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आई. एस .आई. की योजनायें

महोदय
आज कल गुप्तचर विभाग की सूचनाओ के आधार आईएसआई द्वारा हमारे देश में आतंकवादियो को उकसाने व भड़काने के महत्वपूर्ण समाचार आ रहे है जिससे  पत्रकारिता के साहसिक प्रयास का संकेत मिलता है ।

मुगलकालीन इतिहास को अलग करते हुए वर्तमान में पाकिस्तान की गुप्तचर संस्था  "इंटर सर्विसेस इंटेलिजेंस"  (आईएसआई) द्वारा पोषित जिहाद रुपी मुस्लिम आतंकवाद  की गंभीर समस्या से देश पिछले लगभग पिछले 44 वर्षो से जूझ रहा है । आईएसआई  बंग्लादेश के निर्माण (1971) से ही जिहाद के लिए अपने एजेंटों द्वारा भटके हुए कट्टरपंथी मुस्लिमो को लोभ व लालच देकर अनेक साधनो व विभिन्न माध्यमो से बहका कर देश के विभिन्न क्षेत्रो में धीरे धीरे अपने स्लीपिंग सेल बंनाने में सफल होती रही है। बंग्लादेश के निर्माण व अपनी हार से विचलित होकर उस समय (1971) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने ही आईएसआई का दुरुपयोग भारत के पंजाब व कश्मीर में अलगाववाद व आतंकवाद बढ़ाने में किया। आईएसआई के सुझाव पर जनरल जिया उल हक़ को योग्य आधिकारियो की अवहेलना करते हुए भुट्टो ने सेना का मुखिया बनाया था । बाद में जिया उल हक़ पाक के राष्ट्रपति बनें तो उन्होंने देश को मुस्लिम कट्टरता का बढ़ावा देते हुए 'ईश निंदा कानून' भी बनाया और उसी जिहादी मानसिकता व बदले की भावना  के वशीभूत आईएसआई के माध्यम से  भारत को एक न ख़त्म होने वाले छदम् युद्ध में ढकेल दिया, जो अभी तक जारी है । 

इसी भारत विरोध (हिन्दू विरोध) व कश्मीर को जीतने के प्रचार में पाकिस्तानी जनता को लुभाते रहकर जिया उल हक़ व आगे आने वाले अन्य शासक भी वहां सरकार चलाते रहे। इस सब मे आईएसआई  सेना व सरकार से भी मजबूत होती चली गयी।जिया उल हक़ ने आईएसआई को नशीले पदार्थो का अवैध व्यापार करवाने में भी सहयोग किया । 90 के दशक के समाचारो के अनुसार ही आईएसआई द्वारा लगभग 80  आतंकवादी प्राशिक्षण केंद्र अफगानिस्तान सहित पाक व पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चलाये जा रहें थे । 1984 में कश्मीर की कथित आजादी के लिए वहां जंग छेड़ी गयी और 1990 में तो हिंसा का भरपूर नंगा नाच हुआ । उस समय 123 आतंकवादी संगठन कश्मीर में काम कर रहे थे और विभिन्न पाकिस्तानी संगठनो द्वारा  करोडो रुपयो की सहायता भेजी गयी  थी इस सब में सार्वाधिक योगदान आईएसआई का ही रहा था ।

  1992 में अमरीकी रिपोर्ट के संदर्भ से कश्मीर के पूर्व राज्यपाल  श्री जगमोहन जी की  किताब "माय फ्रोज़न ट्रॉब्लेंस इन कश्मीर" के तृतीय संस्करण से ज्ञात होता है कि आईएसआई के पास उस समय लगभग 3 अरब अमरीकी डॉलर की विराट पूंजी थी जो कि पाकिस्तान के रक्षा बजट से भी 5 गुना अधिक थी और वह अधिकांश नशीले पदार्थो के अवैध व्यापार से ही कमाई गयी थी । वह सिलसिला अभी भी जारी है और उसमें  नकली करेंसी व अवैध हथियारों के व्यापार से तो अब और न जाने कितने अरब डॉलरो की सम्पदा द्वारा वह अनेक जिहादी योजनाओ को अंजाम देने में लगी हुई है।आज सम्पूर्ण भारत में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आईएसआई ने अपने एजेंटों व कट्टरपंथी मुस्लिमो द्वारा आतंकवादी संगठनो का भरपूर जाल फैला रखा है। 

पूर्व में भी गुप्तचर विभाग की रिपोर्टों के आधार पर आये समाचारो से यह भलीभांति ज्ञात होता रहा है कि आईएसआई ने अनेक आतंकवादी संगठनो  के  बल पर हजारों दंगे व सैकड़ो बम विस्फोटो द्वारा भारत में दहशतगर्दी फेलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।कश्मीर का लगभग हिन्दू विहीन होना आईएसआई के दुःसाहस  का स्पष्ट प्रणाम है।

आईएसआई ने  लगभग चार दशक में हमारे देश के हज़ारो सुरक्षाकर्मियों व निर्दोषो के लहू को बहाने के अतिरिक्त अरबो की सरकारी व व्यक्तिगत सम्पतियों को नष्ट करा है । ऐसे  में सैकड़ो आतंकवादियो की धरपकड़ भी हुई और मारे भी गए थे।    सैकड़ो की संख्या में इसके एजेंट भी विभिन्न स्थानों से समय समय पर हमारे सुरक्षाकर्मियो द्वारा पकडे भी जाते रहें है।साथ ही साथ सैकड़ो की संख्या में वैध वीसा पर भारत आये पाकिस्तानी नागरिक वीसा अवधि समाप्त हो जाने के बाद भी यही छिप कर रह रहें है वो भी कमोवेश आईएसआई के ही षडयंत्र का ही एक भाग हो सकता है।
नवीन समाचारो के अनुसार  मुस्लिम आतंकवादी संगठन ' इंडियन मुजाहिदीन ' को अब आई.एस.आई. देश में दंगे फसाद व बम ब्लास्ट आदि से दहशत फैलाने के लिए स्वयं आर्थिक सहायता न करके  उनको विभिन्न अपराधो जैसे अपहरण, फ़िरौती व लूटपाट आदि से धन जुटाने के लिए उकसा रही है।

याद रहे कि इन मुस्लिम आतंकवादियो को अब तक आईएसआई व लश्कर-ए-तैयबा भारी मात्रा में हथियारों, विस्फोटको व अन्य आर्थिक सहायता देती आ रही थी ।गुप्तचर विभाग के अनुसार इंडियन मुजाहिदीन का मासिक बजट 50 करोड़ से 150 करोड़ रूपये के लगभग होता था ।अब कुछ वर्षो से ये संगठन उनके अनुसार जिहादी गतिविधियों को कार्यरूप नहीं दे पा रहे है तो उन्होंने इनके बजट में कटौती करी है साथ ही आईएसआई ने यह सन्देश भी दिया है कि अगर वे (इंडियन मुजाहिदीन) उनके मंसूबे (भयानक जिहादी घटनाओ द्वारा तबाही ) को भारत में अन्जाम देने में सफल हुए तो वे उनको बजट की भरपाई पूरी कर देँगेँ। 

अतःगुप्तचर संस्थाओ द्वारा प्राप्त जिहादी शत्रुओ की योजनाओं को समझो और इस चुनौती को स्वीकार करते हुए  धर्म व देश की रक्षा के लिए सावधान रह कर  अपने अपने स्तर से तैयार रहो। ऐसा नहीं है कि हमारी  सरकार इन सबसे अनभिज्ञ है पर ऐसा प्रतीत होता है कि  सुरक्षा की सर्वोपरि भावना में अभी कुछ व्यवाहरिक  राजनीतिक रोड़े अटक ही रहें होंगे ?? 

भवदीय

विनोद कुमार सर्वोदय
गाज़ियाबाद

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