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क्वांटम कंप्यूटिंग पर साथ मिलकर काम करेंगे आईआईटी मद्रास और आईबीएम

क्वांटम कंप्यूटिंग को तकनीकी जगत की अगली अहम कड़ी माना जा रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाएं जुड़ी हैं। इन्हीं संभावनाओं को भुनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास और तकनीकी क्षेत्र की प्रमुख अमेरिकी कंपनी आईबीएम ने साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। क्वांटम कंप्यूटिंग शिक्षा एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए यह वैश्विक गठजोड़ किया गया है। आईबीएम के साथ साझेदारी से आईआईटी मद्रास के संकाय सदस्यों, शोधार्थियों एवं छात्रों की आईबीएम क्वांटम सिस्टम और आईबीएम क्लाउड से जुड़े तंत्र तक पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी। इससे छात्रों को क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्र में भविष्य के अवसरों के दृष्टिकोण से स्वयं को तैयार करने में मदद मिल सकेगी।

इस साझेदारी के बाद आईआईटी मद्रास के संकाय सदस्यों और आईबीएम के शोधार्थियों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित क्वांटम कंप्यूटिंग लैब कोर्स में शोधार्थियों को प्रायोगिक सत्र में वास्तविक अनुभव लेने का अवसर मिल सकेगा। इस पहल से क्वांटम इनफॉर्मेशन ऐंड कंप्यूटिंग पर मौजूदा पाठ्यक्रमों को भी एक नया आयाम मिलेगा। इस साझेदारी में आईबीएम अध्ययन से संबंधित सामग्री, उपकरण और अन्य तंत्रों से जुड़ी आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा। पिछले कुछ समय से भारत में क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर व्यापक स्तर पर गतिविधियां देखने को मिली हैं। भारत सरकार इससे जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय महती भूमिका निभा रहा है।

आईआईटी मद्रास के साथ इस साझेदारी के विशिष्ट पहलुओं को रेखांकित करते हुए आईबीएम रिसर्च इंडिया में निदेशक डॉ. गार्गी दासगुप्ता ने कहा- “क्वांटम कंप्यूटिंग हमारे दौर की सबसे उभरती हुई तकनीकों में से एक है। विभिन्न कार्यक्रमों और पहल के माध्यम से क्वांटम इनोवेटर्स की अगली पीढ़ी तैयार करने में जुटे आईआईटी मद्रास जैसे संस्थान को सहयोग देने के लिए आईबीएम पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी आईबीएम क्वांटम एजुकेटर्स प्रोग्राम का एक हिस्सा है, जिसका लक्ष्य क्वांटम क्षेत्र में कार्यरत अध्यापकों की मदद करना है, जिसमें उन्हें एक दूसरे के संपर्क में लाकर गुणवत्तापरक शैक्षणिक अनुभव प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है।”

क्वांटम कंप्यूटिंग को तकनीकी जगत की अगली अहम कड़ी माना जा रहा है, जिससे भविष्य की संभावनाएं जुड़ी हैं। इन्हीं संभावनाओं को भुनाने के उद्देश्य से भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), मद्रास और तकनीकी क्षेत्र की प्रमुख अमेरिकी कंपनी आईबीएम ने साथ मिलकर काम करने का निर्णय लिया है।

क्वांटम तकनीक की महत्ता समझाते हुए आईआईटी मद्रास में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर अनिल प्रभाकर ने कहा है कि “क्वांटम कंप्यूटिंग हमें कंप्यूटिंग से संबंधित जटिल समस्याएं सुलझाने का अवसर प्रदान करती है। स्वदेशी स्तर पर ‘क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (क्यूकेडी)’ के विकास में हमने मुख्य भूमिका निभायी है। हमने 150 किलोमीटर तक की दूरी तक अपनी ऐसी क्षमताएं प्रदर्शित की हैं। ऐसे क्यूकेडी प्रोटोकॉल्स न केवल हमारे संचार को सुरक्षित आवरण उपलब्ध कराएंगे, अपितु फोटोनिक क्वांटम कंप्यूटिंग और ब्लाइंड क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई धाराओं को उभारने में भी सक्षम होंगे। हमने यह प्रदर्शन क्वांटम रेंडम नंबर और हेराल्डेड फोटो जेनरेशन जैसे पेटेंट्स के दम पर किया है।”

आईआईटी मद्रास ने गत वर्ष जुलाई से क्वांटम साइंस ऐंड टेक्नोलॉजी (क्यूएस्ट) में अंतर्विषयक डुएल डिग्री पाठ्यक्रम की शुरुआत की है। संस्थान क्वांटम कम्युनिकेशन ऐंड कंप्यूटेशन क्वांटम इनफॉर्मेशन थ्योरी और क्वांटम मैटीरियल्स जैसे विषयों पर अनुकूल परिवेश के तहत गतिविधियों को प्रोत्साहन दे रहा है। इसके तहत इन क्षेत्रों में शोध अवसंरचना के संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं सम्मेलनों हेतु वित्तीय व्यवस्था के लिए भी कदम उठाए जा रह रहे हैं।

इस विषय पर टेंपर बिजनेस स्कूल, कार्नेगी के साथ मिलकर क्वांटम इंटिगर प्रोग्रामिंग जैसे पाठ्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं, जो हाइब्रिड क्वांटम कंप्यूटिंग से लेकर बिन पैकिंग, इमेज क्लासिफिकेशन, चैनल रिकॉर्डिंग और क्वांटम स्टेट टोमोग्राफी जैसे विविधता भरे क्षेत्रों की महत्ता दर्शाने की दिशा में जोर देते हैं।

क्वांटम साइंस एवं प्रौद्योगिकी में करियर की बेहतर संभावनाओं के लिए आईआईटी मद्रास स्थित क्वांटम कंप्यूटिंग लैब स्नातक एवं परा-स्नातक पाठ्यक्रमों का संचालन करेगी। संस्थान का मानना है कि आईबीएम जैसे वैश्विक सहयोगी के साथ उनके छात्रों को सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक दोनों स्तरों पर पर्याप्त ज्ञान एवं अनुभव मिलेगा, जिससे वे अपेक्षित कौशल सीखकर अपनी प्रतिभा को निखारने में सक्षम हो सकेंगे।

इंडिया साइंस वायर

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