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नाजियों की खौफ़नाक दास्तान की एक डायरी जो कई राज़ खोलेगी

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लिखी जर्मन यहूदी लेखिका एना फ्रेंक की डायरी ऑफ अ यंग गर्ल आज भी दुनिया की सबसे चर्चित किताब है। अब एक पोलिश किशोरी रेना स्पीगल की डायरी का प्रकाशन हो रहा है। रेना की हत्या नाजियों ने यहूदी होने के कारण कर दी थी।

पोलिश किशोरी ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पकड़े जाने से पहले तक लिखी थी डायरी
रेना स्पीगल की डायरी को उसके बॉयफ्रेंड ने संभालकर रखा, मां-बहन को अमेरिका में सौंपी
6 दशक के बाद आखिरकार किशोरी लेखिका की डायरी का प्रकाशन होने जा रहा है
एना फ्रेंक की मशहूर डायरी बुक से इस किताब की अभी से हो रही तुलना

वॉशिंगटन । दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लिखी जर्मन यहूदी किशोरी एना फ्रेंक की डायरी ऑफ अ यंग गर्ल आज भी सबसे लोकप्रिय किताबों में से एक है। अब एक यहूदी किशोरी की डायरी मिली है जिसका जल्द प्रकाशन होने जा रहा है। पोलिश यहूदी किशोरी की नाजियों ने उसकी डायरी प्रकाशित होने से पहले ही हत्या कर दी थी। दशकों के इंतजार के बाद अब यह डायरी 19 सितंबर को प्रकाशित होने जा रही है। यह डायरी न्यू यॉर्क की एक बैंक में सुरक्षित रही और अब जल्द प्रकाशित होने वाली है। माना जा रहा है कि इस किशोरी की डायरी की तुलना जर्मन यहूदी लेखिका एना फ्रेंक की डायरी ऑफ अ यंग गर्ल से जरूर होगी।

रेना स्पीगल का जन्म 1924 में साउथ-ईस्ट पोलैंड में हुआ था और उस वक्त पोलैंड पर सोवियत रूस का कब्जा था। 1942 में पोलैंड पर जर्मनी ने अपना कब्जा बना लिया। रेना ने 14 साल की उम्र से लेकर 18 साल तक की उम्र के दौरान युद्ध के साथ अपनी जिंदगी और मनोभाव को डायरी में लिखा। जुलाई 1942 में नाजी सेना ने उसकी हत्या कर दी। रेना की डायरी को युद्ध के दौरान की परिस्थितियों और पीड़ितों की हालत समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डायरी के 700 पन्नों का बहुत जल्द प्रकाशन भी होने जा रहा है।

रेना स्पीगल की डायरी को उसकी मौत के बाद भी बॉयफ्रेंड ने संभालकर रखा। रेना के बॉयफ्रेंड ने डायरी के आखिरी में कुछ पन्ने अपनी तरफ से लिखे जिसमें रेना के पकड़े जाने और हत्या का जिक्र है। डायरी उसने रेनी स्पीलबर्ग की बहन और मां को अमेरिका में सौंप दी जो युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका में बस गए। रेना की मां और बहन के लिए डायरी में दर्ज दर्द के दस्तावेज को पढ़ना मुश्किल था और उन्होंने उसे न्यू यॉर्क के एक बैंक में सुरक्षित रख दिया।

रेना की बहन की बेटी ने सबसे पहले डायरी के प्रकाशन के लिए सोची। 60 साल तक बैंक लॉकर में बंद इस डायरी को रेना की बहन की बेटी ने पहले अंग्रेजी में ट्रांसलेशन कराया और फिर प्रकाशकों तक पहुंचाया। प्रकाशकों का कहना है कि किशोर उम्र में ही स्पीलबर्ग ने चीजों को बहुत बारीके से समझा और इसे बहुत संवेदनशीलता के साथ लिखा।

साभार- टाईम्स ऑफ इंडिया से

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