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आयोग में अभिलेख संधारण में सुधार हेतु

1. प्रार्थी ने दिनांक 16.10.13 को आयोग के जन सूचना अधिकारी को आवेदन कर �कतिपय सूचना की मांग की थी| किन्तु प्रत्यर्थी -पंकज श्रेयस्कर के पत्र दिनांक 20.11.13 द्वारा कोई भी सूचना देने से छद्म आधार पर इन्कार कर दिया है| 

2. प्रत्यर्थी/अपचारी ने यह कहते हुए समस्त सूचना से इन्कार किया है कि आयोग के डाटाबेस में कुछ तकनीकी खामी के कारण वांछित सूचना दिया जाना संभव नहीं है जबकि समस्त रिकार्ड को अद्यतन रखना लोक प्राधिकारी का दायित्व है और ऐसे किसी अनुचित आधार को अधिनियम में मान्यता नहीं है| 

3. अपीलार्थी ने मात्र बिंदु संख्या 7 में कम्प्यूटर में संधारित सूचना मांगी है, शेष सूचना का किसी प्रकार से डाटाबेस से कोई सम्बन्ध नहीं है| बिंदु 7 में भी प्रार्थी ने मात्र “आयोग के सचिव व उनके सहायक/स्टेनो के पास संधारित कम्प्यूटर” से सम्बंधित सूचना ही मांगी है और प्रत्यर्थी ने अपने प्रत्युतर में यह नहीं कहा है कि उक्त कम्प्यूटरों के डाटाबेस में खामी है| अत: प्रत्यर्थी ने जानबूझकर और बनावटी आधार पर सूचना तक प्रार्थी की पहुँच से मना किया है| 

4. संख्या 7 के अतिरिक्त समस्त सूचना कंप्यूटर के अलावा भौतिक/मुद्रित/अन्य इलेक्ट्रोनिक रूप में मौजूद है जिसका कंप्यूटर डाटाबेस से कोई सम्बन्ध नहीं है और दी जा सकती है| बिंदु संख्या 4 व 5 की प्रतियां तो स्वयं प्रार्थी ने आवेदन के साथ उपलब्ध करवाई हैं ऐसी स्थिति में इन पर जवाब नहीं देने का कोई न्यायोचित कारण स्थापित नहीं हो सकता|

5.आयोग, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत है अत: विभाग से आयोग में सैंकड़ों पत्र प्रति वर्ष प्राप्त होते हैं जिनमें प्रशासनिक स्वीकृतियां, निर्देश, शिकायतें आदि शामिल हैं किन्तु आयोग की डायरी के अवलोकन से परिलक्षित होता है कि विभाग से आने वाले चुनिन्दा पत्राचार को सुविधानुसार ही इस डायरी में दर्ज किया जाता है| विभाग से आने वाले वर्ष 2013 में मात्र 41 व 2012 में मात्र 6 दर्ज पत्रों को देखते हुए एक आम नागरिक को भी विश्वास नहीं हो सकता कि विभाग से आने वाले समस्त पत्रों को आयोग में दर्ज भी किया जाता होगा जबकि वर्ष 2013 में विभाग द्वारा आयोग को लिखे गए 5 से ज्यादा पत्रों की प्रतियां तो स्वयं प्रार्थी के ही पास हैं जिन्हें आयोग के रिकार्ड में दर्ज तक नहीं किया गया है| 

6.आयोग की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां हैं और आयोग में कुछ दुश्चरित्र सक्रिय हैं जो उक्त पैरा 5 में वर्णित भूमिका निभा रहे हैं| मैंने अपने आवेदन के बिंदु 2 से 5 में भी शिकायतों पर की गयी कार्यवाहियों की सूचना चाही है जो इसी अनुचित आधार पर मना की गयी है| ऐसा प्रतीत होता है कि विभाग से प्राप्त समस्त शिकायती पत्रों को या तो आयोग में दर्ज ही नहीं किया जाता या गायब कर दिया जाता है और कार्यवाही को दबा दिया जाता है| वास्तव में आयोग के डाटाबेस में खामी की बजाय रिकार्ड में जानबूझकर हेराफेरी की ज्यादा संभावना परिलक्षित होती है| परिणामत: पारदर्शिता के अभाव में आयोग स्वयम अस्वच्छता के संक्रमण का �केंद्र बन गया है- डाक्टर खुद बीमार है |
अत: निवेदन है कि आयोग की कार्यप्रणाली �में वांछित सुधार किये जाएँ और दोषी लोगों को चिन्हित कर उन्हें स्थानांतरित कर बाद में दण्डित किया जाए अन्यथा आयोग में रहते हुए वे निष्पक्ष जांच भी संपन्न नहीं होने देंगे|

संपर्क
मनीराम शर्मा 
अध्यक्ष, इंडियन नेशनल बार एसोसिएशन ( चुरू जिला),
नकुल निवास, रोडवेज डिपो के पीछे
सरदारशहर 331 403-7 जिला-चूरू (राज.)
ई-मेल [email protected] 

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