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डिजिटल क्रांति ने दुनिया भर में भारतीय खाने की धाक जमाई

शायद आपको यह जानकर हैरत हो कि भारतीय खाद्य बाजार इस समय दुनिया का छठवां सबसे बड़ा बाजार है। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारतीय खाद्य उद्योग में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेज वृद्धि दर्ज हुई है। 50 वर्षों के आंकलन पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में साल 1961 से 2011 तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं। इन्हीं के आधार पर वर्ष 2019 के खाद्य उद्योग की गणना की गई है।

आपको बता दें कि भारतीय खाद्य उद्योग दुनिया का छठवां सबसे बड़ा बाजार होने के साथ ही दुनियाभर की कुल खाद्य बिक्री में 70 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 32 फीसदी है। उत्पादन से उपभोग तक और फिर निर्यात तक की सभी कड़ियां जोड़ें तो यह देश का पांचवां सबसे बड़ा उद्योग है। 20 फीसदी सालाना वृद्धि दर के साथ मौजूदा वक्त में भारतीय खाद्य बाजार करीब 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा का हो रहा है।

साल 2000 के बाद से भारतीय खाद्य उद्योग में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है और इसकी वजह से इसमें काफी वृद्धि देखी गई है। 150 फीसदी की वृद्धि दर के साथ ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा ने इसमें बड़ा योगदान निभाया है। साथ ही खाद्य बाजार में विदेशी कंपनियों का निवेश भी हाल के कुछ वर्षों में बढ़ा है। दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स चेन अमेजन जल्दी ही भारतीय खाद्य बाजार में कदम रखने जा रही है।

अमेरिकी कंपनी कारगिल जो कि वैश्विक खाद्य बाजार के लिए काम करती है, वर्ष 2020 तक भारत के लिए बड़े खरीदार तैयार करने में जुटी हुई है। उबर टेक्नोलॉजी जैसी कंपनियों को भारतीय खाद्य बाजार में उतरने के लिए भी कारगिल ने तैयार किया था।

विदेश से आकर सीख रहे भारतीय पकवान
भारतीय खाने को अपने आहार का हिस्सा बना चुके कई विदेशी इसे सीखने के लिए बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं। तमिलनाडु से लेकर कोलकाता, मुंबई और दिल्ली में उत्तर भारतीय से लेकर दक्षिण भारतीय पकवान सीखने हर साल विदेशियों की बड़ी संख्या देखी जाती है।

भारतीय भोजन पर प्रभाव
भारतीय भोजन पर प्रभाव भी अपार है। चाहे वह धार्मिक प्रभाव हो या फिर यहां शासन कर चुके लोगों का। आर्य, बौद्ध, चीनी, पारसी, पुर्तगाली, ब्रिटिश और निश्चित रूप से, मुगलई व्यंजन भारतीय भोजन पर प्रभाव के प्रमुख स्रोत हैं।

क्षेत्रीय व्यंजन
भारत के क्षेत्र को पूर्व, पश्चिम, मध्य, उत्तर, उत्तर-पूर्व और दक्षिण में विभाजित किया जा सकता है। आश्चर्यजनक रूप से इनमें से प्रत्येक क्षेत्र की अपनी अलग विशेषता है। भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों में भारतीय शाकाहारी भोजन, भारतीय मिठाई, भारतीय चटनी और भारतीय पेय शामिल हैं। भारतीय अचार और भारतीय स्नैक्स भी क्षेत्रीय व्यंजनों का हिस्सा हैं। ये इंडियन स्टेट रेसिपी भी काफी समृद्ध हैं।

सेहत से भरपूर मसाले
भारतीय खाने के प्रति सारी दुनिया में लोगों के बढ़ते रुझान की वजह इस खाने में इस्तेमाल किए जाने वाले मसाले भी हैं। सदियों से ये मसाले सेहत के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। काली मिर्च, हल्दी, धनिया पाउडर, जायफल, जावित्री, दालचीनी, लौंग और इलायची कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं। बात चाहे ब्रिटेन की हो या अमेरिका की, वहां तंदूरी चिकन, मिक्स प्लेटर जिसमें चिकन, फिश और मटन रहते हैं, पनीर कोकोनट करी, सी-फूड फ्राइड राइस, तंदूरी नान, गोभी मुसल्लम, रुमाली रोटी, नान, प्लेन रोटी आिद शामिल हैं।

टीवी शो का योगदान
दो-ढाई दशह पहले टेलीविजन पर कुकरी शो की शुरुआत हुई थी। इसके बाद धीरे-धीरे ऐसे शो की संख्या बढ़ती चली गई। कुछ वर्षों कुकरी शो से एक कदम आगे बढ़ते हुए फूड चैनल लॉन्च हुए। गीत-संगीत और नृत्य के रियलिटी शो की तरह फूड चैलेंज शो आयोजित होना शुरू हो गए हैं। टीवी पर नए और नामी शेफ दिखाई देने लगे हैं। इनकी वजह से देश में फूड हैबिट भी बदली है।

भारतीय शेफ ने दी ऊंचाई
भारतीय व्यंजनों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाले शेफ में संजीव कपूर, मंजीत गिल, जिग्स कालरा, रणबीर बरार, विकास खन्ना, गौतम महर्षि तरला दलाल और सतीश अरोड़ा के नाम प्रमुखता से आते हैं। इसके साथ ही नित नए फूड ब्रांड उभरकर आ रहे हैं जो पेशावरी से लेकर बिहारी खान-पान को विदशों में नए-नए फ्युजन के साथ पेश कर रहे हैं। यहां तक कि इंटरनेशनल शेफ भी भारतीय सामग्री को अपने व्यंजनों में खास दर्जा देने लगे हैं। सालमन में हल्दी और टमाटर सॉस का इस्तेमाल हो रहा है, वहीं पिज्जा जैसे फास्ट फूड को भारतीय मसालों के साथ डिफरेंट ट्विस्ट में पेश करना खानसामों को खूब भा रहा है।

साभार- https://www.amarujala.com/ से

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