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विदेश मंत्रालय में राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का निरन्तर उल्लंघन

माननीय सुषमा स्वराज जी

इस सम्बन्ध में मैं पहले भी कई ईमेल लिख चुकी हूँ, जानकारी में आया है कि अनेक लोग कांसुलर, पारपत्र एवं वीज़ा प्रभाग द्वारा भारत की मूल राजभाषा की घोर और जानबूझकर की जा रही उपेक्षा के बारे में अनेक शिकायतें विदेश मंत्रालय एवं राजभाषा विभाग को लिख चुके हैं परन्तु इस प्रभाग में बैठे अधिकारियों ने जैसे कसम खा रखी है कि हिन्दी में काम नहीं करेंगे तो नहीं करेंगे. हमारी एवं राजभाषा विभाग की चिट्ठियों के उत्तर भी ये लोग देना आवश्यक नहीं समझते हैं. जबसे आपने मंत्रालय का कार्यभार आपने संभाला है तब से मेरी आशा बंधी है कि हिन्दी को विदेश मंत्रालय एवं प्रवासी भारतीय कार्य मंत्रालय में उचित स्थान मिलेगा और जो लोग अंग्रेजी नहीं जानते उन लोगों की बात भी ये दोनों मंत्रालय सुनेंगे. आप लोकसभा चुनावों से पहले और विजयी होने के बाद विदिशा में विराजमान गुरुदेव सुप्रसिद्ध जैनाचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के दर्शन के लिए भी पधारीं थीं. महोदया! पूज्य गुरुदेव का सपना है कि भारत में हिन्दी सहित भारतीय भाषाओं एवं भारत सरकार के कामकाज में हिन्दी को हर स्थान पर प्राथमिकता मिले और अंग्रेजी का वर्चस्व समाप्त हो, यही सपना महात्मा गाँधी एवं देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने देखा था; मैं आशा करती हूँ आप इस दिशा में कुछ ठोस कदम उठाएँगी और इसकी शुरुआत आप अपने दोनों मंत्रालयों से करेंगी.

मेरी शिकायत के मुख्य बिंदु हैं:
(क). पासपोर्ट सेवा का प्रतीक-चिह्न केवल अंग्रेजी में है जबकि नियम द्विभाषीप्रतीक- चिह्न बनाने का है. पिछले चार साल से लोग इसमें सुधार के लिए लिख रहे हैं पर अधिकारी सुनने को तैयार नहीं हैं. वैसे पासपोर्ट के लिए हमारे यहाँ एक श्रेष्ठ शब्द ‘पारपत्र’ है पर हम हर अंग्रेजी की गुलामी में इतने अंधे हैं कि हर बात में नक़ल करने के आदि हैं इसलिए “पारपत्र” शायद दकियानूसी लगता है तभी “पारपत्र सेवा” के बदले “पासपोर्ट सेवा” उधार ले लिया।

(ख). प्रभाग से सारी जन सूचनाएँ, परिपत्र, प्रेस विज्ञप्तियाँ केवल अंग्रेजी में जारी की जाती हैं, प्रभाग की हिन्दी वेबसाइट पर पीडीएफ में सभी फाइलें केवल अंग्रेजी वाली ही हैं. हिन्दी वेबसाइट के मीडिया कोने में सभी विज्ञप्तियाँ केवल अंग्रेजी में हैं. पासपोर्ट अधिनियम, नियम एवं पासपोर्ट सेवा के वीडियो भी पूरी तरह से अंग्रेजी में हैं. यह राजभाषा अधिनियम 1963 की धारा 3 (3) एवं राष्ट्रपति जी के अलग-२ समय पर जारी हुए आदेशों का उल्लंघन है।

(ग). प्रभाग की अंग्रेजी वेबसाइट को प्राथमिकता मिली हुई है. यहाँ छोटी-२ ऑनलाइन सुविधाएँ भी अंग्रेजी में हैं जैसे शुल्क गणक, पासपोर्ट सेवा केंद्र की जानकारी, मुलाक़ात की उपलब्धता की स्थिति, अपना पुलिस थाना पता करें, कॉमन सेंटर की जानकारी आदि-आदि. अभी भी वेबसाइट पर कई पृष्ठ केवल अंग्रेजी में हैं . वेबसाइट का मुखपृष्ठ पूर्णतः द्विभाषी बनवाएँ ताकि नागरिक हिन्दी के प्रति आकर्षित हों और ऑनलाइन सेवाएं द्विभाषी रूप में प्रयोग करना शुरू करें। डिफ़ॉल्ट अंग्रेजी वेबसाइट होने से लोग उसी का अधिक इस्तेमाल करते हैं और ऐसा होने पर अधिकारी कहते हैं कोई हिन्दी वेबसाइट खोलता नहीं है, उस पर ट्रैफिक कम है तो हम किसलिए हिन्दी में सेवाएं दें इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि वेबसाइट द्विभाषी हो और ताकि नागरिकों को राजभाषा हिन्दी के प्रयोग के लिए प्रेरित किया का सके. वेबसाइट द्विभाषी होने से एक लाभ यह होगा कि वह समस्या मिट जाएगी, जैसा अभी होता कि हिन्दी वेबसाइट पर अंग्रेजी फाइलें जोड़ दी जाती हैं, अथवा हिन्दी वेबसाइट को महीनों तक अद्यतित नहीं किया जाता।
(घ). एम-पासपोर्ट नामक मोबाइल अनुप्रयोग (एप्प) में राजभाषा हिन्दी को कोई स्थान नहीं दिया गया. यह हिन्दी का अपमान है. इसमें अविलम्ब हिन्दी को शामिल करवाया जाए.

(ङ). आवेदनों और शपथ आदि के प्रारूप एकसाथ द्विभाषी ना होकर अलग-२ बनाए गए हैं इसलिए प्रचलन में केवल अंग्रेजी वाले प्रपत्र हैं यदि नियमानुसार ये सभी एकसाथ दायें-बायें हिन्दी-अंग्रेजी में तैयार किए जाएँ, छपवाए जाएँ तो हिन्दी का प्रयोग बढ़ेगा.

(च). 2 जुलाई 2008 को संसदीय राजभाषा समिति की आठवीं रिपोर्ट की सिफारिश 73 पर भारत के राष्ट्रपति जी ने आदेश जारी किया था कि विदेश मंत्रालय पासपोर्ट की सभी प्रविष्ठियाँ द्विभाषी रूप में मुद्रित करने की व्यवस्था करे. आज पूरे 6 वर्ष बाद भी विदेश मंत्रालय ने अब तक एक भी पासपोर्ट द्विभाषी प्रविष्टियों के साथ जारी नहीं किया है. कृपया निदेश जारी करें कि प्रभाग अपने वेबसाइट हिन्दी-अंग्रेजी में अलग-२ ना बनाकर उसे १००% द्विभाषी बनाए ताकि लोग हिन्दी के इस्तेमाल के लिए प्रेरित हों और सभी ऑनलाइन फॉर्म द्विभाषी बनाए जाएं जैसा चुनाव आयोग ने किया है, वहाँ ऑनलाइन फॉर्म में हिन्दी में नाम आदि भरने की सुविधा है (इन्हें देखिए http://electoralsearch.in/एवं http://nvsp.in/forms/form6.html). ऐसा करने से पारपत्र को द्विभाषी रूप में जारी करने में कोई परेशानी नहीं होगी पर प्रभाग के अधिकारी ऐसा करना ही नहीं चाहते हैं और राष्ट्रपति जी के आदेश की पिछले सात साल अवमानना कर रहे हैं और तकनीकी परेशानी का झूठा बहाना बना रहे हैं, अन्य अनेक देशों में पासपोर्ट 100 % द्विभाषी रूप में कई वर्षों से जारी किए जा रहे हैं.
इसी प्रकार पासपोर्ट कार्यालयों में प्रयोग किये जा रहे सभी सॉफ्टवेयर राजभाषा कानून के नियमानुसार द्विभाषी ना होकर केवल अंग्रेजी में हैं और आवेदकों को इन कार्यालयों से सभी प्रकार की रसीद आदि केवल अंग्रेजी में जारी की जाती है उनमें हिन्दी को कोई स्थान नहीं दिया गया है, इन कार्यालयों में प्रयोग होने वाली सभी स्टेशनरी/फीडबैक फॉर्म इत्यादि भी केवल अंग्रेजी में छपी होती है जैसे #हिन्दी एक अछूत भाषा हो. पासपोर्ट सेवा की प्रीमियम एसएमएस सेवा भी केवल अंग्रेजी में है जबकि इस सेवा के लिए आवेदकों से पैंतीस रुपये वसूल किए जा रहे हैं. कांपावी (कांसुलर, पारपत्र एवं वीज़ा) प्रभाग ने राजभाषा #हिन्दी में एसएमएस एवं ईमेल सूचना भेजे जाने की कोई सुविधा नागरिकों नहीं दी है और नागरिकों पर जबरन अंग्रेजी थोप दी है. गूगल/फेसबुक /ट्विटर जैसी विदेशी कंपनियां उपयोगकर्ताओं को #हिन्दी में एसएमएस, हिन्दी में ओटीपी सन्देश एवं ईमेल सूचना भेजते हैं पर यह बड़े दुःख/शर्म की बात है भारत सरकार के अधिकारी अपने नागरिकों पर बहाना बनाकर अंग्रेजी थोप रहे हैं एवं हिन्दी में सुविधाएँ देना तो दूर की बात है, उस पर विचार करने को भी तैयार नहीं हैं.
(छ). विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ट्विटर/फेसबुक/यूट्यूब पर भी भारत सरकार की आधिकारिक भाषा (राजभाषा) हिन्दी को स्थान नहीं दिया जा रहा है, कृपया अंग्रेजी के साथ-२ सामाजिक माध्यमों पर हिन्दी में भी जानकारी जारी होगी तो देश के करोड़ों नागरिक लाभान्वित होंगे.

आपके द्वारा शीघ्र कार्यवाही की अपेक्षा करती हूँ एवं आशा करती हूँ आप मेरे इस पत्र का शीघ्र उत्तर भिजवाएंगी.

भवदीय
श्रीमती विधि जैन

प्रतिलिपि:
1. राजभाषा विभाग

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