Sunday, May 26, 2024
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मुंबई लोकल के महिला डिब्बों में ढोए जाते हैं जिंदा बम!

सेंट्रल रेलवे भले ही अपने यात्रियों को ट्रेनों में खतरनाक चीजें न ले जाने की घोषणा करते हुए थकता न हो, पर इस बात को खुद पर लागू नहीं करता है। सेंट्रल रेलवे यात्रियों की सुरक्षा के लिए बनाए गए अपने ही नियम धड़ल्ले से तोड़ रहा है।

मुंबई मिरर की एक खोजपूर्ण  रिपोर्ट में ये सामने आया है कि सेंट्रल रेलवे सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर रोज सैकड़ों यात्रियों की जान से खेल रहा है। लोकल ट्रेनों के लेडीज कोच में लाइव डेटोनेटर्स और अत्यधिक ज्वलनशील फ्लेयर्स ले जाए जाते हैं।

ये डेटोनेटर्स और फ्लेयर्स बड़े स्टील के बॉक्स में रखे जाते हैं। सरकारी भाषा में इन्हें 'लाइन बॉक्स' कहा जाता है। इनमें दूसरे उपकरणों के साथ टॉर्च और वॉकी-टॉकी भी रखे जाते हैं। इन्हें कुछ कुली तिलक नगर पर लेडीज के फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में चढ़ाते हैं और दूसरे कुली साउथ मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर उतारते हैं।

इन दोनों स्टेशनों के बीच 16 किमी लंबे सफर में करीब 35 मिनट का समय लगता है। इस पूरे सफर के दौरान इन बॉक्स की सुरक्षा के लिए कोई नहीं रहता है। तस्वीर में आप देख सकते हैं कि अक्सर यात्री इन बॉक्स पर बैठकर सफर करते हैं। कई बार वे जगह बनाने के लिए इन्हें खिसकाते भी हैं।

रेलवे के सुरक्षा निर्देशों के मुताबिक यात्री अपने साथ ज्वलनशील पदार्थ नहीं ले जा सकते हैं। बैन चीजों में पटाखे, गैस सिलिंडर, तेजाब, पेट्रोल, केरोसीन, सूखे पत्ते, वेल्डिंग का सामान और स्टोव शामिल हैं। 

इस मामले की जानकारी मुंबई मिरर की एक रीडर और खारगर निवासी जेसी जॉय ने दी थी। उन्होंने लेडीज कोच में जगह घेरने वाले इन बॉक्स की तस्वीरें भी भेजी थीं। इस बारे में रेलवे अधिकारियों ने सफाई दी कि डेटोनेटर्स का इस्तेमाल इमर्जेंसी के दौरान ट्रेन ड्राइवर दूसरी ट्रेनों के ड्राइवरों को अलर्ट करने के लिए करते हैं। अधिकारियों का कहना था कि डेटोनेटर्स को विस्फोट करने के लिए काफी दबाव की जरूरत होती है।

हालांकि, तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि ये बॉक्स ट्रेन चलने के दौरान खिसकते भी हैं। अगर यह चलती ट्रेन से नीचे या किसी ट्रैक पर गिर गए तो कोई भी अनहोनी हो सकती है। 2012 में डबलिन में एक ट्रेन ड्राइवर बैग में रखे डेटोनेटर के फट जाने से उसके हाथ और कान पर गंभीर चोट लग गई थी। दूसरी घटना में एसेक्स में 15 साल के बच्चे के डेटोनेटर पर आग लगाने से उसकी आंख की रोशनी चली गई थी।

इस बारे में बताने पर रेलवे पुलिस कमिश्नर मधुकर पांडेय ने कहा है कि वह इस मामले की जांच करेंगे और रेलने को जरूरी सुझाव भी देंगे।

साभार- मुंबई मिरर से 

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