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सोशल मीडिया से रिश्ते जुड़े मगर रिश्तों का एहसास खत्म हुआ

लाडनूं। भारत फ्रेंड्स ग्रुप के तत्वाधान में सोमवार को ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोशल मीडिया की उपयोगिता विषयक संवाद में बतौर मुख्य वक्ता बोलते हुए साहित्यकार डॉ वीरेन्द्र भाटी मंगल ने कहा कि सोशल कम्युनिकेशन फिज़िकल कम्युनिकेशन के जैसे ही है, लेकिन इस नेटवर्क ऑनलाइन से रिश्तो से आत्मिक अलगाव जैसा हो गया है, उन्होंने कहा कि पूरे विश्व स्तर पर हमारा कम्युनिकेशन नेटवर्क मजबूत हुआ है, लेकिन कहीं ना कहीं खून के रिश्ते पिछड़े हैं। इन रिश्तों में बड़े बुजुर्ग व सोशल मीडिया का उपयोग नही करने वाले रिश्ते शामिल हैं। इस अवसर पर डॉ भाटी ने सोशल मीडिया के उपयोगिता के बारे में जानकारी देते हुए फायदे व नुकसान पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि आज के दौर में सोशल मीडिया का उपयोग बहुतायत में हो रहा है। जिसके नुकसान भी हमारे सामने आ रहे है नुकसान से बचने के लिए व्यक्ति को संयम व विवेक का उपयोग करना होगा। डॉ भाटी ने सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग पर बल दिया।

विशिष्ट अतिथि सामाजिक चिंतक आलोक खटेड* ने सोशल मीडिया की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आपसी बातचीत, संपर्क बढ़ाने, इंफॉर्मेशन का आदान प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया फ्रेंडशिप मेंटेन करने का भी विशिष्ट माध्यम है। खटेड़ ने सोशल मीडिया के बढ़ते दुष्परिणाम पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी नहीं होने से बहुत सी जानकारियां गलत हाथों में चली जाती है, जिसका नुकसान उपयोगकर्ता को भोगना होता है। उन्होंने बढ़ रही मोबाइल एडिक्शन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे हमारे होनहार मानसिक स्वास्थ्य के साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी बर्बाद कर रहा है। उन्होंनेी सोशल मीडिया के सीमित उपयोग पर बल दिया।

इस अवसर से इटली से जेठाराम पंवार, डीडवाना से डॉ विपिन सोलंकी, चेन्नई से दीपचंद बोकाडिया, जोधपुर से कवि दिनेश दीवाना, कोटा से संगीता सिंह, बड़ौदा से शंकर शर्मा, जालौर से सांवलाराम परमार, बेंगलुरु से कमल बैद, लाडनूं से जाफरखान दुबई से मनोज गुर्जर, अजमेर से डॉक्टर जितेंद्र वर्मा सहित अनेक लोगों ने सहभागिता की।

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