Monday, July 22, 2024
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रविवार 8 अ्क्टूबर को रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष योग

पितृपक्ष में रविवार, 8 अक्तूबर को रवि पुष्य नक्षत्र का विशेष योग बन रहा है। इस विशेष संयोग में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों की शांति, प्रसन्नता व मोक्ष की कामना के साथ श्राद्धकर्म करेंगे। इस दिन खरीदारी आदि करने के साथ पितरों की शांति व प्रसन्नता के लिए किया गया श्राद्ध विशेष फलदायक माना गाया गया है।

ज्योतिष के अनुसार रविवार भगवान सूर्य का वार माना गया है और श्राद्धकर्म के साक्षी भी वही होते हैं। दूसरी ओर पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि को माना गया है। शनि यम के भाई माने जाते हैं। अत: इस दिन कर्क राशि के चंद्रमा के साथ पुष्य नक्षत्र का योग श्राद्ध कर्म में विशेष फलदायक होगा। संयोगवश इसी दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी है।

अत: रवि पुष्य नक्षत्र के साथ इसके संयोग में पितरों के निमित्त धूप ध्यान, श्राद्ध, तर्पण एवं ब्राम्हणों को भोजन कराने, दान दक्षिणा देने के साथ गाय, कौआ, व कुत्ते को रोटी खिलाने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिष में इसे रवि पुष्य योग कहा जाता है। इस योग में खरीदारी और अन्य शुभ काम करने से उनका फायदा मिलेगा।

नवरात्र से पहले आने वाला ये रवि पुष्य संयोग पूरे दिन रहेगा। फिर दीपावली से पहले 5 नवंबर को रवि पुष्य योग बनेगा। ऐसी स्थिति साल में चार-पांच बार ही बनती है, इसलिए हर तरह के शुभ काम और नए काम की शुरुआत के लिए 8 तारीख को बन रहा शुभ संयोग बहुत ही खास रहेगा। इस शुभ संयोग में किए गए लेन-देन, निवेश, खरीदारी और शुरू किए काम से धन लाभ होता है।

निवेश और खरीदारी के लिए शुभ दिन
इस योग में खरीदारी बहुत शुभ फलदायी होती है। रविवार को पुष्य नक्षत्र होने से रविपुष्य योग बन रहा है। इस दिन पुष्य नक्षत्र सुबह 6:21 से शुरू होगा और रात को 2:45 तक रहेगा। इस दिन हीरे के आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक, ऑटोमोबाइल, जमीन, मकान, कपड़े और अन्य खरीददारी करने से सुख-समृद्धि बढ़ती है। इसके अलावा जमीन, मकान में निवेश करना चाहते हैं तो यह दिन फायदेमंद साबित हो सकता है। वहीं, वाहन, फर्नीचर, ज्वेलरी, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य घरेलू सामान की खरीदारी भी शुभ रहेगी।

ज्योतिष शास्त्र में बताए गए 27 नक्षत्रों में 8वें नंबर पर पुष्य नक्षत्र होता है। ये नक्षत्र गुरुवार और रविवार के दिन होने पर महायोग बनाता है। इसके साथ ही सोम और शुक्रवार के दिन ये नक्षत्र होने से शुभ माना जाता है। इसलिए सभी नक्षत्रों में पुष्य को सबसे श्रेष्ठ माना है। इस नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है। रवि पुष्य योग में मांगलिक कार्य और खरीदारी की जा सकती है।

सोना-चांदी, वाहन और प्रॉपर्टी खरीदने के लिए रवि पुष्य नक्षत्र को पवित्र माना गया है। बारह राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है और पुष्य नक्षत्र के सभी चरणों के दौरान ही चंद्रमा कर्क राशि में रहता है। इसलिए पुष्य नक्षत्र को धन के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है।

रविवार को पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से इसे ज्योतिष में विशेष शुभ योग माना जाता है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य विशेष फलदायक माना गया हैं। अत: इस दिन सभी प्रकार की खरीदारी, विशेषकर सोने की खरीदारी बड़ी संख्या में लोग करते हैं। पितृपक्ष में इस योग के बनने से इसे पितरों की शांति व प्रसन्नता के लिए विशेष फलदायक माना गया है। अत: बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्धनाथ, गयाकोठा व

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