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“सुनो हे भागीरथी”काव्य संग्रह का लोकार्पण

‘विविध भारतीय भाषा संस्कृति संगम’ संस्था के संस्थापक आद तेजेश्वर राव जी और संस्था की अध्यक्षा लता तेजेश्वर ‘रेणुका’जी ने संस्था की ओर से विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य मे नवी मुंबई से गद्य-पद्य सम्मेलन और एक काव्य संग्रह “सुनो हे भागीरथी” का लोकार्पण कार्यक्रम संपन्न हुआ। संचालन श्रीमती परमिता षंडगी जी ने किया। डा मंजुला पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि और आई एन बी के प्रकाशक डॉ. संजीव कुमार, कार्यक्रम अध्यक्ष और संपादक आत्माराम शर्मा, विशेष अतिथि ओड़िया संस्था ‘प्रबासी साहित्य सँभार’ की अध्यक्षा मैत्रेयी कमिला और अध्यापिका एवं कवयित्री डॉ. प्रभा शर्मा ‘सागर’ उपस्थित थे।

इस अवसर पर संस्था की अध्यक्षा लता तेजेश्वरजी का काव्य संग्रह ‘सुनो हे भागीरथी’ का लोकार्पण हुआ। श्री लिंगम चिरंजीव राव व सुश्री उषा साहूजी ने इसकी समीक्षा करते हुए संग्रह की सराहना करते हुए संग्रह की रचनाओं को सुविधानुसार पाँच हिस्सों मे बाँटकर जो क्रमशः सामाजिक, प्राक्रतिक पर्यावरण, देश भक्ति राष्ट्रीयता, ग़ज़ल/ नज्मऔर विविध पर सभी रचनाओं पर विचार प्रस्तुत किए। नारी विमर्श को इस सभी रचनाओं का मूल केन्द्र बताया। इसी क्रम मे उषा साहूजी ने कहा लता जी की यह कृति उनके कविता प्रेम की कविताओं में देशप्रेम है, कुठाराघात है, दुनिया मे फैले द्वेष और नफरत को बहा ले जाओ, और अंत में उन्होंने ये विनती भी कहा कि शिव की जटा से उन्मुक्त हो लौट आओ।

मुंबई से मैत्रयी कमिलाजी ने ओड़िया में, पारमिता षडंगीजी, लता जी, आद डॉ.संजीव जी, आद आत्मारामजी, आद अश्विन उम्मीदजी, आद उषा साहूजी, डॉ. प्रभा शर्मा ‘सागर’, आद मधुश्री देशपांडे गानूजी, डॉ. अरुंधती महांतीजी, आद नीलम सोमानी, आद गीता षड़ंगीजी, आद स्नेह मिश्रजी, आद पूजा दीक्षितजी, आद प्रमिला शर्माजी, आद शिप्रा वर्माजी, विशाखापट्टनम से एसवीआर नायुडुजी, मीना गुप्ताजी, मधुबाला जी, लिंगम चिरंजीव रॉव, साधना सिंह, विदिशा से डॉ मंजुला पांडेय, ने ओड़िआ, भोजपुरी, संस्कृत, हिंदी में कविता पाठ प्रस्तुत किए। इसी कार्यक्रम के दूसरे सत्र में उषा जी की किताब ‘रुप्पी’ का विमोचन हुआ।

पारमिता षड़ंगीजी के संचालन में कार्यक्रम बहुत सफल रहा और अश्विन उम्मीदजी ने आभार प्रकट किया। सभी लोगों की प्रस्तुति ने होली के पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम को बहुत उँचाई प्रदान करते हुए सभी ने लता तेजेश्वर “रेणुका” जी को उनके काव्य संग्रह की बधाई
के साथ इसका समापन हुआ।

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