35 वां आम महोत्सव-(दिल्ली हाट जनकपुरी, नई दिल्ली)
(3 से 5 जुलाई, 2026)- (प्रातः 12 बजे से रात्रि 9 बजे तक)
दिल्ली पर्यटन, दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित होनेे वाले तीन दिवसीय वार्षिक 35वें आम महोत्सव का आयोजन दिल्ली हाट जनकपुरी, नई दिल्ली में 3 से 5 जुलाई, 2026 तक किया जा रहा है। जिसका दिल्लीवासियों को बड़ी बेसब्री से इंतजार करते है।
दिल्ली पर्यटन द्वारा 1987 से प्रतिवर्ष आम उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इस आम उत्सव में अनेक दुर्लभ किस्मों को प्रदर्शित किया जाता है जिसमें- हुस्नआरा, रटौल, रामकेला, केसर, मल्लिका, आम्रपाली, लीची, फ़जली, और हाथीझूल आदि अंगूर से लेकर पपीते जैसे आकार के आमों को भी यहां देखा जा सकता है।

आम महोत्सव में देश भर के आम उत्पादक अपने आमों की विभिन्न किस्मों को प्रदर्शित करते है। आमों के पारंपरिक बागवानों द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी आम पर शोध करके कई नई किस्मों के आम की प्रजातियों को विकसित करते है।
मान्यता है कि आम का पैदावार भारतीय उपमहाद्वीप में 4000 वर्षो से भी पुरानी है। भारत में विश्व का लगभग 40 से 64 प्रतिशत आम उत्पादित होता है। विश्व की लगभग 1500 से भी अधिक किस्मों में से लगभग 1000 किस्में भारत में ही पाई जाती है। आम की पैदावार सम्पूर्ण भारत में होती है, विशेषकर उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और आसाम में अधिक होती है। उत्तर प्रदेश में ही लगभग 25.76 प्रतिशत उत्पादन होता हैं।

चरक संहिता में आम के पेड़ एवं फल का चिकित्सीय रूप में भी वर्णन मिलता है। यह वात, कफ, अतिसार, दस्त, आदि रोगों को नष्ट करता है। आम में पाया जाने वाला कैरोटीन शरीर में विटामिन ‘ए’ की कमी को पूरी करता है।
अभिज्ञानम शकुन्तलम में कालीदास ने बसंत ऋतु में आम्रकुन्जों का वर्णन अत्यन्त श्रृंगारिक रूप से किया हैं। प्रसिद्ध सूफी संत एवं शायर अमीर खुसरों ने भी आम के महत्व पर अभिव्यक्ति की है। बौद्ध स्तूपों, प्राचीन मूर्तियों के अलावा आम फल भारतीय संस्कृति में इतना रच-बस गया है कि धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर परिधानों, श्रृंगार, चिकित्सा और व्यजन के रूप में उपयोग किया जाता है।

आज के समय में भारतीय आम विदेशी मुद्रा अर्जित करने का प्रमुख स्त्रेात भी है। खाड़ी देशों और यूरोप में भारतीय आम की बहुत मांग है। भारत दुनिया के ताजा आमों का एक प्रमुख निर्यातक है।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 35 वें आम महोत्सव को सफल बनाने के लिए पारंपरिक आम उत्पादक किसान, सरकारी व गेैर सरकारी संस्थाएं भाग ले रही हैं, जिसमे प्रमुख्तः आईसीएआर आईएआरई पूसा, आईसीएआर सेंटल इंस्टिटयूट फार सब ट्रोपिकल होर्टिकल्चलर लखनऊ, जी.बी पंत यूनिवसिर्टी आफ एग्रीकल्चर एड टेक्नोलोजी पंत नगर, हिसार एग्रीकल्चरल यूनिवसिर्टी, डायरेक्टरेट आॅफ होर्टिकल्चर यूपी, सहारनपुर, बिहार एग्रीकल्चर यूनिवसिर्टी सबोर, भागलपूर, किसान मैंगों सोसायटी, अर्थ मैंगो सोसायटी, मलिहाबाद मैंगों फार्मर प्रोडयूसर कंपनी लि0, सोसायटी फाॅर कजर्वेंशन आफ मैगो डायवर्सिटी, अवध एग्रीटेक मलिहाबाद, तारिक मुस्तफा (यूपी), रामबीर (यूपी), अखलक अली (यूपी), मो0 शाहिद, मो0 जुनैद आदि शामिल है।

इस उत्सव में विभिन्न किस्मों के आम व आम से बने उत्पादों तथा पौधों की खरीदारी की जा सकेगी। आम उत्सव के मुख्य आकर्षण में महिला व पुरूष वर्ग में आम खाओ प्रतियोगिता है। उत्सव में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, हस्तकला और हस्तशिल्प के उत्पाद की बिक्री, बच्चों के लिए किड जोन, सेल्फी प्वाइंट के साथ ही खान-पान के विभिन्न जायको का भी स्वाद लिया जा सकेगा।




