जामनगर, आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान तथा आयुष क्षेत्र की प्रथम राष्ट्रीय महत्व की संस्था, इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (ITRA), जामनगर का छठा स्थापना दिवस ‘आयुटेक नवोन्मेष 2026’ के अंतर्गत आयोजित ‘AI और आयुर्वेद’ विषयक राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न हुआ। इस अवसर पर आयुर्वेद और आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकी के समन्वय, अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका तथा स्वास्थ्य सेवाओं में इसके जिम्मेदार उपयोग की संभावनाओं पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद की समृद्ध पारंपरिक ज्ञान परंपरा को आधुनिक डिजिटल प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर अनुसंधान, नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई संभावनाओं को प्रोत्साहित करना रहा। सम्मेलन में आयुर्वेद के विद्वानों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने सहभागिता की और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभावी, नैतिक एवं वैज्ञानिक उपयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रत्यक्ष ओर डिजिटल माध्यम से जुड़ कर कुल आयोजित __ सत्रों में हुई चर्चाओ में अपने विचार साझा किए
आयुर्वेद और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के समन्वय पर हुआ मंथन
‘आयुटेक नवोन्मेष 2026’ सम्मेलन के दौरान आयुर्वेदिक औषध अनुसंधान, औषध विकास, गुणवत्ता आश्वासन, नैदानिक परीक्षणों तथा शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित अनुप्रयोगों पर चर्चा की गई। पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान को आधुनिक डेटा-आधारित पद्धतियों के साथ एकीकृत करने, अनुसंधान प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने, नवीन उत्पादों के विकास को प्रोत्साहित करने तथा प्रौद्योगिकी-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने जैसे विषयों पर विशेष बल दिया गया।
ITRA जामनगर के निदेशक प्रो. डॉ. तनुजा नेसरी ने कहा की आयुर्वेद के भविष्य के लिए नवाचार और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ है। ‘आयुटेक नवोन्मेष 2026’ ने पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान और उन्नत प्रौद्योगिकी के बीच संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। सम्मेलन में हुई चर्चाओं ने आयुर्वेदिक अनुसंधान, शिक्षा, औषध विकास और स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के संभावित उपयोग तथा इससे जुड़े नैतिक, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विचार-विमर्श को आगे बढ़ाया।
आयुष मंत्रालय के आयुष ग्रिड विशेष कार्य अधिकारी (OSD) नमन गोयल ने कहा की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मशीन लर्निंग (ML) की मूलभूत अवधारणाओं, उनके अनुप्रयोगों तथा कार्यप्रणाली को शामिल किया गया है। इसमें डेटा संग्रहण, डेटा प्रसंस्करण, मॉडल प्रशिक्षण, परीक्षण और पूर्वानुमान जैसी प्रमुख प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई है। साथ ही, आयुष ग्रिड (Ayush Grid) के अंतर्गत एआई-संचालित चैटबॉट्स तथा प्रमुख डिजिटल उपकरणों को भी प्रदर्शित किया गया है। प्रस्तुति में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और प्रौद्योगिकी-आधारित आयुष सेवाओं को आगे बढ़ाने में इन उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया है।
डब्ल्यूएचओ मुख्यालय में डिजिटल हेल्थ एंड इनोवेशन (DHI) के एआई प्रमुख श्री समीर पुजारी ने ज्ञान के संरक्षण के क्षेत्र में एआई की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2018 से डब्ल्यूएचओ (WHO), अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) और विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) के बीच जारी वैश्विक सहयोग प्रयासों पर भी जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने एआई से जुड़े जोखिमों और चुनौतियों, जिनमें नैतिक पहलू, डेटा गोपनीयता तथा नियामक बाधाएँ शामिल हैं, विशेष रूप से पारंपरिक चिकित्सा के संदर्भ में, पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम से इतर ITRA के चैनल ANCN से बातचीत में पारंपरिक चिकित्सा अनुसंधान, डेटा एवं नवाचार, WHO-GTMC यूनिट प्रमुख डॉ. गीता कृष्णन ने कहा की “कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में आयुर्वेद को बेहतर ढंग से समझने और उसके अनुप्रयोग को अधिक प्रभावी बनाने की अपार संभावनाएँ हैं। हालाँकि, किसी भी नई तकनीक को अपनाने से पहले अपने आयुर्वेद विज्ञान के मूलभूत सिद्धांतों की गहन समझ होना अत्यंत आवश्यक है। एआई को आयुर्वेद के पूरक के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि उसके मूल ज्ञान और प्रज्ञा का स्थान लेना चाहिए। आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का अन्वेषण करते हुए आयुर्वेद की प्रामाणिकता को बनाए रखना, आयुर्वेद जगत की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाकर हम आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों से समझौता किए बिना एआई की संभावनाओं का लाभ उठा सकते हैं। परंपरा और नवाचार के बीच उचित संतुलन स्थापित करना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। ऐसा करके ही हम आयुर्वेद को सार्थक, प्रभावी और सतत रूप से आगे बढ़ा सकते हैं।”
सम्मेलन में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल ज्ञान और वैश्विक परिवर्तन; आयुर्वेद के लिए जिम्मेदार AI, नैतिकता, वैज्ञानिक साक्ष्य और नवाचार; पारंपरिक प्रथाओं से बुद्धिमान स्वास्थ्य सेवाओं तक AI-आधारित आयुर्वेद की संभावनाएँ; तथा आयुर्वेद में नवाचार, उत्पाद विकास और जिम्मेदार नैदानिक परीक्षणों के लिए AI के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र एवं विशेषज्ञ चर्चाएँ आयोजित की गईं।
इन चर्चाओं के माध्यम से आयुर्वेद और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच समन्वय को मजबूत करने, अनुसंधान में डेटा एवं डिजिटल उपकरणों की भूमिका को समझने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से संबंधित नैतिक और वैज्ञानिक चुनौतियों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
सम्मेलन में विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने मुख्य वक्ता और प्रमुख वक्ता के रूप में सहभागिता की। जिसमें शुभदा नागरकर — प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग तथा समन्वयक, सेंटर फॉर पब्लिकेशन एथिक्स (CPE), सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, डॉ. राजीव वासुदेवन — संस्थापक, प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), अपोलो आयुर्वेद हॉस्पिटल्स, बेंगलुरु, डॉ. सुमेर सिंह — एसोसिएट प्रोफेसर, डिजाइन विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), दिल्ली जुड़े थे।
इसी क्रम में आयुर्वेद ओर कृत्रिम बुद्धिमत्ता क्षेत्र से जुड़े अन्य वक्ताओ में डॉ. माकी काजिवारा — तकनीकी अधिकारी, WHO-GTMC, डॉ. गिरीश तिल्लू — प्रधान अन्वेषक—आयुष, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्वास्थ्य विज्ञान विभाग, सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय, डॉ. संदीप काले — सहायक प्रोफेसर, रसशास्त्र एवं विकृति विज्ञान विभाग, आर. ए. पोदार सरकारी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज, मुंबई, डॉ. राजेश्वरी सिंह — वरिष्ठ सलाहकार, डेटा, डिजिटल हेल्थ, एनालिटिक्स एवं AI, स्वास्थ्य प्रणाली प्रभाग, विश्व स्वास्थ्य संगठन, स्विट्जरलैंड, प्रो. (डॉ.) मिताली मुखर्जी — प्रोफेसर, बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग, IIT जोधपुर, डॉ. संतोष दीक्षित — मुख्य डोमेन विशेषज्ञ, हेल्थकेयर एवं लाइफ साइंसेज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, डॉ. गणेश करैखेडे — हेल्थकेयर डोमेन विशेषज्ञ, AI QT ग्रुप, C-DAC, पुणे, डॉ. बाला पेसला — संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO), Ayur.AI भी सामील हुए थे।
विशेषज्ञों के व्याख्यानों और चर्चाओं ने आयुर्वेद में डिजिटल नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता, वैज्ञानिक प्रमाणों की महत्ता तथा स्वास्थ्य सेवाओं में उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार उपयोग से संबंधित विभिन्न दृष्टिकोणों को सामने रखा।
छठे स्थापना दिवस के अंतर्गत रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (MoUs) एवं सहयोगात्मक पहलों, विशेषज्ञ व्याख्यानों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आयुर्वेद के विभिन्न अनुप्रयोगों पर चर्चाओं तथा संस्थागत सम्मान एवं पुरस्कारों से संबंधित कार्यक्रमों को शामिल किया गया। इन गतिविधियों के माध्यम से शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान सहयोग और नवाचार को प्रोत्साहित करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।




