सेवा में,
संयुक्त सचिव,
राजभाषा विभाग,
गृह मंत्रालय, भारत सरकार,
नई दिल्ली।
विषय: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केमाशिबो) द्वारा राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३) तथा राजभाषा नियम, १९७६ के नियम ११ के सतत उल्लंघन एवं अंग्रेजी थोपे जाने के विरुद्ध औपचारिक शिकायत।
महोदय,
अत्यंत सम्मानपूर्वक इस शिकायती पत्र के माध्यम से आपका ध्यान केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (केमाशिबो) द्वारा किए जा रहे भाषाई भेदभाव तथा राजभाषा नीति के खुले उल्लंघन की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ।
१. विधिक प्रावधान
राजभाषा अधिनियम, १९६३ की धारा ३(३): इस धारा के अंतर्गत आने वाले सभी दस्तावेज — संकल्प, सामान्य आदेश, नियम, अधिसूचना, प्रशासनिक अथवा अन्य प्रतिवेदन, प्रेस विज्ञप्ति, संविदा, करार, अनुज्ञप्ति, अनुज्ञापत्र, निविदा सूचना तथा निविदा प्रपत्र — हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ, एक ही समय पर, द्विभाषी (डिगलॉट) स्वरूप में जारी किए जाने अनिवार्य हैं। पहले केवल अंग्रेजी में प्रकाशित कर बाद में हिन्दी अनुवाद संलग्न करने की कोई वैधानिक छूट अधिनियम में नहीं दी गई है।
राजभाषा नियम, १९७६ का नियम ११: इस नियम के अनुसार प्रपत्र, प्रमाण-पत्र, आवेदन-पत्र, स्टेशनरी की मदें, पोस्टर, बैनर, ई-फॉर्म, डिजिटल फॉर्म तथा वेब फॉर्म भी हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ तैयार किया जाना अनिवार्य है। केवल अंग्रेजी में तैयार व प्रकाशित ऐसे प्रारूप, फॉर्म व आवेदन नियमानुसार अस्वीकार्य हैं। बोर्ड द्वारा परीक्षा-प्रवेश पत्र, ऑनलाइन आवेदन व अंक सूचियों के प्ररूप केवल अंग्रेजी में तैयार किये जाते हैं।
उपरोक्त वैधानिक प्रावधानों के विपरीत, केवल जून-जुलाई -अगस्त २०२६ के तीनों महीनों में केमाशिबो द्वारा जारी किए गए सभी परिपत्र एवं प्रेस विज्ञप्तियाँ केवल अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किए गए हैं। प्रमाण आप बोर्ड की वेबसाइट https://www.cbse.gov.in/cbsenew/cbse.html, https://cbseacademic.nic.in/circulars_archive.html,
https://www.cbse.gov.in/cbsenew/misc.html, https://www.cbse.gov.in/cbsenew/press.html, https://www.cbse.gov.in/cbsenew/examination_Circular.html, https://training.cbseit.in/ET/frmlisting, और https://saras.cbse.gov.in/SARAS/Home/Information पर देख सकते हैं।
जो कि नियम ११ की भावना और धारा ३(३) की अनिवार्यता, दोनों का उल्लंघन है। यह स्थिति एक आकस्मिक चूक नहीं, अपितु राजभाषा नीति के प्रति बोर्ड की सतत एवं व्यवस्थागत उपेक्षा को दर्शाती है, जो दंडनीय प्रशासनिक लापरवाही की श्रेणी में आती है।
अतः आपसे सविनय अनुरोध है कि उपर्युक्त विषय का गंभीरतापूर्वक संज्ञान लेते हुए —
● बोर्ड को तत्काल प्रभाव से निर्देशित किया जाए कि भविष्य में जारी होने वाले समस्त परिपत्र, आदेश, प्रेस विज्ञप्ति एवं सार्वजनिक सूचनाएँ हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में एक साथ (द्विभाषी स्वरूप में) ही प्रकाशित की जाएँ;
● जब तक हिन्दी अनुवाद तैयार न हो, तब तक संबंधित दस्तावेज जारी न किए जाने की व्यवस्था लागू कराई जाए; तथा
● इस शिकायत पर की गई कार्रवाई से प्रार्थी को सूचित किया जाए।
आशा है कि आप इस विषय को समुचित गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करेंगे, जिसके लिए मैं सदैव आभारी रहूँगा।
भवदीय,
बृजेश कुमार तिवारी
ग्राम - पिपरी, ग्राम - पंचायत घुघुरी,
डाकघर - देवतालाब, तहसील व जिला मऊगंज (मध्य प्रदेश)
पिनकोड - 486341
प्रतिलिपि:
माननीय गृह मंत्री।
संयुक्त सचिव, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार।
सचिव, संसदीय राजभाषा समिति, नई दिल्ली।

