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शोले फिल्म में जेएनयू के कन्हैया के दोस्त और मौसी का संवाद

????मौसी: “लेकिन बेटा, बुरा नहीं मानना, इतना तो पूछना ही पड़ता है, कि लड़के का खानदान क्या है ? उसके लछ्’छन कैसे हैं, कमाता कितना है ?

????दोस्त : “कमाने का तो ऐसा है मौसी ….के एक बार “स्टाईपेंड” बंद हो गयी तो … कमाने भी लगेगा |

????मौसी : “स्टाईपेंड मतलब, बच्चा पढ रहा है ? इतनी कम उमर में शादी ?”

????दोस्त : “नहीं नहीं ये मैंने कब कहा मौसी ? लडका तो २९ साल का है।”

????मौसी : “हाय दैया, इतना बड़ा लडका ? और रहता कहाँ है, होस्टल में ?”

????दोस्त : “वैसे रहता होस्टल में है, पर उसे कभी कभी पुलिस थाने में सोना पडता है ।”

????मौसी : “पुलिस थाने में ? तो क्या चोर है ?”

????दोस्त : “वो और चोर ना.. ना.. मौसी, वो तो क्रांतिकारी है, जब कभी कभी दोस्तों के साथ अफज़ल के समर्थन में नारे लगाता पकडा गया तो पुलिस उठा के ले जाती है।”

????मौसी : हाँ हाँ बस यही एक कमी रह गयी थी, मतलब देशद्रोही है वो ?”

????दोस्त : “मौसी आप तो मेरे दोस्त को गलत समझ रही हैं, वो तो इतना सीधा और भोला है कि, आजादी के चक्कर में, उसे होश ही नहीं रहता कि वो कौनसे देश का है ??”

????मौसी : “अरे बेटा , मुझ बुढिया को समझा रहे हो ? मेरे बचपन में हम सब आजाद हो चुके थे, अब कौनसी आजादी माँग रहा है वो ??”

????दोस्त: “बस मौसी, उसका पता चलते ही हम आप को खबर दे देंगे।”

????मौसी : “एक बात की दाद दूँगी बेटा, भले ही सौ बुराईयाँ हैं, तुम्हारे दोस्त में फिर भी तुम्हारे मुँह से उस के लिए, तारीफ ही निकलती है ???”

????दोस्त : “अब क्या करूँ मौसी…. मेरा तो नाम ही “केजरीवाल” है, मेरा दोस्त तो ऐसा ही होगा ??”

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