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“सृजन” ने किया व्यंग्य साहित्य चर्चा का आयोजन

विशाखापटनम की सक्रिय हिन्दी साहित्य संस्था “सृजन” की मासिक बैठक में व्यंग्य साहित्य चर्चा का आयोजन ऑनलाइन किया गया। कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए सृजन की वरिष्ठ सदस्या भारती शर्मा ने उपस्थितों का स्वागत किया । उन्होंने कहा कि व्यंग्य लिखना यूं तो कठिन है, पर सृजन में व्यंग्य लिखने वालों की कमी नहीं है। सृजन का उद्देश्य है रचनाकारों को मंच मिले, कविता और गद्य लिखने के लिए प्रोत्साहन मिले, प्रेरणा मिले ताकि वे साहित्य सृजन कर सकें। ऑनलाइन व्यंग्य चर्चा का संचालन सृजन के अध्यक्ष नीरव कुमार वर्मा वर्मा ने किया।

सबसे पहले जयप्रकाश झा ने अपनी रचना “सीधा आदमी” सुनाई। जिसमें आज की व्यवस्था में सीधे आदमी की परेशानियाँ, उसके विरोध में स्थितियां आदि का बखान था। मीना गुप्ता ने वर्तमान राजनीति, नेता और पिसते “आम आदमी” को केंद्र में रखकर व्यंग्य कविता प्रस्तुत की। व्यंग्य और कार्टूनों का चोली दामन का साथ है – कथनी और करनी में अंतर और छोटे से बक्से में छपा कार्टून बड़ी बात कह देता है, जो पूरा अखबार नहीं कह पाता, इस बात को रेखांकित करते हुये एल चिरंजीवी राव ने अपना लेख व्यंग्य लेखन और कार्टून में बताया। मधुबाला कुशवाहा ने अपने लेख “मैं बाज़ार” पढ़ा, जिसमें वर्तमान समाज में लोगों की बुद्धि और आदर्श के अभाव में घटती बातों का जिक्र है।

भारती शर्मा के व्यंग्य लेख “ समाज एक दुधारी तलवार” में आज महिलाओं की स्थिति और पुरुष प्रधान समाज की सोच पर करारा कटाक्ष किया। “ हिन्दी कविताओं में व्यंग्य की भूमिका” लेख में रामप्रसाद यादव ने बाबा नागार्जुन से लेकर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की रचनाओं में निहित व्यंग्य पर उदाहरणों और दृष्टांतों सहित विस्तृत लेख पढ़ा। एसवीआर नायुडु ने व्यंग्य कवितायें सुनाईं, जिनमें आज के परिवेश में दोस्ती, रिश्ते और हालातों का खुलासा था। सीमा वर्मा ने महिलाओं की समस्या गैस सिलिन्डर पर व्यंग्य कविता सुनाई “ सातवाँ सिलिन्डर”, जिसमें बढ़ती कीमतों से बिगड़ते गृहिणी के अर्थशास्त्र का वर्णन था। सेलफोन से बदलती मानवीय प्रवृत्ति और स्वार्थपरक गुणों को रेखांकित करती व्यंग्य रचना “बिन सेल फोन सब सून” पढ़ा डॉ टी महादेव राव ने। ग्रामीण राजनीति और उससे जुड़े पुराने बुजुर्ग की व्यंग्यात्मक कथा “ खरबूजों का सम्मान” को नीरव कुमार वर्मा ने प्रस्तुत किया।

अंत में निशिकांत अग्रवाल ने पूरे कार्यक्रम की सार समीक्षा और चर्चा के मुख्य बिन्दुओं पर बात की। उन्होने कहा स्तरीय रचनाएँ और रचनाकारों को सुनने का अच्छा अवसर मिला। आभासी मंच होने के बावजूद रचनाओं ने बांधे रखा और प्रेरित किया साहित्य सृजन के लिए। अच्छा आयोजन रहा। उन्होंने उपस्थित सभी का आभार माना और कहा इस तरह मिलजुल कर हम एक दूसरे की रचनाओं से न केवल सीखते हैं, बल्कि नए सृजन की ओर प्रेरित भी होते हैं। हम सब साहित्य सृजन की ओर अग्रसर हो सभी हमारी प्रतिभा का और सर्जना का सही अर्थ सामने आएगा। इस कार्यक्रम का संयोजन नीरव कुमार वर्मा का था।

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