रेख भी एक बंदी ही कर रहा है।

बंदियों पर प्रभाव

बंदी अपने परिवारों को फोन के जरिए इस जेल रेडियो से होने वाले फायदे बताने लगे हैं। एक रेडियो जॉकी बंदी की मां का कहना है कि जेल रेडियों के आने से उन्हें अपने बेटे को लेकर अब सुकून मिलने लगा है क्योंकि अब उनका बेटा पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर महसूस कर रहा है। एक और खास बात यह है कि रेडियो से जुड़े सभी छ बंदियों ने लिखित में यह मांग की है कि वे चाहते हैं कि जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान को मीडिया को बताया जाए ताकि समाज में उनके बारे में बनी हुई छवि में बदलाव आए।

तीन महीने होने पर विशेष कार्यक्रम

सभी 6 बंदियों ने आज के लिए विशेष कार्यक्रम बनाए। आज यह रेडियो जॉकी बारी-बारी से पूरी जेल से अपने अनुभवों को साझा करते रहे। इस मौके पर बंदियों के लिए वर्तिका नन्दा का बनाया एक खास पॉडकास्ट भी चलाया गया।

तिनका तिनका फाउंडेशन की पहल

हरियाणा जेल रेडियो की संकल्पना तिनका तिनका फाउंडेशन की संस्थापक डॉ. वर्तिका नन्दा ने की है। राज्य की 19 जेलों में से 3 जेलों में रेडियो लाया जा चुका है। इनमें जिला जेल करनाल, जिला जेल रोहतक, जिला जेल गुरुग्राम और केंद्रीय कारागार (प्रथम) हिसार को शामिल किया है। तीसरे चरण में 5 जेलों को चुना गया है जिनमें ज़िला जेल सिरसा, सोनीपत, जींद, झज्जर और यमुनानगर है।

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