सेवा में,
संयुक्त सचिव,
राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय,
भारत सरकार, नई दिल्ली।
 
 
विषय: बौद्धिक संपदा कार्यालय ( कार्यालय महानियंत्रक, एकस्व, अभिकल्प व व्यापार चिह्न) द्वारा राजभाषा अधिनियम और नियमों का उल्लंघन तथा हिन्दी भाषा के प्रयोग पर अघोषित रोक व राजभाषा अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन न करने एवं आम जनता से भाषाई भेदभाव करने के संबंध में गंभीर शिकायत।
 
महोदय,
भारत सरकार के अन्य विभागों की भाँति बौद्धिक संपदा कार्यालय ने आज तक भारत की आम जनता को नीतिगत मामलों पर सुझाव भेजने का कोई भी अवसर प्रदान नहीं किया है और सुझाव माँगने का केवल ढोंग किया जाता है। 
 
  • पिछले 20 वर्षों में इस कार्यालय ने एक भी सार्वजनिक सूचना, परिपत्र या भर्ती सूचना भारत की राजभाषा में जारी नहीं की है। 
  • जो भी नई नीति या नियम बनते हैं, उनका प्रारूप केवल अंग्रेजी में जारी किया जाता है ताकि देश के आम नागरिक कभी भी इस विधायी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया में भाग न ले सकें।
  • इस कार्यालय ने ऑनलाइन शिकायतों और सुझावों के लिए जो ओपन हाउस पोर्टल https://iprsearch.ipindia.gov.in/openhousehelpdesk/Login/login बनाया है, वह पूरी तरह से अंग्रेजी में है और उस पर राजभाषा हिन्दी में शिकायत दर्ज करने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। यह विभाग भाषाई भेदभाव करने में अन्य सभी विभागों से आगे निकल चुका है। यहाँ भर्ती सूचनाओं, विज्ञापनों और चयन प्रक्रियाओं में अंग्रेजी के आधार पर भेदभाव अपनी चरम सीमा पर है। 
  • इस विभाग के अंग्रेजी के वर्चस्व वाले अधिकारियों ने राजभाषा के अनिवार्य अनुपालन तथा ऑनलाइन सेवाओं में द्विभाषी प्रारूपों के उपयोग पर पूरी तरह अघोषित रोक लगा रखी है।
  • विभाग की वेबसाइट सभी पीडीएफ फाइलें केवल अंग्रेजी भाषा की अपलोड की जा रही हैं और एक भी पीडीएफ फाइल नियमानुसार द्विभाषी प्रारूप में अपलोड नहीं किया गया है क्योंकि विभाग द्वारा राजभाषा अधि. का 100 प्रतिशत उल्लंघन किया जाता है तो अपलोड कैसे करेंगे?
  • इसका ताज़ा उदाहरण व्यापार-चिह्न कार्यालय (ट्रेड मार्क) द्वारा हाल ही में जारी किया गया वह सार्वजनिक सूचना है, जिसमें 'Revised Draft Manual of the Trade Marks Office (Practice & Procedure)' पर हितधारकों से टिप्पणियाँ/सुझाव मांगे गए हैं। यह नोटिस सोची-समझी साजिश के तहत केवल अंग्रेजी में जारी किया गया है ताकि देश के 95 प्रतिशत अंग्रेजी न जानने वाले नागरिक इस सुझाव प्रक्रिया से बाहर ही रहें, यह भारत के संविधान का भी गंभीर उल्लंघन है।
  • वर्ष 1997 में द्विभाषी वेबसाइट का आदेश जारी हुआ था जिसका उल्लंघन यह कार्यालय 2026 तक करता रहा और हिन्दी वेबसाइट कभी बनाई ही नहीं थी। गत 1-2 वर्षों की जनता की शिकायतों के बाद वेबसाइट पर बकवास व अनर्गल अनुवाद करने वाला भाषिणी एआई टूल जोड़ दिया है जिसका अनुवाद एकदम निम्न स्तर का है और हिन्दी का विकल्प ड्राप-डाउन सूची में 8वें स्थान पर रखा गया है जो अपने आप में हिन्दी-घृणा का निंदनीय उदाहरण है। 2 जुलाई 2008 के राष्ट्रपति जी ने भी द्विभाषी वेबसाइट बनाने का आदेश दिया था, यह कार्यालय आज भी उस आदेश की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और विभाग हिन्दी वेबसाइट बनाने के लिए आज भी तैयार नहीं है।
  • उदाहरण-  शासकीय अवकाश को छोड़कर को (सरकार को छोड़कर। छुट्टियाँ) लिखा है, सामान्य प्रश्नों को अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न लिखा है, क्र. सं. को एस. नो लिखा है, कौन क्या है (अधिकारी परिचय) को कौन है लिखा है, होमपेज को घर लिखा है, यह केवल उदाहरण हैं, सूची बहुत लंबी है। यह सब होते हुए भी विभाग राजभाषा अधिकारी व अनुवादक मस्त मौज कर रहे हैं और अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं, विभाग में हो रहे लगातार राजभाषा उल्लंघनों के लिए तो इनका वेतन काटा जाना चाहिए।
 
अतः आपसे अनुरोध है कि इस गंभीर मामले का संज्ञान लेते हुए बौद्धिक संपदा कार्यालय को यह निर्देश जारी किए जाएं कि:
 
  1. सभी नीतियाँ, नियम, सार्वजनिक सूचनाएं और भर्ती विज्ञापन अनिवार्य रूप से द्विभाषी (डिगलॉट) रूप में जारी किए जाएँ।
  2. ऑनलाइन पोर्टल्स और शिकायतों के मंचों को भी तुरंत द्विभाषी (डिगलॉट) बनाया जाए और हिन्दी में दर्ज करने की सुविधा प्रदान की जाए।
  3. ट्रेडमार्क कार्यालय के इस संशोधित मसौदे (Draft Manual) को द्विभाषी रूप में (हिन्दी-अंग्रेजी में एकसारथ) जारी करते हुए सुझाव भेजने की समय-सीमा बढ़ाई जाए, ताकि देश के अंग्रेजी न जानने वाले 95 प्रतिशत नागरिक भी इसमें भाग ले सकें।
  4. वेबसाइट https://ipindia.gov.in/ को मूल रूप से हिन्दी में खोला जाए और हिन्दी को स्रोत भाषा (मूल भाषा) बनाया जाए, उसे प्राथमिकता दी जाए और हिन्दी के लिए भाषिणी टूल का प्रयोग तुंरत रोका जाए, विभाग में बैठे सरकार से वेतन लेने वाले राजभाषा अधिकारियों को राजभाषा विभाग द्वारा विकसित स्मृति आधारित भारती https://bharati.rajbhasha.gov.in/ का उपयोग करके वेबसाइट को मूल रूप से हिन्दी वेबसाइट बनाई जाए और सभी दस्तावोजों को इसी का उपयोग करके द्विभाषी रूप में जारी करने की व्यवस्था की जाए।
  5. ऑनलाइन आवेदन के पोर्टल https://ipindia.gov.in/resource-links/e-gateways-resources के सभी फार्मों, लॉगिन सुविधा को नियम 11 के अनुसार द्विभाषी रूप में शुरू किया जाए।
 
आपके द्वारा त्वरित व वास्तविक कार्यवाही की अपेक्षा है।
 
भवदीय,
बृजेश कुमार तिवारी

ग्राम - पिपरी, ग्राम - पंचायत घुघुरी,

डाकघर - देवतालाब, तहसील - मऊगंज

जिला मऊगंज (मध्य प्रदेश)

पिनकोड - 486341

प्रतिलिपि:


  1. माननीय केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार।
  2. सचिव, संसदीय राजभाषा समिति।