भारत ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए हरियाणा में जींद–सोनीपत रेलखंड पर अपनी पहली हाइड्रोजन ईंधन (Hydrogen Fuel Cell) से चलने वाली ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहाँ हाइड्रोजन तकनीक का उपयोग रेल परिवहन में किया जा रहा है।

क्या है हाइड्रोजन ट्रेन?
हाइड्रोजन ट्रेन में डीजल इंजन के स्थान पर हाइड्रोजन फ्यूल सेल का उपयोग किया जाता है। फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक क्रिया से बिजली उत्पन्न होती है, जिससे ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड या धुआँ नहीं निकलता, बल्कि केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। यही कारण है कि इसे पर्यावरण के लिए अत्यंत अनुकूल माना जाता है।

हरियाणा की हाइड्रोजन ट्रेन की प्रमुख विशेषताएँ
संचालन मार्ग: जींद–सोनीपत (लगभग 89 किलोमीटर)।
यह भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन आधारित यात्री ट्रेन है।
ट्रेन में दो हाइड्रोजन चालित पावर कार और कई यात्री कोच हैं।
अधिकतम डिजाइन गति लगभग 110 किमी/घंटा, जबकि शुरुआती संचालन कम गति पर किया जा रहा है।

दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें पहले से चल रही हैं। भारत इस तकनीक को अपनाने वाले देशों की सूची में अब शामिल हुआ है।

1. जर्मनी
जर्मनी हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाला दुनिया का पहला देश माना जाता है। वर्ष 2022 में यहाँ नियमित यात्री सेवा के लिए Alstom Coradia iLint हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई। यह लोअर सैक्सनी (Lower Saxony) राज्य में डीजल ट्रेनों का स्थान ले रही है।

2. फ्रांस
फ्रांस में भी हाइड्रोजन ट्रेनों का परीक्षण और सीमित संचालन शुरू हो चुका है। आने वाले वर्षों में कई क्षेत्रों में डीजल ट्रेनों की जगह हाइड्रोजन ट्रेनें लगाने की योजना है।

3. इटली
इटली के लोम्बार्डी क्षेत्र में हाइड्रोजन ट्रेनों को चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदूषण कम करना और हरित परिवहन को बढ़ावा देना है।

4. ऑस्ट्रिया
ऑस्ट्रिया ने हाइड्रोजन ट्रेनों का सफल परीक्षण किया है और कुछ मार्गों पर इनके उपयोग की दिशा में काम चल रहा है।

5. चीन
चीन ने हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन और ट्राम दोनों विकसित की हैं। वहाँ की कुछ हाइड्रोजन ट्रेनें लगभग 160 किमी प्रति घंटा की गति से चलने में सक्षम हैं और आधुनिक हाइड्रोजन रेल तकनीक पर लगातार काम हो रहा है।

6. अन्य देश
ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा और अमेरिका भी हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक का परीक्षण या विकास कर रहे हैं। इन देशों का लक्ष्य भविष्य में डीजल इंजनों की जगह स्वच्छ ऊर्जा आधारित रेल प्रणाली विकसित करना है।

हाइड्रोजन ट्रेनें क्यों महत्वपूर्ण हैं?
कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन लगभग शून्य होता है।
धुएँ की जगह केवल जलवाष्प निकलती है।
डीजल ट्रेनों की तुलना में कम शोर करती हैं।
जिन रेलमार्गों का विद्युतीकरण नहीं हुआ है, वहाँ भी इन्हें आसानी से चलाया जा सकता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।

भारत की हरियाणा से शुरू हुई हाइड्रोजन ट्रेन इसी वैश्विक हरित परिवहन अभियान का हिस्सा है। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में देश के अन्य राज्यों में भी हाइड्रोजन ट्रेनें चलाई जा सकती हैं।