आँखें हैं तो जहान है कितना अर्थपूर्ण सुंदर और सटीक विचार है । हिंदी साहित्य में आंखों से खूबसूरत और रंग-बिरंगे संसार का आनंद लेने के लिए इनके महत्व और आंखों की उपमाओं पर खूब लिखा गया है। आँखें मात्र देखने का अंग नहीं, वरन भावनाओं, सत्य, प्रेम, विद्रोह और आंतरिक संघर्षों की अभिव्यक्ति का सबसे सशक्त प्रतीक रही हैं। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक, कवियों और लेखकों ने आँखों को विभिन्न आयामों में उकेरा है। रीतिकाल और भक्तिकाल से लेकर आधुनिक कविताओं तक, आँखों का उपयोग प्रेम-निवेदन, शरारत, संकोच और आकर्षण को दर्शाने के लिए हुआ है। नायिका की कजरारी, मृगनयनी या कमल जैसी आँखों से प्रेम रस की वर्षा होती है। माना जाता है कि होठ खामोश रहें पर आँखें मन के गहरे से गहरे राज़, पीड़ा और प्रेम को उजागर कर देती हैं। साहित्य में आँखों के लिए लोचन, अक्षि, नैन, नयन, नेत्र, चक्षु, दृग, विलोचन, और चख जैसे अनेक शब्दों का प्रयोग होता रहा है, जो अलग-अलग मनोभावों को व्यक्त करते हैं।
हिंदी साहित्य में कविता, भावपूर्ण आलेख लिखने वाला साहित्य सृजन कर्ता जब एक नेत्र शल्य चिकित्सक हो तो तय है कि उसके सृजन में आंखों पर सृजन होना तो लाजमी है।
ऐसे ही सुवि नेत्र चिकित्सालय एवं लेसिक लेज़र सेंटर कोटा के नेत्र शल्य चिकित्सक
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय साहित्यकार, राष्ट्र चिंतक, आध्यात्मिक अन्वेषक, प्रेरक वक्ता एवं साइक्लिस्ट भी हैं।
बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ. सुरेश जहां लोगों की आंखों की सुरक्षा प्रदान कर उनकी नेत्र ज्योति बनाने की दक्षता से मालामाल हैं वहीं अपने साहित्यकार मन के प्रखर लेखन से समाज को भी कुछ नया सोचने की दृष्टि प्रदान करने में भी सिद्धहस्त हैं। नेत्र सर्जन की साहित्यिक अभिरुचि इनके व्यक्तित्व का एक अनूठा समन्वय दर्शाता है।
इनका साहित्य संसार समाज को जागृत करता है तो नेत्र विज्ञान पर आधारित साहित्य न केवल मेडिकल के विद्यार्थियों के लिए वरन आम आदमी के लिए भी मार्ग दर्शक और दिशाबोधक है। चिकित्सा पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों को जीवन काल में आने वाली चुनौतियों ,उन चुनौतियों से सकारात्मक तरीके से सामना करने के टिप्स भी बखूबी समझा कर समाज में अच्छा नागरिक बनने के लिए लंबे समय से प्रेरित कर रहे हैं ।
एक चिकित्सक के रूप में डॉ. सुरेश पांडेय अपने कार्य, व्यवहार ,विशेषग्यता ,प्रंबधन, ,बातचीत के सलीक़े ,मरीज़ में आत्मविश्वास का मनोविज्ञान सहित कई टिप्स बताते हुए मेडिकल के विद्यार्थियों से कहते हैं कि एक चिकित्सक जिसे मरीज़ भगवान समझता है उस चिकित्सक को अपने व्यवसाय के आदर सम्मान के लिए सब कुछ अहंकार ,प्रलोभन त्याग कर सम्पूर्ण शक्ति से ईश्वरीय मदद के साथ मरीज़ के भरोसे को बरक़रार रखते हुए उसका इलाज सफल हो और वह फिर से स्वस्थ होकर वापस लोटे, इस भावना से किए गए प्रयास ही उसे कामयाब चिकित्स्क बनाते है।
डॉ. सुरेश कुमार पाण्डेय का जन्म 12 अगस्त 1968 को पिता स्व. कामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं माता: स्व. माया देवी पाण्डेय के परिवार में चित्तौड़गढ़ जिले की तहसील रावतभाटा के ग्राम मोहना में हुआ। आपने एमबीबीएस., एमएस. (नेत्र शल्य चिकित्सा तक शिक्षा प्राप्त की । अमेरिका एवं ऑस्ट्रेलिया में उन्नत नेत्र शल्य चिकित्सा का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
हिन्दी, अंग्रेज़ी एवं संस्कृत भाषाओं के ज्ञाता डॉ. सुरेश चिंतक, कल्पनाशील और प्रखर लेखक हैं। हिन्दी साहित्य में अभिन्न अभिरुचि है । राजस्थान पत्रिका, दैनिक भास्कर एवं अन्य प्रतिष्ठित हिन्दी समाचार पत्रों में आपके अब तक 100 से अधिक प्रेरणादायक लेख व रचनाएं प्रकाशित हो चुके हैं। कोटा एवं हाड़ौती संभाग के 100 से अधिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को 'नेत्रदान महादान', 'डिजिटल डिटॉक्स', 'स्वस्थ जीवन शैली' और प्रेरक हिंदी कविताओं के माध्यम से इस डिजिटल युग में पुस्तकों को पढ़ने के लिए जागरूक एवं प्रेरित करने का सफल एवं निरंतर प्रयास सतत रूप से कर रहे हैं। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में इनके 150 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित हुए हैं। वर्ष 2005 में मिलान, इटली में 1,500 सर्जनों के समक्ष किया गया उनका लाइव सर्जरी प्रदर्शन ने इन्हें वैश्विक ख्याति दिलवाई।
नेत्र शल्य चिकित्सक के रूप में सामाजिक सरोकार के अंतर्गत पिछले 20 वर्षों में अपनी पत्नी डॉ. विदुषी शर्मा एवं टीम के साथ लगभग 600 निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविरों का सफल आयोजन कर लगभग तीस हजार से अधिक नेत्र मरीजों को निःशुल्क परामर्श प्रदान किया है । साथ ही जरूरतमंद निर्धन एक हजार से अधिक मरीजों के निशुल्क नेत्र ऑपरेशन कर मानवीय दृष्टिकोण का परिचय दिया। ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल आई केयर यूनिट के माध्यम से दो लाख से अधिक नेत्र मरीजों तक उत्कृष्ट सेवा उपलब्ध कराई है। अपने विस्तृत और प्रेरणादायक चिकित्सकीय केरियर में इन्होंने अब तक 20 लाख से अधिक नेत्र मरीजों का सफलतापूर्वक उपचार किया है और एक लाख से अधिक सफल नेत्र ऑपरेशन कर मरीजों को नई रोशनी प्रदान की।
आपकी प्रकाशित पुस्तकों पर नज़र डालते हैं तो अब तक ऑपरेशन महाशक्ति भारत 2047, जिंदगी का जश्न: सुखद, सफल और सार्थक जीवन के 101 सुनहरे सूत्र , एक नेत्र सर्जन की आध्यात्मिक डायरी : ऑपरेशन थियेटर से मंत्र, मेडिटेशन और चेतना के रहस्यों तक, मृत्यु से मोक्ष तक एवं आवर्स एनर्जी कोड , एन. आई. फॉर द स्काई: हाउ एन आई सर्जन हेल्प्ड मिलियंस डेयर टू ड्रीम, सीक्रेट्स ऑफ सक्सेसफुल डॉक्टर्स: ए कम्प्लीट गाइड टू ए फुलफिलिंग मेडिकल करियर, एंटरप्रेन्योरशिप फॉर डॉक्टर्स: द अल्टीमेट गाइड टू बिल्डिंग ए सक्सेसफुल मेडिकल प्रैक्टिस, ए हिप्पोक्रेटिक ओडिसी: लेसंस फ्रॉम ए डॉक्टर कपल ऑन लाइफ इन मेडिसिन, चैलेंजेस एंड डॉक्टर प्रेन्योरशिप , शतायु भव: रिवर्स एजिंग सीक्रेट्स , क्रैक नीट लाइक ए टॉपर: द प्रूवन 600+ स्कोर सिस्टम बाय डॉक्टर्स ट्रेंड एट एम्स एंड पीजीआईएमईआर, पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। संपादित कृतियाँ हमारी आँखें: शरीर का दर्पण एवं बाह्य दृष्टि से दिव्य दृष्टि तक प्रकाशित हुई तथा नेत्र रोग एवं उपचार का अनुवाद किया है। करीब 20 साझा संकलन में रचनाएं प्रकाशित हुई हैं।
इनकी एक पुस्तक सीक्रेट ऑफ़ सक्सेसफुल डॉक्टर्स को देखे तो में चिकित्सा नियम , ,क़ानून ,मरीज़ों से सद्व्यवहार के टिप्स ,डॉक्टर बनने के इच्छुक कोचिंग विद्यार्थियों से लेकर मेडकिल कॉलेज में मेडिकल अध्ययनरत विद्यार्थियों ,विशेषज्ञ चिकित्सा व्यवहार ,रिसर्च कार्य ,प्रबंधन ,वित्तीय पोषण ,खासकर मरीज़ों के आत्मविश्वास के साथ उनकी दवा और दुआ, सद्व्यवहार से इलाज के मानवता से जुड़े सभी टिप्स को गागर में सागर कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।
एक अच्छे रचनाकार होने से आपका परिचय हाल ही में प्रकाशित राजस्थान के 552 रचनाकारों के परिचय कोश में प्रमुखता से प्रकाशित किया गया है। आपको अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर लाइव सर्जरी प्रदर्शन एवं अनेक विश्वस्तरीय पुरस्कार प्राप्त करने का गौरव प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि आपको प्रतिष्ठित मेडिकल मैगजीन "मेडगेट टुडे" द्वारा इनको भारत के '25 लिविंग लीजेंड्स' में शामिल किया गया। विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस पर राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय कोटा द्वारा सृजन शिखर सम्मान 2026 ,जिला प्रशासन कोटा द्वारा 15 अगस्त 2026 को नेत्रदान, अंगदान, स्वास्थ्य जन जागरूकता एवं सामाजिक कार्यों हेतु जिला स्तरीय सम्मान, अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी द्वारा अचीवमेंट अवॉर्ड' एवं बेस्ट ऑफ शो अवॉर्ड ,अमेरिकन एवं यूरोपियन सोसायटी ऑफ कैटरैक्ट एंड रिफ्रैक्टिव सर्जरी द्वारा 'वीडियो फिल्म फेस्टिवल अवॉर्ड, बेस्ट पोस्टर अवॉर्ड एवं बेस्ट पेपर ऑफ द सेशन अवॉर्ड प्राप्त हुए हैं। गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2014 पर जिला प्रशासन द्वारा उत्कृष्ट चिकित्सा कार्य हेतु प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया।
परिचय के रूप में डॉ. पाण्डेय को नेत्र चिकित्सक बनने की प्रेरणा उनके दादा स्व. डॉ. कामता प्रसाद पाण्डेय से प्राप्त हुई। वे एक नेत्र चिकित्सक होने के साथ - साथ एक सच्चे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रहे। आपकी दादी श्रीमती राम शृंगारी देवी का जन्म बलिया जिले के नगवा ग्राम में हुआ था, जो अमर शहीद श्री मंगल पाण्डेय की भी जन्मभूमि रहा है। इसी गौरवशाली विरासत के कारण डॉ. पाण्डेय को जन्म से ही राष्ट्रभक्ति, देश प्रेम और हिन्दी भाषा के प्रति अगाध अनुराग अपने परिजनों से संस्कारों में मिला। ये अपनी सफलता का श्रेय अध्यात्म, पठन-पाठन, कठोर अनुशासन और शारीरिक फिटनेस को देते हैं। ये नियमित साइकिलिंग करते हैं, जो उनके जीवन में असीमित एकाग्रता और ऊर्जा बनाए रखने का मुख्य स्रोत है। इनकी पत्नी डॉ. विदुषी शर्मा भी एम्स, नई दिल्ली से प्रशिक्षित एक ख्यातिप्राप्त आई सर्जन हैं। बेटी, इशिता पाण्डेय, यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया में संचार और पत्रकारिता की उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। कह सकते हैं इनका जीवन चिकित्सा, जनसेवा और साहित्य के अद्भुत समन्वय का एक उत्कृष्ट , जीवंत और प्रेरक उदाहरण है। संपर्क : सी 13, तलवंडी, कोटा 324005 राजस्थान. मो.9351412449

डॉ. प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवं पत्रकार, कोटा





