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उद्धार की प्रतीक्षा में अयोध्या का पौराणिक त्रेता के ठाकुर का असली प्राचीन मंदिर

प्राचीन काल से अयोध्या के त्रेता के ठाकुर के मंदिर का बहुत महत्व रहा है। स्कंद पुराण के वैष्णव खंड के अयोध्या महात्म्य में इस स्थान का उल्लेख किया गया है। आक्रांताओं की बलि चढ़े इस पौराणिक धरोहर को उसके उद्धारकर्ता के रूप में भागीरथ जैसे राजा, राम जैसे उद्धारकर्ता भगवान ,हनुमान और पराशुराम जैसे न्यायप्रिय शक्तिशाली धर्म धुरंधर शक्ति या कृष्ण जैसे कूटनीतिक भगवान या कल्की भगवान जैसे भविष्य के परित्रानाय भगवान की प्रतीक्षा है। काश ! कोई कार सेवा जन्म भूमि जैसे दौर का चल पाता तो इस खंडहर के असली रूप का दर्शन भी हो जाता और पुनरुद्धार भी हो जाता।

मुगल काल में 9 अप्रैल 1669 ईस्वी में औरंगजेब ने फरमान जारी कर मुल्तान, काशी अयोध्या, मथुरा के हिंदू मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाये जाने का आदेश दिया था। यह फारसी भाषा में है। अयोध्या के इस महत्वपूर्ण स्थान को तोड़ कर औरंगजेब के आदेश पर वहां उसके नौरंग शाह नामक एक मस्जिद का निर्माण किया गया। अयोध्या के इतिहास पर प्रामाणिक शोध करने वाले लेखक और अयोध्या के पूर्व आईपीएस अधिकारी आचार्य किशोर कुणाल ने अपनी उसी पुस्तक “अयोध्या रिविजिटेड” के अध्याय आठ पृष्ठ संख्या 239 में इसकी पुष्टि की है। अवध विश्वविद्यालय के इतिहासकार डॉक्टर देशराज उपाध्याय के अनुसार, अंग्रेज इतिहासकार कनिंघम और ए. फ्यूरर, हालैंड के इतिहासकार हंस बेकर ने अपनी पुस्तकों में इसका जिक्र किया है। हंस बेकर सात साल तक आयोध्या आते जाते रहे और इस दौरान उन्होंने अयोध्या में रिसर्च कर इस स्थान का जिक्र अपनी किताब में किया है। इस मस्जिद के खंडहर में छिपे अवशेष इतिहास के पन्नों के साथ दबे पड़े हैं l ये स्थल सैकड़ों साल से वीरान होकर अब खंडहर बन चुका है l लंबे समय से पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए भी यह अवशेष कौतूहल का विषय बना हुआ है।

प्राचीन त्रेतानाथ ठाकुर मंदिर पर बनी नौरंग शाह मस्जिद :-
वर्तमान में राम की पैड़ी अयोध्या में सरयू नदी के तट पर अहिल्याबाई घाट और मंदिर के पश्चिम ओर यह त्रेता के ठाकुर पर एक प्राचीन मंदिर स्थित था । इसके उत्तरी भाग पर हनुमत कृपा धाम ,गोपाल पुस्तकालय और राम दल ट्रस्ट की आफिस है। यह काफी बड़े भूभाग को घेर रखा है ।इसका मुकदमा भी बहुत दिनों से दो सम्प्रदाय के बीच चल रहा है। लगता नही की इसका जल्द उद्धार हो पाएगा। यह बहुत जाग्रत धर्म स्थान रहा।जिसे आक्रांताओं माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान राम सीता, लक्ष्मण, हनुमान, भरत और सुग्रीव सहित कई मूर्तियों को रखा गया था जो प्राचीन समय में काले रेत के पत्थरों से उकेरी गई थीं। इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि यह वही जगह है जहां पर श्री राम ने अश्वमेध यज्ञ किया था। यह मंदिर कार्तिक के पवित्र महीने के एकादशी ग्यारहवें दिन खुलता था। यहां भक्तों की भारी भीड़ भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए यहां आती है। इस स्थान पर एकादशी के दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ रंगारंग समारोह मनाया जाता था जो स्थानीय लोगो के साथ साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुयों और पर्यटकों को अपनी और आकर्षित करता रहा है।

प्राचीनकाल में कन्नौज नरेश राजा जयचंद ने बारहवीं सदी में इस त्रेता के ठाकुर मंदिर का निर्माण कराया था। मुगल शासक औरंगजेब का ही दूसरा नाम नौरंगशाह था। त्रेता के मंदिर को उसी समय ध्वस्त कर मस्जिद नौरंग शाह मस्जिद बनाई गई थी। उसने 1969 ईस्वी में चन्द्रहरि मंदिर को ध्वस्त कर नौरंग शाह मस्जिद बनवाया था। यहां से राजा जयचंद का एक प्रस्तर अभिलेख प्राप्त हुआ था। जो राज्य संग्रहालय लखनऊ में सुरक्षित है। इससे स्पष्ट है कि राजा जयचंद ने त्रेता के ठाकुर मंदिर की स्थापना वही किया था जहां प्रभु श्रीराम ने अश्वमेव यज्ञ किया था।

नौरंग शाह मस्जिद का निर्माण :- प्राचीन मंदिर को मुगलकाल में औरंगजेब ने ध्वस्त कराकर उस स्थान पर नौरंग शाह मस्जिद का निर्माण करा दिया था। इसके बाद इसके बगल में त्रेतानाथ का एक छोटा सा मंदिर बना लिया गया l इसे कालू (कुल्लू हिमाचल प्रदेश) के राजा ने पुराने मंदिर से 50 मीटर दूरी पर त्रेता के ठाकुर के नाम पर दूसरे मंदिर का निर्माण कराया था। इन दावों की पुष्टि फैजाबाद गजेटियर के पृष्ठ संख्या 353, अवध गजेटियर पृष्ठ सात तथा यूरोपीय यात्रियों के प्रतिवेदन से भी होती है। डच इतिहासकार हंशवेकर (अयोध्या पृष्ठ संख्या 53 व 54 ) ने इसके निर्माण की तिथि वर्ष 1670 बताई है। वर्तमान समय में ये प्रतिमा परिसर के कोशल संग्रहालय में संरक्षित की गई है। स्वर्गद्वार मोहल्ले का नाम भी आक्रांताओं ने बदलकर उर्दू बाजार रखा था।फिरभी पुराना नाम भी चला आ रहा है।

त्रेतानाथ का वतर्मान मंदिर हिमाचल प्रदेश के कुल्‍लु के राजा ने बनवाया था, जो लगभग 300 साल पहले से स्‍थापित है। इसे अयोध्‍या में स्वर्गद्वार मोहल्ले के नाम से जाना जाता है। बाद में इस मंदिर को मराठा रानी अहिल्‍या बाई होलकर के द्वारा पुनर्निर्मित करवाया गया था। मंदिर में भगवान श्रीराम और उनकी पत्‍नी सीता माता की मूर्ति है। साथ में उनके छोटे भाई लक्ष्‍मण, भरत, शत्रुघ्‍न, रक्षक जय-विजय, गुरू वशिष्‍ठ, राजा सुग्रीव और भक्‍त हनुमान की भी मूर्ति हैं। माना जाता है कि इस मंदिर की मूर्तियों को पुराने मंदिर से वर्तमान मंदिर में लाया गया है। मंदिर की सभी मूर्तियां एकल काले पत्‍थर की बनी है।

औरंगजेब द्वारा बनवाई गई मस्जिद आज भगनावस्था में है जो अयोध्या के सरयू नदी तट के दृश्य पर दाग नुमा धब्बा है।राम की पौड़ी जैसे महत्व पूर्ण स्थल पर ये देखने में बहुत खटकता है और सारे सौंदर्य पर पानी फेर देता है।

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