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तकनीक देसी, मगर भाषा विदेशी, ये गुलामी कब जाएगी

महोदय,

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हर स्तर पर राजभाषा सम्बन्धी प्रावधानों का उल्लंघन किया जा रहा है। मंत्रालय की हिंदी वेबसाइट महीनों से अद्यतित नहीं की गयी है, मंत्रालय की कोई भी ऑनलाइन सेवा अब तक हिंदी में शुरू नहीं की गयी है।

​मंत्रालय के कार्यक्रमों के बैनर, पोस्टर एवं आमंत्रण पत्र केवल अंग्रेजी में तैयार किये जाते हैं। संसद भवन परिसर में दिसंबर 21, 2015 को “विद्युत चालित बस” का प्रमं ने उद्घाटन किया, कार्यक्रम का बैनर अंग्रेजी में बनाया गया। (अनुलग्नक देखें) “विद्युत चालित बस” पर नाम एवं अन्य जानकारी केवल अंग्रेजी में छापी गई। बस का नाम भी कोई भारतीय नाम रखा जा सकता है पर शायद हम कंगाल हो चुके हैं जो ”इलेक्ट्रिक बस”, गो ग्रीन, बुलेट ट्रेन, मेट्रो ट्रेन में गर्व महसूस करते हैं? क्या देसी भाषाओं में ऐसी पहलों के नाम नहीं रखे जा सकते? यह सरासर गलत है, केंद्र सरकार के कामकाज में तो हिंदी कभी लागू नहीं हुई। क्या अब भारत सरकार हिंदी को जानबूझकर उन जगहों से भी ख़त्म करना चाहती है जहाँ वह बची हुई है?

मेरे शिकायती पत्र में उठाए गए प्रत्येक बिन्दु पर मैं आपके द्वारा ठोस कार्यवाही और सकारात्मक उत्तर की प्रतीक्षा कर रही हूँ क्या मुझे भारत की आम नागरिक होने के नाते जवाब भी नहीं मिलना चाहिए.

भवदीय
विधि जैन
१०३ ए, आदीश्वर सोसाइटी
सेक्टर-९ए, वाशी, नवी मुंबई ४००७०३

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