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धनतेरस और दिवाली पूजन का महत्व व मुहुर्त

पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत 2 नवंबर मंगलवार को धनतेरस से होगी और छह नवंबर को यम द्वितीया तक दीपावली उत्सव रहेगा। चतुष्ग्रही योग में दिवाली का पर्व 4 नवंबर गुरुवार को उल्लास के साथ मनाया जाएगा। दिवाली के दिन कुबेर और लक्ष्मी का पूजन होगा। । ग्रहीय योग धनतेरस और ज्योति पर्व दिवाली को और मंगलकारी बना रहा है। 2 नवंबर को शुभ धनतेरस का त्योहार है। इस दिन सोना-चांदी के आभूषण खरीदने के लिए शाम 06 बजकर 20 मिनट से लेकर 08 बजकर 11 मिनट तक मुहूर्त रहेगा। इसके अलावा अगर सुबह के मुहूर्त पर विचार किया जाए तो सुबह 11 बजकर 30 मिनट से खरीदारी कर सकते हैं। लेकिन 2 नवंबर को राहुकाल के समय धनतेरस पर शुभ खरीदारी से बचें। धनतेरस के दिन खरीदारी का महत्व होता है। इस दिन सोना, चांदी, पीतल की चीजें और झाड़ू खरीदना शुभ माना गया है। पूजा के बाद धनवंतरी पूजन करें व अपने घर के पूजा गृह में ॐ धं धन्वन्तरये नमः मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।

इस वर्ष कार्तिक अमावस 4 नवंबर गुरुवार को प्रातः सूर्योदय से अर्धरात्रि बाद 2:44 तक व्याप्त रहेगी। दीपावली स्वाति नक्षत्र, आयुष्मान योग कालीन अपराहन सायँ प्रदोष निशीथ ,महानिशीथ व्यापिनी अमावस्या युक्त होने से विशेषता प्रशस्त एवं पुणय प्रदायक फल देने वाली रहेगी। प्रातः 7:41 के बाद स्वाति नक्षत्र चर, चल संज्ञक होने से वाहन लेनदेन, उद्योग कर्म, दुकानदारी, चित्रकारी ,शिक्षा कार्य ,स्कूल संचालन ,श्रृंगार प्रसाधन ,वस्त्र, आभूषण कार्य एवं अन्य कार्य करने के लिए भी शुभ माना जाएगा।


दिवाली पूजा मुहूर्त

इस बार लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 1 घंटे 55 मिनट की अवधि के लिए रहेगा। ये शाम 06 बजकर 09 मिनट से रात 08 बजकर 20 मिनट तक चलेगा।इस वर्ष दिवाली 4 नवंबर गुरुवार को मनाई जाएगी. दिवाली 2021 अश्विन (7वें महीने) की कृष्ण पक्ष त्रयोदशी (28वें दिन) से शुरू होती है और कार्तिक (8वें महीने) की शुक्ल पक्ष द्वितीया (दूसरा दिन) को समाप्त होती है. दिवाली पूजा करने का सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद का माना जाता है।

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