Tuesday, June 25, 2024
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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए डॉ. जैन का यूट्यूब चैनल बना मील का पत्थर

राजनांदगांव। लॉक डाउन के माहौल में डॉ. चन्द्रकुमार जैन द्वारा यूट्यूब चैनल बूँद भर नर्म उजाला के जरिए दिया जा रहा मार्गदर्शन मील का पत्थर साबित हो रहा है। हिंदी भाषा और साहित्य विषय का चयन कर नेट, सेट, सहायक प्राध्यापक, पीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो रहे अभ्यर्थियों के लिए उनकी प्रस्तुति प्रेरक सिद्ध हो रही है। गौरतलब है कि आगामी महीनों में कई परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। एक तरफ कोरोना वायरस को लेकर सावधानी पर रचनात्मक सन्देश तो दूसरी ओर भविष्य की तैयारी कर रही पीढ़ी को कुछ अपनी तरफ से देने की इस पहल को डॉ. जैन उच्च शिक्षा की शासकीय सेवा के साथ-साथ एक ज़रूरी नागरिक जिम्मेदारी भी मानते हैं।

डॉ. जैन ने ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में युवाओं और इन परीक्षाओं के उम्मीदवारों को प्रोत्साहित करने का बीड़ा उठाया है जिसे बड़ी संख्या में देखा व सुना जा रहा है। डॉ. जैन के विषय चयन की अहमियत यह है कि उसमें पाठ्यक्रम के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और मोटिवेशन को भी शामिल किया गया है जिससे परीक्षा की तैयारी दबाव में नहीं, स्वभाव में रहकर की जा सके। घर पर रहकर क्लास रूम का पूरा लुत्फ़ देने वाले डॉ. जैन के वीडियो शब्दों को वहन करने वाली आवाज़ के अलावा उनके अर्थ को स्पष्ट करने वाले चित्रों से कुछ तरह घुले मिले हैं कि श्रोताओं को सीधे अपील करते हैं। गौरतलब है कि लॉकडाउन के मौजूदा महीने में ही उनके व्यूवर्स की संख्या एक लाख के पार चली गयी है।

यह संयोग मात्र नहीं है कि अपने यूट्यूब पर अपने बहुआयामी वीडियोज़ से डॉ. जैन बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल हुए हैं। भाषा पर और अभिव्यक्ति कला की खास पहचान के चलते डॉ. जैन कॅरियर और अच्छा सुनने की चाह रखने वालों को निःस्वार्थ लाभ दे रहे हैं। यूथ रेडक्रास के स्टेट रिसोर्स पर्सन, दक्ष प्रशिक्षक के होने अलावा कई स्वयंसेवी संस्थाओं से भी जुड़े डॉ. जैन ने हिंदी साहित्य के इतिहास पर आधारित एक हजार वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर और सृजन के आयाम जैसी बहुआयामी विषयों पर केंद्रित किताब लिखी है। शोध ग्रन्थ के और मौलिक कविताओं के संग्रह के तीन संस्करण अपने आप में उदहारण हैं। डॉ. जैन की किताब में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा प्रथम पुरस्कृत आलेख भी है जिसमें छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सम्पदा का प्रभावी वर्णन किया गया है। उधर सोशल मीडिया के विविध आयामों में भाषा, साहित्य, पत्रकारिता, संस्कृति के अलावा व्यक्तित्व विकास तथा मोटिवेशन पर डॉ. जैन लगातार कारगर काम कर रहे हैं.

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