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रिश्तेदारों को नौकरियाँ देने के लिए सिफारिश करते हैं राष्ट्रपतिजी

देश के राष्ट्रपति का नाम एक विवाद में घसीट लिया गया है। एसार के अधिकारियों के कुछ कथित इंटरनल ईमेल्स में इस बात का जिक्र किया गया है कि प्रणव मुखर्जी की ओर से इस बात का दबाव डाला गया था कि स्टील से लेकर ऑइल सेक्टर तक में सक्रिय इस ग्रुप में एक व्यक्ति को नौकरी दी जाए। 

ईमेल के एक दूसरे ट्रेल में दिखाया गया है कि एसार ने लंदन में अपने ग्रुप की एक कंपनी में इंटर्नशिप के लिए मुखर्जी की एक ग्रैंड डॉटर के लिए वीजा के इंतजाम में कितनी फुर्ती दिखाई थी। 

राष्ट्रपति भवन के प्रवक्ता ने इस मामले में कॉमेंट करने से मना कर दिया, जबकि राष्ट्रपति भवन के अधिकारियों ने कहा कि इन ईमेल्स के स्रोत के बारे में उन्हें पक्के तौर पर कुछ नहीं मालूम है। एसार के एक प्रवक्ता ने कहा कि ग्रुप की कंपनियों में सभी नियुक्तियां कैंडिडेट्स की योग्यता के आधार पर होती हैं और जिन लोगों का जिक्र ईमेल्स में है, वे सभी संबंधित पदों के लिए पूरी तरह योग्य थे और उन्हें अपॉइंट करने का निर्णय किसी दबाव में नहीं लिया गया था। 

ईटी ने एसार ग्रुप के इन कथित आंतरिक ईमेल्स में से कुछ को देखा है। 10 सितंबर 2012 के एक ईमेल में एसार स्टील के सुनील बजाज ने अविजीत बनर्जी का सीवी एसार मुंबई में आदिल माइला और राहुल तनेजा को फॉरवर्ड किया था और साथ में यह टिप्पणी भी की थी कि अविजीत के नाम की 'माननीय राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने जोरदार सिफारिश' की है और वह उनका अपॉइंटमेंट कोलकाता में चाहते हैं। 

बजाज के ही 11 अक्टूबर 2012 के एक अन्य ईमेल में कहा गया है, 'मैं आपसे उसी (सीवी) को प्रोसेस करने का दोबारा अनुरोध कर रहा हूं क्योंकि मुझ पर माननीय प्रेजिडेंट की ओर से लगातार दबाव बना हुआ है।' अविजीत इस समय एसार के साथ कोलकाता में काम कर रहे हैं। 

कथित रूप से एसार मुंबई के आदिल माइला की ओर से एसार ऑइल के ब्रिटेन स्थित एचआर मैनेजर को भेजे गए एक ईमेल में लंदन ऑफिस से कहा गया था कि वह अपने संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए प्रणव मुखर्जी की पौत्री सुचिष्मिता मुखर्जी के लिए वीजा का इंतजाम करें। इस ईमेल में कहा गया था कि हम आपसे अपने कॉन्टैक्ट्स के जरिए वीजा सुनिश्चित करने के लिए कह रहे हैं क्योंकि उनकी (सुचिष्मिता) अनुभवहीनता को देखते हुए सामान्य स्थितियों में वीजा आवेदन खारिज हो जाएगा। 

ईटी ने इस संबंध में सुचिष्मिता के पिता और सांसद अभिजीत मुखर्जी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ था। एक अधिकारी ने कहा कि सुचिष्मिता ब्रिटेन में एक साल की इंटर्नशिप करने के लिए क्वॉलिफाइड थीं और उसे पूरा कर वह भारत लौट आईं। एसार के प्रवक्ता ने कहा, 'सुचिष्मिता मुखर्जी हमारी एम्प्लॉयी नहीं थीं, लेकिन एक साल के लिए उन्हें इंटर्न रखा गया था, जिसे उन्होंने पूरा किया।'

साभार- इकॉनामिक टाईम्स से 

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