देश में पहली बार डिजिटल जनगणना होगी और पहली बार ही सेल्फ-एन्युमरेशन का विकल्प भी होगा. सेल्फ-एन्युमरेशन एक वेब पोर्टल के जरिए होगा, जिसमें लोग सर्वे से पहले अपनी जानकारी ऑनलाइन दर्ज कर सकेंगे. यह 16 भाषाओं में है.
यह जनगणना 2021 में होनी थी लेकिन कोविड के कारण हो नहीं सकी. अब यह जनगणना हो रही है. लगभग एक साल तक इसका काम चलेगा.
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दो चरणों में होगी जनगणना
2027 की जनगणना दो चरणों में होगी. पहला चरण अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा. इस दौरान हाउस लिस्टिंग का काम किया जाएगा. हाउस लिस्टिंग से 15 दिन पहले तक सेल्फ एन्युमरेशन की सुविधा होगी. इस चरण में मकानों की स्थिति, परिवारों को उपलब्ध सुविाओं और उनके पास उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी.
दूसरा चरण फरवरी 2027 में होगा. इस चरण में लोगों की गिनती होगी. इस दौरान लोगों की संख्या, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, प्रवास से जुड़ी जानकारियां जुटाई जाएंगी. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में यह चरण सितंबर 2026 से ही शुरू हो जाएगा. इस चरण में जातियों की गिनती भी की जाएगी.
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सेल्फ-एन्युमरेशन में क्या होगा?
2027 की जनगणना को डिजिटल रूप से किया जाएगा. एन्युमरेटर मोबाइल ऐप के जरिए अपने स्मार्टफोन से सीधे डेटा जुटाएंगे. दोनों चरणों में सेल्फ-एन्युमरेशन की सुविधा होगा.
सेल्फ-एन्युमरेशन के लिए लोगों को अपने मोबाइल नंबर और दूसरी डिटेल से पोर्टल में लॉग-इन करना होगा और अपना फॉर्म भरना होगा. फॉर्म सबमिट होने के बाद एक सेल्फ-एन्युमरेशन आईडी (SE ID) मिलेगी, जिसे एन्युमरेटर के साथ साझा करना होगा.
इस पोर्टल का फायदा ये होगा कि लोगों को एन्युमरेटर के आने से पहले ही अपनी सुविधा के हिसाब से जानकारी भरने की स्वतंत्रता मिलेगी. पहले की ही तरह एन्युमरेटर अपने आवंटित ब्लॉक में घर-घर जाकर गिनती करेंगे, जबकि सेल्फ-एन्युमरेशन इस बार अलग सुविधा के रूप में दी गई है.
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जनगणना में कितना खर्च होगा?
सरकार ने 2027 की जनगणना के लिए 11,718.24 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. इसमें एन्युमरेटर्स के लिए मानदेय, ट्रेनिंग का खर्च, आईटी ढांचा और लॉजिस्टिक के लिए प्रावधान किया गया है.





