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गुजरात के भरुच में मुसलमानों के डर से जलाराम बापा मंदिर बिकाऊ है

“हर गुरुवार को, जलाराम बापा मंदिर (Jalaram Bapa Temple) में शाम की आरती होती थी। फिर एक दिन शौकत अली ने मंदिर के ठीक सामने एक घर खरीदा। उसने आरती का विरोध करना शुरू किया। धीरे-धीरे सोसाइटी के 28 घरों को मुसलमानों ने खरीद लिया और अब मंदिर में आरती बंद हो गई है। इतना ही नहीं, मंदिर को अब बेचने की भी तैयारी है। उस सोसाइटी में नए बसे लोग अब पेशाब करने के लिए पास के शिव मंदिर जाते हैं।” यह कोई कहानी नहीं है बल्कि भरूच के उसी सोसाइटी से जुड़ा वह कड़वा सच है जो ऐसे लोगों (मुस्लिमों) के डर से नाम न छापने की शर्त पर हमारे एक सूत्र ने हमें बताया।

ये वीडियो भी देखिये
https://www.youtube.com/watch?v=ZggdXquaaWI

उन्होंने आगे बताया, “भरूच के कुछ हिस्सों में 2019 में अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू किया गया था, लेकिन प्रशासन सहित कुछ लोगों ने इसमें छिपी खामियों का फायदा उठाते हुए कुछ क्षेत्रों में पूरी जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) ही बदल डाला। अब स्थिति यह हो गई है कि हिंदू केवल भरूच के सोनी फलियो (Soni Faliyo) और हाथीखाना (Hathikhana) क्षेत्रों में रह गए हैं। अब वहाँ भी मुश्किल से कोई 20-25 हिंदू परिवार बचे हैं। और वो भी अब यहाँ से अपने घरों को बेचकर और वह इलाका छोड़ देने का फैसला कर चुके हैं।”

कैसे उन इलाकों में यह पूरा खेल खेला गया। उन्होंने समझाते हुए कहा, “मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ। आप और मैं दोनों एक ही रेजिडेंशियल सोसाइटी में रह रहे हैं। आप मकान नंबर 11 में रहते हैं और मैं मकान नंबर 12 में, सामान्य तर्क यह कहता है कि यदि यह क्षेत्र अशांत क्षेत्र अधिनियम के अंतर्गत आता है तो एक रेसिडेंशियल सोसाइटी के सभी घर अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आएँगे। लेकिन कुछ नौकरशाहों और अन्य लोगों ने उन खामियों का लाभ लेते हुए दावा करते हैं कि एक घर एक टीपी योजना के तहत आता है और दूसरा दूसरे में और इसलिए एक घर अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आता है जबकि दूसरा नहीं। और यहीं से एक को खरीदने-बेचने का तरीका निकाल लिया जाता है। फिर भी हर कोई इस जनसांख्यिकी परिवर्तन से आँखें मूँदे हुए है।”

स्थानीय मीडिया चैनल गुजरातवॉच द्वारा शूट किए गए इस वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे हिन्दू अपने घरों और मंदिरों को बेचने के लिए मजबूर हैं। वहाँ लगे एक बैनर पर लिखा है, “इस चॉल के निवासी हिंदू हैं लेकिन अब यह सब बिकने को है।”

हालाँकि, मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों का यह भी कहना है कि जब वहाँ के निवासियों ने इन खामियों का फायदा उठाकर मुस्लिमों द्वारा संपत्ति पर कब्जा करने का विरोध किया, तो पुलिस और प्रशासन ने उन पर शांति भंग करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ ही मामला दर्ज करने की धमकी दी। उन्होंने कहा, “सरकार हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए चुनी गई थी, यही वजह है कि वे जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून, अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे कानून भी लाए, लेकिन इस तरह की खामियों का फायदा उठाया जा रहा है और प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है।”

इस सोसाइटी के निवासियों में से एक, गौरांग राणा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि यह एक पूरी कार्यप्रणाली है जहाँ हिंदुओं के घर पहले किसी हिंदू खरीदार द्वारा खरीदे जाते हैं और केवल 2-3 महीनों के भीतर एक मुस्लिम व्यक्ति इसे हिंदू खरीदार से खरीद लेगा। उन्होंने इस पर सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आपने कभी ऐसा लेन-देन देखा है जहाँ एक व्यक्ति घर को बेचने से पहले सिर्फ 2 महीने के लिए उसका मालिक हो? यह सब तब है जब ये घर अशांत क्षेत्र अधिनियम के तहत आते हैं?”

ऑपइंडिया ने पहले भी आपको बताया था कि कैसे इसी तरह का मामला सूरत से भी आया था, जहाँ एक मुस्लिम बिल्डर ने सूरत के अदजान इलाके में जमीन खरीदने के लिए एक अस्थाई हिंदू पार्टनर को आगे करके लाभ उठाया था, वहाँ भी अशांत क्षेत्र अधिनियम लागू था। अधिनियम को दरकिनार करते हुए, एक मंदिर के बगल में एक बिल्डिंग के निर्माण की अनुमति उस अस्थाई हिंदू पार्टनर को आगे करके मुस्लिम व्यक्ति द्वारा प्राप्त कर ली गई थी।

क्षेत्र में बचे हिंदू परिवारों के बढ़ते संकट पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यहाँ एक मंदिर है जहाँ आरती-भजन होता है। पहले वे (नए मुस्लिम निवासी) हंगामा करेंगे और स्पीकर के उपयोग पर आपत्ति करेंगे। जब हम फलिया (सामुदायिक क्षेत्र) में बैठते हैं, तो वे (मुस्लिम) हम पर मिसबिहैब करने का आरोप लगाते हैं और हमें झूठे मामलों में फँसाने की धमकी देते हैं। इस तरह हमारे लिए यहाँ रहना अब बहुत मुश्किल हो गया है।”

मंदिर बेचने के लिए लगाया गया पोस्टर (साभार- गुजरातवॉच)
साभार https://hindi.opindia.com/ से

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