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ये हैं मोदीजी के डॉ.नगेंद्र

डॉ. नगेंद्र उन लोगों में से हैं जिनके आगे तमाम उदाहरण फीके पड़ जाते हैं। डॉ. नगेंद्र अपना उदाहरण खुद हैं उनकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती। डॉ. नगेंद्र एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने अपने जीवन का एक-एक क्षण मानवता की सेवा में समर्पित कर दिया है। योग और ध्यान के माध्यम से डॉ. नगेंद्र ने ऐसी चमत्कारिक चिकित्सा पध्दति विकसित की है कि जटिल से जटिल बीमारी भी ठीक हो जाती है।

डॉ. नगेंद्र ऐसे तो मेकेनिकल इंजीनियर में डॉक्टरेट की, लेकिन उन्हें लोहे की मशीनों की इंजीनियरिंग रास नहीं आई और उन्होंने इंसानी शरीर के जटिल तंत्र को स्वस्थ रखने की दिशा में खोज कर ऐसे चमत्कार किए जिनकी दुनिया भर के चिकित्सा विज्ञान में कोई मिसाल नहीं है। डॉ. नगेंद्र नासा में अच्छी भली नौकरी कर रहे थे और उनकी तनख्वाह भी करोड़ो में थी। वे चाहते तो नासा में रहकर खूब नाम और पैसा कमाते मगर एक छोटे से संवाद ने उनकी ज़िंदगी बदल दी तो उन्होंने भी अपने समर्पण और निष्ठा से हजारों लोगों की ज़िंदगी बदल दी। इतिहास कई बार अचानक ही ऐसे अध्याय लिख देता है कि कभी कोई कृष्ण, कभी राम, कभी कोई चरक तो कभी कोई सुश्रुत पैदा हो जाता है। डॉ. नगेंद्र इसी कड़ी में आज के दौर में ऐसे ही विलक्षण व्यक्तित्व के रूप में हमारे बीच मौजूद हैं।

डॉ. नगेंद्र जब अमरीका में नासा में एक वरिष्ठ शोध वैज्ञानिक के रूप में सेवाएँ देने के साथ ही अमरीका के हार्वर्ड विश्वविद्यालय में सलाहकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वहाँ उनकी मुलाकात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के तत्कालीन प्रमुख श्री राजेंद्र सिंह “रज्जू भैया” से हुई और रज्जू भैया ने उनसे कहा -“आप जैसे व्यक्ति की ज़रुरत अमरीका से ज्यादा भारत को है। लेकिन हो सकता है कि भारत में आपको इतना पैसा नहीं मिले, लेकिन अपने देश के लोगों का जो प्यार आपको मिलेगा उसकी तुलना पैसे से नहीं की जा सकती।” रज्जू भैया की इस छोटी सी बात ने डॉ. नगेंद्र को बैचेन कर दिया चौबीस घंटे उनके दिमाग में यही बात घूमती रही, उनकी रातों की नींद हराम हो गई, सोते-बैठते, जागते उठते उन्हें यही लगता रहा कि ये बात इतने सालों से उनके दिमाग में क्यों नहीं आई। उन्होंने बार बार सोचा कि आख़िर मैं नासा तक भी भारत में पढ़ाई करके ही तो पहुँचा हूँ। क्या मुझ पर मेरे देश का कर्ज़ नहीं है? फिर डॉ. नगेंद्र ने फैसला कर ही लिया! वे अमरीका में नासा की प्रतिष्ठित और कमाऊ नौकरी छोड़कर भारत चले आए। यहाँ आकर 1975 में बैंगलुरू में डॉ. नगेंद्र ने विवेकानंद योग रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की। आज यही केंद्र एक डीम्ड यूनिवर्सिटी का रूप ले चुका है।

डॉ. नगेंद्र ने अपने जीवन के तीस वर्ष योग चिकित्सा और शोध को समर्पित कर दिए हैं। डॉ. नगेंद्र की 35 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इंजिनीयरिंग पर डॉ. नगेंद्र ने 35 शोध पत्र लिखे हैं। डॉ. नागेंद्र के मार्गदर्शन में स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्था SVYASA ने आयुर्वेद, योग और भारतीय चिकित्सा पध्दतियों पर अब तक 33 हजार शोध पत्र एकत्र कर लिए हैं।

डॉ. नगेंद्र ने दुनिया भर में स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्था (SVYASA) के केंद्रों की स्थापना की है और ये सभी केंद्र आज विभिन्न प्राकृतिक चिकित्सा केंद्रों जैसे इंडस वैली आयुर्वेद केंद्र मैसूर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ ऐंड न्यूरॉलॉजिकल साईंस ((NIMHANS) बैंगलुरू, हिन्दू यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका, ओर्लेंडो से संबंध्द हैं, जहाँ योग से ठीक होने वाले मरीजों पर लगातार शोध का काम चल रहा है। इंडियन योग इंस्टीट्यूट जो SVYASA की शैक्षणिक शाखा है, ने बैंगलुरू, मैसूर और मैंगलोर विश्वविद्यालय और राजीव गाँधी इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ऐंड साईंस से मान्यता प्राप्त हैं।
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डॉ. नगेंद्र कई भाषाएँ जानते हैं और उन्हें कई राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं। डॉ. नगेंद्र ने 1965 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साईंस से मेकेनिकल इंजिनियरिंग की और 1968 में ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी कनाडा में शोध कार्य किया। 1969 से 1972 के बीच डॉ. नगेंद्र ने नासा सहित कई अमरीकी संस्थानों में अपनी सेवाएँ दी।

अमरीका से भारत आने के बाद डॉ. नगेंद्र के साथ उनकी बहन नागरत्ना ने भी अपना पूरा जीवन योग चिकित्सा के लिए समर्पित कर दिया है। डॉ. नगेंद्र ने 1975 में विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी में निदेशक के रूप में अपनी सेवाएँ दी। यहाँ उन्होंने अपनी बहन नागरत्ना के साथ मिलकर स्वामी विवेकानंद के दर्शन से प्रेरित होकर योग चिकित्सा आधुनिक जीवन में किस तरह उपयोगी हो सकती है उस पर विस्तृत शोध कार्य किया। इस तरह डॉ, नागेंद्र ने स्वामी विवेकानंद के उस दर्शन को व्यावहारिक धरातल पर लाने की पहल की जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व की श्रेष्ठतम विधाओं को पश्चिम की श्रेष्ठतम विधाओं के साथ लाना चाहिए।

इसके बाद बैंगलोर आकर उन्होंने प्रशांति कुटिरम की स्थापना की। जहाँ उन्होंने योग चिकितसा पर शोध पत्र लिखे और उनके शोध पत्र दुनिया भर के प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नलों में प्रकाशित होने लगे। योग थैरेपी डॉ. नगेंद्र के लिखे पर 400 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं और 250 शोध पत्र के लेखन में उन्होंने मार्गदर्शन दिया है। 65 छात्रों ने उनके मार्गदर्शन में योग चिकित्सा पर मास्टर्स की डिग्री हासिल की। 6 छात्रों ने योग पर पीएचडी की। इन उल्लेखनीय उपलब्धियों के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे देश के एक प्रमुखयोग विज्ञान केंद्र के रूप में मान्यता प्रदान की। 2003 में VYASA को डीम्ड यूनिवर्सिटी क मान्यता प्रदान की गई।
आज इस विश्वविद्यालय VYASA से योग विज्ञान पर डिप्लोमा व डॉक्टर की डिग्री के लिए छात्र अध्ययनरत हैं।

डॉ. नगेंद्र SVYASA योगा विश्वविद्यालय के उपकुलपति के साथ ही हिन्दू यूनिवर्सिटी ऑफ अमरीका, ओर्लेडो के मानद् कुलपति हैं।

(लेखक स्वयं डॉ. नगेंद्र के उपचार करा चुके हैं, और उन्हें चमत्कारिक लाभ हुआ है)

डॉ. नगेंद्र के बारे में विस्तार से जानकारी यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं:
Swami Vivekananda Yoga Anusandhana Samsthana
# 19, Eknath Bhavan, Near Gavipuram Circle, K.G. Nagar,
Bangalore – 560 019, India
Ph: 91-80-26612669; Fax: 91-80-26608645
e-mail: [email protected] ; website: www.svyasa.org

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