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सामाजिक बदलाव की एक अभिनव पहल बैंगलुरू में

नेक्सस इनक्यूबेटर से प्रशिक्षित लेट्सएंडॉर्स सामाजिक नवप्रवर्तनों के लिए नेटवर्किंग मंच उपलब्ध कराता है, जहां वे अन्य लोगों से जुड़कर समुदायों को लाभ पहुंचा सकते हैं।

नवप्रवर्तन से जुड़ा हर व्यक्ति उद्यमी नहीं होता। इसी तरह से हर उद्यमी नवप्रवर्तक नहीं होता। इसी विचार के साथ लेट्सएंडॉर्स को शुरू करने की प्रेरणा मिली, जो सामाजिक नवप्रवर्तन से जुड़े लोगों को ज़मीनी संगठनों, कंपनियों, सरकारी निकायों और दूसरे लोगों से जोड़ने के लिए एक मंच की तरह है। इस तरह के संपर्क बेहद प्रभावी और उपयुक्त सामाजिक नवप्रवर्तनों और समाधानों को उन समुदायों के आखिरी छोर तक ले जाते हैं जिन्हें इनकी सबसे अधिक आवश्यकता है।

वर्ष 2015 से बेंगलुरु से संचालित यह कंपनी ऐसे मार्केट नेटवर्क मंच की तरह काम कर रही है जिससे कि सामाजिक नवप्रवर्तनों के बारे में वे लोग जान सकें जिन्हें इसकी आवश्यकता है। सामाजिक बदलाव लाने की प्रक्रिया के तहत यहकंपनी कार्य संचालन, वित्तीय क्षमता और साथ ही पारदर्शिता के लिए तकनीकी मंच और उपकरण उपलब्ध कराती है। लेट्सएंडॉर्स को नई दिल्ली स्थित अमेरिकन सेंटर में नेक्सस इनक्यूबेटर स्टार्ट-अप हब से प्रशिक्षण मिला है।

लेट्सएंडॉर्स की सह-संस्थापक मोनिका शुक्ला के साथ कंपनी के प्लेटफ़ॉर्म और उद्देश्यों के बारे में इंटरव्यू के प्रमुख अंश:

क्या आप हमें लेट्सएंडॉर्स और इसके काम के बारे में बता सकती हैं?
लेट्सएंडॉर्स 40 से भी अधिक देशों के व्यावहारिक सामाजिक नवप्रवर्तनों का एक मार्केट नेटवर्क है। हमारे नेटवर्क में दो हज़ार से अधिक ज़मीनी स्तर पर काम करने वाले सामुदायिक संगठन हैं और इस काम में मदद के लिए फंडिंग देने वाले, वॉलंटियर और बिना मेहनताना लिए काम करने वाले कामगार हैं।

हमने लेट्सएंडॉर्स को समाधान मुहैया कराने वाले प्लेटफॉर्म की तरह बनाया। विचार था कि उपयुक्त और नवप्रवर्तित समाधानों को आखिरी छोर तक पहुंचाया जाए। यह प्लेटफ़ॉर्म गैरसरकारी संगठनों द्वारा प्रतिनिधित्व होने वाले समुदायों, सामाजिक नवप्रवर्तकों, व्यक्तियों और सांस्थानिक फंडिंग देने वालों को एकसाथ लाता है। यह खोज, खाका बनाने, व्यावहारिकता को जांचना, फंड जुटाना, और समाधान को प्रयोग में लाने की प्रक्रिया के पूरे जीवनचक्र पर निगरानी का काम करने में सक्षम बनाता है। हमने पिछले साढे़ चार साल में 350 से भी अधिक मामलों में समाधान केंद्रित पहल की है।

लेट्सएंडॉर्स का आइडिया किस तरह से पूरी तरह अस्तित्व में आया?
लेट्सएंडॉर्स का मानना है कि यदि समाधानों तक पहुंच और उनके खर्च को वहन करने की समस्या हल हो जाए तो लोगों को उनकी ज़ररूतों को पूरी करने के लिए सशक्त बनाने और इसके रास्ते में आने वाली बड़ी बाधाएं हटा सकते हैं। मैं वर्ष 2012 में मास्टर्स कोर्स के दौरान वरुण कश्यप से मिली, जो कंपनी के सह-संस्थापक हैं। हमने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ कई हैसियतों में काम किया है और हम इस बात को समझते थे कि सामाजिक मसलों के अच्छे तैयार समाधान नहीं मिल रहे थे और ज़रूरतमंद लोगों की मदद नहीं हो पा रही थी।

यदि किसी नवप्रवर्तन समाधान को हासिल करने के लिए संबंधित समुदाय खर्च न दे पाए तो फंडिंग की खाई को भरने के लिए मार्केट मंच पर लोकोपकारी, पारिवारिक, कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व और स्थानीय प्रशासन जैसे फंड प्रदान करने वाले लोग होने चाहिएं, जो ऐसी समाधान-केंद्रित पहलों को गति देते हैं।

कृपया हमें बताएं कि लेट्सएंडॉर्स कोविड-19 की चुनौती का जवाब किस तरह से दे रहा है?
हमने महाराष्ट्र राज्य नवप्रवर्तन सोसायटी के साथ मिलकर एक तकनीकी प्लेटफ़ॉर्म आपूर्ति तैयार किया और उसका शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य था अस्पतालों में सामान की सप्लाई में कमी के बारे में तुरंत जानकारी देना और इस कमी को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयास करना। यह देखते हुए कि ज्यादातर राज्यों में जन स्वास्थ्य की मूलभूत सुविधाएं अपर्याप्त हैं, इसलिए इस बात की आवश्यकता है कि चिकित्सा सामग्री की पारदर्शी आवाजाही हो, धन जुटाने से लेकर तथा आवंटन के ऑर्डर और सामान भेजने तक। इस मसले का हमारा समाधान है आपूर्ति।

इसके अलावा पिछले कुछ महीनों से हम भारत के आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों को स्वरोज़गार के जरिये आत्मनिर्भर बनाने पर काम कर रहे हैं। हमने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, उड़ीसा और तेलंगाना के 108 जिलों में दस हज़ार अति लघु, लघु और मध्यम दज़र्े के उपक्रम लगाने में मदद करने के लिए भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के साथ व्यापक काम किया है। कोविड संक्रमण की परिस्थितियों के बाद के भारत में शहरों से गांवों और छोटे कस्बों की ओर लौटने वाले बहुत-से लोगों के लिए आजीविका को लेकर अनिश्चितता रहेगी और रोज़गार के अवसरों का बनना धीमा हो जाएगा। प्रोजेक्ट उद्यमिता के जरिये हमारा उद्देश्य पूरे भारत में नैनो और माइक्रो स्तर पर उद्यमिता को तेज़ी से बढ़ावा देना है। पूरे मिशन के हिस्से के तौर पर हम सैंकडों आकांक्षी युवाओं की पहचान कर, उन्हें निखार कर ठोस कारोबारी मॉडल के जरिये स्वरोज़गार में लगाएंगे। हम अगले 24 महीनों में एक लाख लोगों को आत्मनिर्भर बनाने के लक्ष्य के लिए राज्य के प्रशासकों, नागरिक सामाजिक संगठनों और कॉरपोरेट भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं।

इसके अलावा हमने कई ज़मीनी गैरसरकारी संगठनों के साथ नज़दीकी काम किया है और उनके लिए प्रभावी संचार रणनीतियां बनाई हैं और उनके काम के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को अंजाम देने के लिए वचुअर्ल वॉलंटियर भर्ती किए हैं।

अलग-अलग तरह के उद्योगों में विश्व स्तर पर काम करने के बाद आपने सर्वाधिक प्रभावकारी संगठनों में क्या समानताएं देखीं?
समानता इस बात को लेकर होती है कि वे समस्या को उसके संपूर्ण स्वरूप में देखते हैं और ऐसा शोध, संगठन को चुस्त रखते हुए, समुदाय केंद्रित समाधानों की जांच, सदाजीविता खाका होना, लाभार्थियों को अपने ग्राहकों में बदलने की दृष्टि रखना और हमेशा के लिए अनुदानों पर निर्भर नहीं रहकर होता है। अपने लक्ष्य के प्रति दृष्टि रखना और प्रभाव-पहले वाले संगठन के तौर पर खरे उतरना, कुछ अन्य ऐसी चीज़ें हैं जो ऐसे संगठनों में समान तौर पर पाई जाती हैं।

नेक्सस इनक्यूबेटर में प्रशिक्षण से आपको सबसे बड़ा क्या लाभ मिला?
नेक्सस प्रोग्राम के कई उल्लेखनीय पहलू जो स्पष्ट रूप से उभर कर सामने आते हैं और हमें गाइड करते हैं: पहला, ‘‘बिल्डिंग से बाहर जाओ’’ अभ्यास, जो कि आवश्यक रूप से अपने आइडिया और समाधान को वास्तविक लोगों के बीच जांचने और परखने के लिए है। दूसरा, अपने आइडिया और काम को स्पष्ट तौर पर प्रस्तुत करना, यानी विभिन्न लोगों के सामने अपने काम को प्रभावी तौर पर रखना। इसमें दर्शकों या श्रोताओं की दिलचस्पी का आकलन भी शामिल है कि कौनसी चीज़ से उनका जुड़ाव बनेगा और उन पहलुओं पर फोकस करना।

आप सामाजिक उद्यमियों के लिए निकट भविष्य में सबसे बड़ी चुनौती क्या देखते हैं? ‘‘इंपैक्ट इकोसिस्टम’’ किस तरह से सबसे बेहतर परिणाम हासिल करना संभव करता है?
नवप्रवर्तन की आवश्यकता वाली सबसे बड़ी चुनौतियों में समुदायों की मूल आवश्यकताओं के लिए समाधान देना, इसमें पीने के पानी तक पहुंच सुनिश्चित करना, अच्छा आवास मुहैया कराना, पौष्टिक आहार, साफ हवा, कृषि से अधिकतम उत्पादकता, सामाजिक एवं आर्थिक बराबरी और आपदाओं से बचाव शामिल हैं। ‘‘इंपैक्ट इकोसिस्टम’’ से अधिकतम लाभ तब मिल सकता है जब प्रयासों में तालमेल हो, जब संभावनाओं से भरे समाधानों को पर्याप्त संसाधन मिलें कि उन्हें विस्तार दिया जा सके और ‘‘इंपैक्ट कैपिटल’’ को समस्याओं के प्रभावी समाधान के लिए दिशा दी जाए।

क्या आप उन्हें कोई सलाह देंगी जो सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में अधिक सक्रिय होने में दिलचस्पी रखते हैं?

लोगों की समस्याओं को हल करने में सालों लगेंगे। धैर्य बनाए रखने और लगातार ऊर्जावान बने रहने के लिए हम उद्यमियों को सलाह देते हैं कि ऐसी समस्याओं पर काम करें जिनसे उनका नाता अधिक हो। यदि वे लोगों के लिए मूल्य निर्माण कर पाएं तो वे अपने लिए भी मूल्य निर्माण कर पाएंगे। कुछ चीज़ें हैं जो हम सोचते हैं कि अपने शुरुआती दिनों में हम अपने से कह पाते! यह कि शोध और अपना सहज ज्ञान, समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। चीज़ों को बड़े पैमाने पर करने और सदाजीविता पर विचार करो। खुद को लचीला बनाए रखें और अपने जैसे लोगों को तैयार करें, जिनमें आपकी ही तरह समस्याओं को हल करने को लेकर जुनून हो।

जैसन चियांग स्वतंत्र लेखक हैं। वह सिल्वर लेक, लॉस एंजिलीस में रहते हैं।

साभार – https://www.spanmag.com/hi/ से

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