भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), जो खगोल विज्ञान, खगोल भौतिकी और संबंधित भौतिक विज्ञानों में अनुसंधान और विकास के लिए समर्पित देश का एक प्रमुख संस्थान है और अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है, के पास कई शोध उपलब्धियां हैं।

यह संस्थान, जो सौर मंडल, हमारी आकाशगंगा, बाहरी आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड में अन्य दूरस्थ वस्तुओं का अध्ययन करता है, ने हाल ही में ब्लैक होल और आकाशगंगाओं के सह-विकास को फिर से परिभाषित किया है, गर्म अत्यधिक हीलियम तारों में फ्लोरीन का पता लगाया है, इस प्रकार उनके विकास के रहस्य को सुलझाया है और मिल्की वे में ब्रह्मांड के पहले एक अरब वर्षों के विलक्षण तारों की भी खोज की है।

सूर्य और सौर मंडल के क्षेत्र में अनुसंधान आईआईए में सबसे लंबे समय से चल रहे विषयों में से एक है। तारा निर्माण क्षेत्रों, तारा समूहों, तारकीय वायुमंडलों, तारों की प्रचुरता और आकाशगंगा की रासायनिक गतिकी का अध्ययन आईआईए में पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है। निकटवर्ती आकाशगंगाओं, सामान्य और सक्रिय आकाशगंगाओं, उच्च-रेडशिफ्ट ब्रह्मांड और ब्रह्मांड विज्ञान का अध्ययन शोधकर्ताओं द्वारा किए जाने वाले अन्य क्षेत्र हैं। सैद्धांतिक अनुसंधान क्षेत्रों में पल्सर, ब्लैक होल, सघन पिंड और सापेक्षतावादी खगोल भौतिकी जैसे विषय शामिल हैं। वैज्ञानिक अवलोकन केंद्रों में तैनात किए जाने वाले उपकरणों के निर्माण में भी शामिल हैं।

संस्थान की मुख्य अवलोकन सुविधाएं कोडाइकनाल में स्थित कोडाइकनाल सौर वेधशाला, कावलूर में स्थित वैणु बप्पू वेधशाला, लेह में मुख्यालय वाली भारतीय खगोलीय वेधशाला और गौरीबिदानूर में स्थित गौरीबिदानूर रेडियो वेधशाला हैं। होसाकोटे, बेंगलुरु (ग्रामीण) में स्थित विज्ञान और प्रौद्योगिकी अनुसंधान एवं शिक्षा केंद्र (CREST) परिसर में आईएओ की दूरस्थ अवलोकन सुविधा और अंतरिक्ष पेलोड के एकीकरण और अंशांकन के लिए एमजीके मेनन अंतरिक्ष विज्ञान प्रयोगशाला स्थित है। तीस मीटर दूरबीन (टीएमटी) का निर्माण एक अंतरराष्ट्रीय संघ द्वारा किया जा रहा है जिसमें भारत भागीदार है। नोडल संस्थान होने के नाते, मुख्य परिसर में भारत-टीएमटी समन्वय केंद्र स्थित है।

यह संस्थान हानले में समुद्र तल से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 2 मीटर हिमालयन चंद्र दूरबीन (एचसीटी) का संचालन करता है, जिसने संचालन के 20 वर्ष पूरे कर लिए हैं। हानले परिसर में 70 सेंटीमीटर ग्रोथ इंडिया दूरबीन (आईआईटी बॉम्बे के सहयोग से), उच्च ऊंचाई गामा-किरण वेधशाला (एचएजीएआर, टीआईएफआर के सहयोग से), जल्द ही चालू होने वाला 21 मीटर का प्रमुख वायुमंडलीय सेरेनकोव प्रयोग (एमएसई, बीएआरसी के सहयोग से), और वायुमंडलीय एवं पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में प्रयोग भी स्थित हैं।

भारत की पहली अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट पर स्थित अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (यूवीआईटी) को क्रेस्ट परिसर में स्थित एमजीके मेनन अंतरिक्ष विज्ञान प्रयोगशाला में असेंबल, परीक्षण और कैलिब्रेट किया गया था। जल्द ही लॉन्च होने वाले आदित्य-एल1 मिशन पर स्थित विजिबल एमिशन लाइन कोरोनोग्राफ (वीईएलसी) को वर्तमान में इसी प्रयोगशाला में असेंबल किया जा रहा है। इस प्रयोगशाला की पर्यावरण परीक्षण सुविधा का उद्घाटन हाल ही में 29 दिसंबर 2020 को माननीय उपराष्ट्रपति द्वारा किया गया था। माननीय उपराष्ट्रपति ने क्रेस्ट परिसर में स्थित थर्टी मीटर टेलीस्कोप के लिए सेगमेंट पॉलिशिंग सुविधा का भी उद्घाटन किया।

संस्थान लद्दाख के मेराक में एक राष्ट्रीय विशाल सौर दूरबीन बनाने की योजना बना रहा है। यह नई पीढ़ी की 2 मीटर श्रेणी की दूरबीन है, जो आदित्य-एल1 के साथ मिलकर भारत को सौर और अंतरिक्ष-मौसम अध्ययन में अग्रणी बने रहने में मदद करेगी। संस्थान टीएमटी परियोजना में भाग लेकर देश में निर्मित क्षमता का लाभ उठाते हुए, लद्दाख क्षेत्र में एक राष्ट्रीय परियोजना के तहत एक विशाल ऑप्टिकल-आईआर दूरबीन बनाने की भी योजना बना रहा है।

इस संस्थान की उत्पत्ति 1786 में मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में स्थापित एक वेधशाला से हुई थी। 1899 में इस वेधशाला को कोडाइकनाल स्थानांतरित कर दिया गया। 1971 में, खगोल भौतिकी वेधशाला भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान के नाम से एक स्वायत्त अनुसंधान संस्थान बन गई। 1975 में इसका मुख्यालय बेंगलुरु के कोरमंगला में स्थानांतरित हो गया। यह संस्थान भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समर्थित और निर्देशित है।



संस्थान की वेबसाईट https://dst.gov.in/