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मंगलपाठ के श्रवण से होता है समस्याओं का समाधान

पूना । मंगल पाठ इतना असरदार है कि यदि वर्ष में एक बार भी इसका पाठ किया जाएं और नियमित रूप से इसका श्रवण किया जाए तो समस्त प्रकार की व्याधियाँए सामाजिकए पारिवारीक समस्याओं का समाधान हो जाता है। मंगलपाठ में बहुत उर्जा निहित होती है।

मंगल पाठ का वाचन करते हुए यह बात सलाहकार दिनेश मुनि ने बुधवार 26 अक्टूबर 2022 को ष्गौतम प्रतिपदा व श्री महावीर निर्वाण संवत् 2549 के नूतन वर्षष् के पावन अवसर पर श्री आदिनाथ स्थानकवासी जैन संघ ;पूनाद्ध के जैन स्थानक में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने लब्धि निधान गौतम स्वामी के कैवल्य ज्ञान व श्री सुधर्मा स्वामी के आचार्य पाठ परंपरा पर आरोहण का प्रकाश डालते हुए आगे कहा कि जैन.जैनेतर प्रायः सभी धर्मसंघों में मंगलपाठ.श्रवण करने की परम्परा है। जो व्यक्ति मंगलपाठ.श्रवण के रहस्य और प्रयोजन को भलीभाँति समझता हैए उसे मंगलपाठ.श्रवण से न केवल कानों को आनन्द मिलता हैए अपितु उसका तन.मन.हृदय पुलकित हो उठता है। वस्तुतः मंगलपाठ.श्रवण भी धर्मश्रवण की तरह अपूर्व फलदायक है। अरिहंत मंगल हैंए सिद्ध मंगल हैं साधु मंगल हैं और केवलज्ञानी ;वीतरागसर्वज्ञद्ध द्वारा प्रज्ञप्त ;आत्मद्ध धर्म मंगल है। मंगलपाठ में उक्त मंगल.प्रबोध मंगलपाठ के श्रोता की आत्मा को विशुद्ध बनाकर स्वयं मंगलमय बनने के लिए है। विशुद्ध आत्मा ही स्वयं मंगल हैए महामंगल है। धर्मरूप महामंगल को पाकरए अथवा धर्ममंगल को जीवन में रमाकर अरिहंतों और सिद्धों ने महामंगल की प्राप्ति की है। अतः महामंगल रूप इन चारों का स्वरूप समझकर मंगलपाठ श्रवण करके तथा मंगलपाठ में उक्त चारों महामंगलों का स्मरण करके.स्वरूप समझकर आत्मा को विशुद्ध तथा तदरूप मंगलमय बनाना है।

श्रमण डॉण् पुष्पेन्द्र द्वारा तीर्थंकर भगवान महावीर की अन्तिम वाणी श्री उतराध्ययन सूत्र के अन्तिम 36 वें अध्ययन का मूल वाचन किया। इससे पूर्व सामूहिक रुप से ष्जय महवीर प्रभुष् का आरती गान किया गया। व वीर स्तुति का पाठ लतिका चंगेढिया ने प्रस्तुत किया। खीर प्रभावना वितरण चातुर्मास के चार माह के गौतम प्रसादी लाभार्थी परिवार सुश्राविका इंदुबाई ललवाणीए श्री प्रदीप . प्रतिभा ललवानी परिवार ने लिया।

श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ने जानकारी देते हुए बताया कि जैनधर्म में भी भगवान् महावीर की निर्वाण तिथि के आधार पर वीर निर्वाण संवत् का प्रचलन है। यह हिजरीए विक्रमए ईसवीए शक आदि सभी संवतों से अधिक पुराना है एवं जैनधर्म की प्राचीनता व अपने मान्यता का उद्घोषक है। वर्ष 1912 में अजमेर जिले में बडली गाँव ;भिनय तहसीलए राजस्थानद्ध से प्राप्त ईसा से 443 वर्ष पूर्व के ष्84 वीर संवतष् लिखित प्राचीन प्राकृत युक्त ब्रहमी शिलालेख से की गयीए शिलालेख अजमेर के श्राजपूताना संग्रहालयश् में संगृहीत है!

प्राचीन षटकोणीय पिलर पर अंकित चार लाइनों वाले शिलालेख की प्रथम लाइन में ष्वीरष् शब्द भगवान महावीर स्वामी को संबोधित है और दूसरी लाइन में निर्वाण से 84 वर्ष अंकित हैए जो भगवान महावीर निर्वाण के 84 वर्ष बाद लिखे जाने को दर्शाता है। महावीर निर्वाण संवत् भगवान् महावीर के निर्वाण होने से अगले दिन ही कार्तिक सुदी १ से प्रारम्भ हुआ और आज से संवत् 2549 प्रारम्भ हुआ है। इस नूतन वर्ष पर सलाहकार दिनेश मुनि ने श्रद्धालुजनों को विविध मंत्रोच्चार के साथ पांच मंगलपाठ श्रवण करवाये और नववर्ष की बधाई व आशीर्वाद प्रदान किया।

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