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”सबको वैक्सीन लगाओ गैंग” के पीछे के रहस्य

पिछले साल भड़काने के सारे प्रयास करने बाद भी ना तो जनता मोदी के खिलाफ सड़क पर उतरी और ना ही देश में कोरोना संक्रमण बढ़ा .. उलटा देश ने केन्द्र सरकार का पूरा समर्थन किया और PPE Kit, वैन्टीलेटर, हॉस्पिटल , मशीन आदि में खुद को ना सिर्फ आत्मनिर्भर बना लिया बल्कि विदेशों को निर्यात भी करने लगा..

सुलगने वालों के कोढ़ पर खाज़ तब और ज्यादा हो गई जब भारत ने एक नहीं दो-दो सस्ती और विश्वसनीय टीके भी बना दिए और ना सिर्फ बनाए बल्कि पूरी दुनिया में भारत का डंका भी बजा दिया.. भारत की जय होगी तो मोदी की जय अपने आप होगी और इससे कुछ लोगों को जलते तवे पर बैठने की अनुभूति भी होगी ही

तो अब वो “नीच” लोग जनता को भड़काने के लिए एक बेहद भावनात्मक मुद्दा लेकर आए हैं.. इस बार चाल थोड़ी ज्यादा शातिर हैं..

पिछले कुछ दिनों से माँग उठाई जा रही है कि टीकाकरण को हर उम्र के लिए खोल दिया जाए.. यह माँग सुनने में बहुत अच्छी लगती है और भावना में बहकर हर आदमी इसका समर्थन भी करेगा लेकिन इसके पीछे खेल बहुत खतरनाक है.. इंटरनेट पर विभिन्न माध्यमों से भावनात्मक संदेशों के साथ केन्द्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए “पिटीशन” साइन कराए जा रहे हैं कि “टीकाकरण सब उम्र के लिए खोल दिया जाए” .. दिल्ली का महाठग्ग केजरीवाल यह माँग उठाने वाला पहला आदमी था ..

लेकिन यह कोई नहीं बता रहा कि 130 करोड़ की जनता को टीका लगाने के लिए इतने डोज़ कहाँ बनेंगे? और 1 महीने बाद फिंर इतने ही डोज़ चाहिए सैकण्ड फेज़ के लिए.. तो कहाँ बनाओगे इतने डोज़?

सारा खेल ही यही है, अब बड़े आराम से ये नीच धूर्त और आम जनता भी कह देगी कि “अगर इतने डोज़ नहीं बन सकते तो विदेशों को निर्यात क्यों कर रहे हैं?”

समझ में आया खेल? इनको किसी भी तरह भारत और मोदी की बढ़ती साख को रोकना है, और मोहरा हमें बना रहे हैं अपना उल्लू सीधा करने के लिए।

भारत, विदेशों को 2 कारणों से टीका निर्यात कर रहा है.. 1 तो इंटरनैशनल ट्रीटी के कारण जिसमें सारी दुनिया के वैज्ञानिकों ने एक दूसरे को सहयोग करके टीका विकसित करने का वचन दिया था और जो देश भी सबसे पहले टीका बनाएगा वो दूसरे देशों को कोविड से लड़ने में मदद करेगा। भारत सरकार चाह कर भी निर्यात बंद नहीं कर सकती।

2. दूसरा कारण है भारत जैसे बड़े विकासशील देश को चलाने के लिए बहुत ज्यादा पैसे की आवश्यक्ता है.. एक देश जो अपनी 80 करोड़ जनता को एक साल से मुफ्त राशन दे रहा है उसे पैसा चाहिए जोकि वैक्सीन का निर्यात करके बहुत आसानी से मिल सकता है.. भारत किसी को मुफ्त में वैक्सीन नहीं बाँट रहा बल्कि पैसे ले रहा है।

अब मान लीजिए अगर सरकार उम्र की सीमा हटा देती है तो क्या ये धूर्त चुप बैठ जाएंगे? जी नहीं , तब ये एक नया सुर अलापेंगे कि “गरीब आदमी ₹250 की वैक्सीन कैसे लगाएगा? इसे मुफ्त करो” .. सरकार अगर एक वर्ग ( आर्थिक वर्ग) के लिए मुफ्त कर भी दे तो यह कहेंगे कि “बाकियों के साथ अन्याय है” .. 130 करोड़ जनता को मुफ्त टीका लगाना मज़ाक बात है? बड़े-बड़े समृद्ध देश अपनी पूरी जनसंख्या को मुफ्त टीका नहीं दे रहे बल्कि बहुत अधिक मँहगा टीका लगा रहे हैं।

कुल मिलाकर इनका असली उद्देश्य भावनात्मक बातें करके जनता को भड़काना है और किसी भी तरह भारत के बढ़ते साख को रोकना है इसीलिए टीके खराब करके टीकों की कमी का रोना रो रहे हैं।

साथ में एक स्टैट्स दे रहा हूँ जहा भारत बनामअन्य देशों का आंकड़ा है, भारत अपनी संस्कृति और ऋषियों के आशीर्वाद से ( आयुर्वेद व खानपान) के कारण इस स्थिति में है कि हम दूसरों को टीका बेच सकते हैं लेकिन धूर्तों से यह देखा नहीं जा रहा।

सोशल मीडिया पर एक मजाक बहुत चल रहा है कि “चुनाव वाले राज्यों में कोविड नहीं जाता ” मुझे कुछ हद्द तक यह बात/कटाक्ष सही लगने लगा क्योंकि राज्य में मरीज़ो का आँकड़ा राज्य सरकार देती है केन्द्र को.. और राज्य सरकारें तो अपनी सरकार दोबारा बनाने में लगी हैं तो कोविड कैसे जाएगा?

मुझे लगता है पिछले साल राज्य सरकारों ने जमकर “माल” कमाया है कोविड के नाम पर और इसीलिए इस साल भी “फर्जी” आंकड़े दिखाकर मामले को और भड़काने का प्रयास कर रहे हैं वरना ऐसा कैसे हो सकता है कि अचानक उन ही राज्यों में कोरोना बढ़ रहा है जहाँ विपक्ष ( गैर-भाजपा) की सरकारें हैं? महाराष्ट्र, राजस्थान, पञ्जाब, आन्ध्र, गुजराज (भाजपा शासित) कह सकते हैं कि हम आर्थिक रूप से आगे हैं, हमारे यहाँ हर जगह का आदमी आता है इसलिए मामले ज्यादा हैं लेकिन छत्तीसगढ़ ? आधे लोगों को वहाँ की राजधानी नहीं पता होगी और एक अत्यंत पिछड़ा नक्सल प्रभावित प्रदेश है तो वहाँ क्यों इतनी संख्या है? इसका मतलब एक साल से आप केन्द्र से मिली सहायता की बंटर-बाँट कर रहे थे और माल कमा रहे थे?

साभार- https://www.facebook.com/2056713674404845 से

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