आप यहाँ है :

रूस और ’मेक इन इण्डिया’

रूस के व्यापार व औद्योगिक मेले ’इन्नोप्रोम’ में इस साल भारत सहयोगी देश था। इस मेले ने दो देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने में क्या योगदान किया?

विगत 10 से 14 जुलाई तक रूस के येकतिरिनबूर्ग नगर में रूसी व्यापार व औद्योगिक मेले ’इन्नोप्रोम’ का आयोजन किया गया। यह रूस का सातवाँ व्यापार मेला था और पहला ऐसा मेला था, जिसमें भारत ने व्यापक रूप से सहयोग किया।

इस मेले में कुल 17 देशों की 638 कम्पनियों ने भाग लिया, लेकिन चूँकि भारत इस साल ’इन्नोप्रोम’ का सहयोगी देश था, इसलिए भारतीय कम्पनियों ने इसमें ख़ूब बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस अवसर पर भारत से मेले में भाग लेने के लिए पहुँचे प्रतिनिधिमण्डल में भारत सरकार के प्रतिनिधियों के अलावा भारतीय उच्च प्रौद्योगिकी निर्यात विकास परिषद के सदस्य, मशीन टूल एसोसिएशन ऑफ इण्डिया के सदस्य, रूस स्थित भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि तथा भारत के पाँच औद्योगिक राज्यों (महाराष्ट्र, गुजरात, झारखण्ड, राजस्थान और आन्ध्र प्रदेश) के मुख्यमन्त्री और अन्य अधिकारी शामिल थे। इस प्रतिनिधिमण्डल की नेता थीं – भारत की व्यापार और उद्योग मन्त्री निर्मला सीतारमण।

रूस के इस व्यापार मेले के भारतीय मण्डप में भारत की 112 कम्पनियों ने अपने-अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया था। सन ग्रुप, एसआरबी इण्टरनेशनल, भारत हैवी इलैक्ट्रिकल्स लिमिटेड, हैवी इंजीनियरिंग कारपोरेशन लिमिटेड, पॉवर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इण्डिया और नेशनल हाइड्रो पॉवर कारपोरेशन के स्टॉल सबसे बड़े थे। लेकिन भारतीय मण्डप में अपने उत्पाद पेश करने वाली 70 प्रतिशत भारतीय कम्पनियाँ मध्यम दर्जे की और छोटी कम्पनियाँ थीं।

इस अवसर पर बोलते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा – इस शानदार मेले में भाग लेकर हम बहुत ख़ुश हुए हैं। इन्नोप्रोम का सहयोगी बनना हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है। मैं और मेरे साथी यहाँ इसलिए आए हैं ताकि रूस के साथ हम अपने उन आर्थिक और व्यापारिक दीर्घकालीन रिश्तों का आगे विकास कर सकें, जो हमारी पुरानी मैत्री पर आधारित हैं। मुझे विश्वास है कि हमें यहाँ विश्वसनीय सहयोगी और साझेदार मिलेंगे। ख़ासकर हम तेल और गैस की निकासी, रासायनिक खादों के उत्पादन, नए परिवहन गलियारों के निर्माण तथा स्मार्ट सिटी बनाने के क्षेत्र में सहयोग करना चाहते हैं।

निर्मला सीतारमण ने ज़ोर दिया कि 2025 तक रूस और भारत ने अपना पारस्परिक व्यापार साढ़े 9 अरब डॉलर से बढ़ाकर 30 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य उठाया है। हम अपने पारस्परिक निवेश भी 11 अरब डॉलर से 15 अरब डॉलर तक पहुँचा देंगे। आज हमारा व्यापारिक ढाँचा आयात-निर्यात पर निर्भर करता है। रूसी कम्पनियाँ अपने औद्योगिक उत्पादों का भारत को निर्यात करने की कोशिश करती हैं, लेकिन वे भारत में अपनी प्रद्योगिकी का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। आज हमारे दोनों देशों की सरकारें इस प्रवृत्ति को रोकना चाहती हैं। रूस ही वह पहला देश है, जो भारत के ’मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम से जुड़ा। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत रूसी कम्पनी रोसतेख़ ने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ मिलकर भारत में लड़ाकू हैलिकॉप्टर केए-226 की जुड़ाई (असेम्बलिंग) करने का सँयुक्त कारख़ाना लगाया है।

रूस के व्यापार और उद्योग मन्त्री दिनीस मन्तूरफ़ ने कहा — कभी सोवियत संघ ने ही भारत में ज़्यादातर कारख़ाने बनाए थे। ये कारख़ाने परिवहन इंजिनियरिंग, ऊर्जा इंजीनियरिंग, इस्पात उत्पादन और एटमी उद्योगों से जुड़े हुए थे। आज भी रूस भारत के आधुनिकीकरण में हाथ बँटाने के लिए तैयार है। हाई टैक्नोलौजी के क्षेत्र में भी हमारे बीच व्यापक सहयोग हो सकता है। रूस भारत में यात्री विमानों के ख़ासकर एमएस-21 विमान के कल-पुर्जों का उत्पादन शुरू करना चाहता है। हो सकता है कि सुखोई सुपरजेट-100 विमान भी भारत के आकाश में उड़ान भरने लगें।

क्षेत्रीय सहयोग या प्रादेशिक स्तर पर सहयोग हमारे आपसी सहयोग की एक और दिशा हो सकती है। इस स्तर पर हमारी मध्यम दर्जे की और छोटी कम्पनियाँ व्यापक सहयोग कर सकती हैं। आज भी हमारे सामने इस तरह के सहयोग के उदाहरण हैं। जैसे इन्नोप्रोम में महाराष्ट्र राज्य ने रूस के स्विर्दलोव्स्क प्रदेश से व्यापारिक-आर्थिक क्षेत्र में और मानविकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इन प्रदेशों के बीच आपसी सहयोग में मुख्य ज़ोर खनन, भू-सर्वेक्षण और इंजीनियरिंग उद्योगों पर दिया जाएगा।

महाराष्ट्र के मुख्यमन्त्री देवेन्द्र फड़नवीस ने बताया — खनन के क्षेत्र में हमारे पास बहुत-सी परियोजनाएँ हैं और रूसी इंजिनियरिंग कम्पनियाँ इस दिशा में अपनी पूरी क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकती हैं।

उराल क्षेत्र के जंगलों को देखकर मुग्ध होने वाली राजस्थान की मुख्यमन्त्री वसुन्धरा राजे ने कहा कि वे वन उद्योग और लकड़ी उद्योग से जुड़े रूस के अनुभवों का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। इसके साथ-साथ रूस का स्विर्दलोव्स्क प्रदेश राजस्थान की पेयजल प्रबन्धन समस्या के समाधान में भी सहयोग करेगा।

रूस और भारत के बीच इस रूसी व्यापार मेले में जो समझौते हुए हैं, उनकी कुल रक़म अभी जोड़ी जानी बाक़ी है। लेकिन जैसाकि मालूम हुआ है रूसी कम्पनी ’उराल-वगोन-ज़ावोद’ ने भारतीय कम्पनी कल्याणी ग्रुप के साथ ’मेक इन इण्डिया’ कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वाचालित तोपों का मिलकर उत्पादन करने के बारे में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। एसआरबी इण्टरनेशनल ने कई रूसी कम्पनियों के साथ सहयोग के सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से एक कम्पनी भारत को बोरिंग मशीनों की सप्लाई करेगी, दूसरी कम्पनी खदानों और मैट्रो में लगाए जाने वाले औद्योगिक पंखों की सप्लाई करेगी और तीसरी कम्पनी उराल रसायन इंजीनियरिंग (उराल-ख़ीम-माश) एसआरबी के साथ मिलकर तेल व गैस कम्पनी इंजीनियर्स इण्डिया लिमिटेड की निविदाओं में भाग लेगी। एक और कम्पनी उराल भारी इंजीनियरिंग कम्पनी (उरालमाश) के साथ मिलकर 2017 में एसआरबी भारत में एक सर्विस सेण्टर खोलेगी, जो धातु उद्योग और खनन उद्योग को कल-पुर्जों की तुरन्त आपूर्ति करेगा।

रूस रेलवे भारत की रेलों की गति 250 किलोमीटर प्रतिघण्टे तक बढ़ाने के लिए भारत के रेलमार्गों के संजाल का आधुनिकीकरण करने की योजना बना रही है। रूस रेलवे पहले ही मेक इन इण्डिया कार्यक्रम से जुड़ चुकी है। रूस रेलवे यात्री-गाड़ियों और मालगाड़ियों के लिए विशेष रेल-गलियारे बनाने, रेलों के संचालन के आधुनिकतम तरीकों को भारतीय रेलों में लागू करने तथा उपग्रह नेवीगेशन सिस्टम के आधार पर रेलों के आवागमन को सुरक्षित बनाने में भी सहयोग देगी।

साभार-http://hindi.rbth.com/ से

image_pdfimage_print


सम्बंधित लेख
 

Get in Touch

Back to Top