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पश्चिम रेलवे “मिशन ज़ीरो स्क्रैप” की डगर पर निरंतर अग्रसर

मुंबई। पश्चिम रेलवे निकट भविष्य में “मिशन जीरो स्क्रैप” के तहत सभी रेलवे प्रतिष्ठानों को स्क्रैप मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध होकर हरसम्भव बेहतरीन प्रयास सुनिश्चित कर रही है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019-20 में पश्चिम रेलवे ने स्क्रैप की बिक्री से 533.37 करोड़ रु. का राजस्व हासिल किया, जो भारतीय रेलवे की सभी क्षेत्रीय रेलों में सबसे अधिक रहा। पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री आलोक कंसल के ऊर्जावान नेतृत्व और कुशल मार्गदर्शन में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान भी, पश्चिम रेलवे द्वारा अब तक 230.31 करोड़ रु. के स्क्रैप की बिक्री की जा चुकी है, जो भारतीय रेलवे की सभी क्षेत्रीय रेलों में सबसे अधिक है।

पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी श्री सुमित ठाकुर द्वारा जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ट्रैक, कोच, वैगन, लोकोमोटिव और पुलों के आवधिक रखरखाव से स्क्रैप उत्पन्न होता है। मिशन जीरो स्क्रैप के तहत, स्क्रैप उसकी उत्पत्ति के दो महीने के भीतर बेचा जाता है। यह पश्चिम रेलवे के लिए एक बड़ी उपलब्धि है कि इसने अपने सभी कारखानों को शत- प्रतिशत जबकि 97% स्टेशनों तथा 65% सेक्शनों और डिपो को इस मिशन के तहत स्क्रैप मुक्त कर दिया है।

श्री ठाकुर ने बताया कि, पश्चिम रेलवे ने शून्य अनुपयोगी संरचना का लक्ष्य रखा है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2020-21 के अंत तक पुराने स्टाफ क्वार्टर, सर्विस बिल्डिंग, पानी की टंकियों को हटाया जाना शामिल है। पश्चिम रेलवे द्वारा इन संरचनाओं को ई-ऑक्शन के माध्यम से यथा स्थिति के आधार पर निपटाने का निर्णय लिया गया है।अब तक, 4000 ऐसी संरचनाऍं 7 करोड़ रु. की उल्लेखनीय कमाई के साथ बेची जा चुकी हैं। इस बिक्री के फलस्वरूप पश्चिम रेलवे द्वारा इन पुरानी अनुपयोगी संरचनाओं की विध्वंस लागत के रूप में लगने वाले 6 करोड़ रु. की बचत भी सुनिश्चित की गई है।

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